पार्लियामेंटPosted at: Aug 1 2025 3:09PM हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगितनयी दिल्ली 01 अगस्त (वार्ता) लोकसभा में बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर शुक्रवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने भारी हंगामा करते हुए नारेबाजी की जिसके कारण सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने एक बार के स्थगन के बाद दो बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरु की विपक्ष के सदस्य हाथों में नारे लगाते हुए और हाथों में तख्तियां लेकर सदन के बीचों बीच आकर हंगामा करने लगे। हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाया और इसके बाद उन्होंने नियम 377 के तहत सदस्यों से अपने मुद्दे सदन के पटल पर यह कहते हुए रखने को कहा कि उन्हें पढ़ा हुआ समझा जाएगा।इसी बीच कानून राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा गोवा विधानसभा में अनुसूचति जनजाति को प्रतिनिधित्व देने को लेकर विधेयक लंबित पड़ा है और इस विधेयक को पारित कराया जाना आवश्यक है। उनका कहना था कि विपक्षी सदस्यों के इस विधेयक के पारित कराने में सहयोग नहीं देने का मतलब है कि वे इस विधेयक के विरोधी है।श्री तेन्नेटी ने भी सदस्यों से कहा कि यह महत्वपूर्ण विधेयक है जो पिछले सप्ताह से लंबित पड़ा हुआ है। उनका कहना था कि खुद वह दो बार इस विधेयक पर सदन में चर्चा कराने का आग्रह सदस्यों से कर चुके हैं। यह महत्वपूर्ण विधेयक है और सदस्यों को इस पर चर्चा में शामिल होना चाहिए इसलिए सभी अपनी सीटों पर बैठ जाएं। उनकी अपील का सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ और वे हंगामा करते रहे जिसके कारण उन्हें सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।इससे पहले सुबह 11 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू किया, विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन के बीचोबीच आ गये। श्री बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाये रखने की अपील करते हुए कहा “मैं लगातार आग्रह कर रहा हूं, प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है। नारेबाजी और तख्तियां दिखाकर प्रश्नकाल में सदस्यों का अधिकार नहीं छीन सकते हैं। यह ग़लत आचरण और ग़लत व्यवहार है, जो उचित नहीं है।”उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता टी आर बालू का नाम लेकर कहा,“ आप वरिष्ठ सदस्य हैं, आपको यह उचित लगता है, क्या। आपको संसदीय परंपराओं का पालन करना चाहिए। लोकतंत्र को मजबूत करना है, तो प्रश्न उठाने देना होगा ताकि सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके। हंगामा कर रहे सदस्य लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा होने दें और देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। देश में जो परिवर्तन हो रहा है, उसके बारे में भी लोगों को जानकारियां दें। नारेबाजी और तख्तियां दिखाने से जनता की अभिव्यक्ति नहीं होती है। जनता ने अपनी बात रखने के लिए सदन में कहा अवसर दिया है, इसे नारेबाजी में न गंवायें।”अध्यक्ष के बार-बार आग्रह के बावजूद हंगामा नहीं थमा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी थी।अभिनव, मधुकांत वार्ता