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भारत


केंद्र को चालू बीमा वाले वाहनों को ही ईंधन देने से जुड़ी योजना तैयार करने का सुप्रीम निर्देश

नयी दिल्ली, 05 अगस्त (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने परिवहन मंत्रालय और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) को निर्देश दिया है कि ईंधन की बिक्री को गाड़ियों के चालू बीमा से जोड़ने की योजना बनायी जाये तथा बीमा नवीनीकरण न होने तक ऐसी गाड़ियों को पेट्रोल पंपों से ईंधन मिलना बंद होना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि इस कदम से अनिवार्य 'थर्ड-पार्टी बीमा' की आवश्यकता को सख्ती से लागू करने में मदद मिलेगी और बिना बीमा तथा बिना पंजीकरण वाले वाहनों की पहचान करने में आसानी होगी।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने मंगलवार को इस योजना का निर्देश देते हुए कहा कि इसके दोहरे फायदे होंगे। इससे एक तरफ बिना बीमा या पंजीकरण वाली गाड़ियों को पकड़ना आसान होगा, तो दूसरी तरफ लोग अपनी गाड़ी का बीमा चालू रखने के लिए प्रेरित होंगे।
पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए न्यायमूर्ति करोल ने कहा, "इस तरह की परियोजनाओं से मोटर वाहन अधिनियम (एमवीए) की धारा 146 के चालूानिक जनादेश का जमीनी स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित होगा। इसे स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरों के उपयोग से किया जा सकता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सैद्धांतिक रूप से इस पर कोई आपत्ति नहीं है।"
न्यायमूर्ति करोल ने टिप्पणी की कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा दिलाना ही नहीं है, बल्कि उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाना भी है।
उन्होंने कहा कि भारत में सड़क सुरक्षा की एक दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई यह है कि 'थर्ड-पार्टी मोटर वाहन बीमा' को अनिवार्य बनाने वाले कानूनी ढांचे के बावजूद इसका पालन काफी कम होता है।
चालू बीमा पॉलिसी के आधार पर ही पेट्रोल-डीजल देने संबंधी पायलट परियोजना का निर्देश उच्चतम न्यायालय के उन निर्देशों की शृंखला का हिस्सा है, जिसमें न्यायालय ने पाया कि 'भारत में सड़क सुरक्षा की दुखद स्थिति यह है कि थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होने के बावजूद लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं। नतीजतन, सड़क हादसों का शिकार होने वाले पीड़ितों या उनके परिवारों को मुआवजे के लिए दर-दर भटकना पड़ता है...।"
न्यायालय ने निराशा व्यक्त किया, "यह जानकर हैरानी होती है कि भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56 प्रतिशत वाहनों का बीमा ही नहीं है।"
पीठ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया, "देश के कुल 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं, जो बेहद गंभीर आंकड़ा है।"
न्यायालय ने 'ई-डार' पोर्टल पर उपलब्ध विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि देश में होने वाले सड़क हादसों में से लगभग 22 प्रतिशत दुर्घटनाएं बिना बीमा वाले वाहनों से होती हैं।
आलम अशोक
वार्ता
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