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बिना चर्चा के बैंककार बही साक्ष्य विधेयक लोक सभा में पारित

बिना चर्चा के बैंककार बही साक्ष्य विधेयक लोक सभा में पारित

नयी दिल्ली, 05 अगस्त (वार्ता) लोक सभा में बुधवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया।




एक बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे शुरू होने पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी तथा अन्य विपक्षी दलों के सदस्य 20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी में विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा चोरी की जांच की मांग करते हुए हंगामा करने लगे थे।




हंगामे के बीच ही पीठासीन जगदम्बिका पाल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चर्चा के लिए विधेयक पेश करने की अनुमति दी। इसके बाद उन्होंने विधेयक में संशोधन के नोटिस देने वालों के नाम पुकारे। किसी सदस्य के संशोधन पेश नहीं करने पर श्रीमती सीतारमण ने विधेयक पारित करने का प्रस्ताव किया। हंगामे के बीच बिना चर्चा के विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य औपनिवेशिक दौर के 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891' को खत्म करना है।


 


यह एक आधुनिक कानूनी ढांचा बनाने का भी प्रस्ताव करता है। यह ढांचा देश के बैंकिंग सेक्टर के मुख्य रूप से डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने को ध्यान में रखकर बनाया गया है। प्रस्तावित कानून बैंक के रिकॉर्ड की परिभाषा का काफी विस्तार करता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड-आधारित रिकॉर्ड को भी शामिल किया गया है, ताकि ऑनलाइन बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने और डिजिटल वित्तीय लेन-देन के बढ़ते चलन को मान्यता दी जा सके।




यह विधेयक बैंक अधिकारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानी से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय भी पेश करता है। इसमें प्रस्ताव है कि जिन मामलों में बैंक खुद कार्रवाई का पक्षकार नहीं है, वहां बैंक अधिकारियों को बुलाने या मूल बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश देने से पहले अदालतों को लिखित रूप में 'विशेष कारण' दर्ज करना होगा।




इसके अलावा, यह कानून इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल सिग्नेचर के लिए सर्टिफिकेशन की ज़रूरतों को एक समान बनाने का प्रयास करता है। इसका मकसद अधिक कानूनी स्पष्टता प्रदान करना और न्यायिक कार्यवाही में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को स्वीकार करने, उनकी पुष्टि करने और उनके इस्तेमाल को आसान बनाना है।




श्रवण उप्रेती

वार्ता