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नेतुला महारानी मंदिर में पूजा करने से नेत्र विकार से मिलती है मुक्ति

नेतुला महारानी मंदिर में पूजा करने से नेत्र विकार से मिलती है मुक्ति

जमुई, 17 अक्टूबर (वार्ता) बिहार में जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड स्थित नेतुला महारानी मंदिर में पूजा करने से श्रद्धालुओं को नेत्र संबंधित विकार से मुक्ति मिलती है और उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

देश में कई मंदिरें है, जिनकी अलग-अलग मान्यताएं हैं। बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव में स्थित मां नेतुला महारानीमंदिर लोगों के बीच अपनी मान्यताओं को लेकर काफी प्रसिद्ध हैं। यह मंदिर जमुई का गौरव माना जाता है। जुमई रेलवे स्टेशन एवं लखीसराय से मां नेतुला महारानी मंदिर की दूरी करीब तीस किलोमीटर है। मान्यता है कि इस मंदिर में भक्तिभाव से पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में सालों भर नेत्र रोग से पीड़ित श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मनचाही मुराद पूरी होने के बाद श्रद्धालु सोने या चांदी की आंखें मंदिर में चढ़ाते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ किया था लेकिन उन्होंने अपने दामाद भगवान शंकर को नहीं बुलाया। शंकर जी की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती ने जब अपने पिता से इसका कारण पूछा तो उन्होंने शिव जी को अपशब्द कहे। इस अपमान से पीड़ित हुई सती ने अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी। भगवान शंकर को जब इस बात का पता चला तब उन्होंने भगवती सती के मृत शरीर को लेकर तीनों लोकों में तांडव मचाना शुरू कर दिया था। संपूर्ण सृष्टि भयाकूल हो गयी थी तभी देवताओं के अनुरोध पर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया था। लोगों का कहना है कि यहां सती की पीठ गिरी थी। लोग यहां मां के पीठ की भी पूजा करते हैं।

प्रेम सतीश

जारी वार्ता

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