More News06 Mar 2026 | 11:57 AMमुंबई, 06 मार्च (वार्ता) गायिका शिल्पी राज और अभिनेत्री माही श्रीवास्तव का देसी लोकगीत 'मछरिया मारे चलले' रिलीज हो गया है। देसी लोकगीत 'मछरिया मारे चलले' का निर्माण फिल्म निर्माता रत्नाकर कुमार ने किया है। यह गाना देसी अंदाज में फिल्माया गया है, जोकि देखते ही बन रहा है। लोकगीत 'मछरिया मारे चलले' वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज कर दिया गया है। .
see more.. 06 Mar 2026 | 11:46 AMमुंबई, 06 मार्च (वार्ता) फिल्म निर्माता एकता कपूर ने अपने शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में कंसेंट और सेफ टच का संदेश दिया है। स्टार प्लस ने सालों से ऐसी कहानियाँ बनाई हैं जो भावनाओं और गहरे ड्रामे से भरी होती हैं। इसके सबसे यादगार शोज में से एक, 'क्यूँकि सास भी कभी बहू थी', सिर्फ एक फैमिली सीरियल से कहीं बढ़कर था। यह एक ऐसा शो बना जिसने असल जिंदगी की समस्याओं और जरूरी सामाजिक मुद्दों को बहुत ही सहज तरीके से दिखाया, और उन किरदारों के जरिए बातचीत शुरू करने में मदद की जिनसे दर्शक खुद को गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करते थे।.
see more.. 06 Mar 2026 | 11:46 AMमुंबई, 06 मार्च (वार्ता) फिल्म निर्माता एकता कपूर ने अपने शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में कंसेंट और सेफ टच का संदेश दिया है। स्टार प्लस ने सालों से ऐसी कहानियाँ बनाई हैं जो भावनाओं और गहरे ड्रामे से भरी होती हैं। इसके सबसे यादगार शोज में से एक, 'क्यूँकि सास भी कभी बहू थी', सिर्फ एक फैमिली सीरियल से कहीं बढ़कर था। यह एक ऐसा शो बना जिसने असल जिंदगी की समस्याओं और जरूरी सामाजिक मुद्दों को बहुत ही सहज तरीके से दिखाया, और उन किरदारों के जरिए बातचीत शुरू करने में मदद की जिनसे दर्शक खुद को गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करते थे।.
see more.. 06 Mar 2026 | 10:56 AMमुंबई, 06 मार्च (वार्ता)सिंगर जैस्मीन अख्तर ने अपना लेटेस्ट ट्रैक “व्हिप” रिलीज़ किया है, जो मशहूर म्यूज़िक प्रोड्यूसर डॉ. ज़्यूस के साथ एक हाई-एनर्जी कोलेबोरेशन है। एटीट्यूड, बोल्ड विज़ुअल्स और पावरफुल बीट्स से भरा यह नया गाना पंजाबी म्यूज़िक लवर्स के बीच पहले से ही एक्साइटमेंट पैदा कर रहा है।.
see more.. 06 Mar 2026 | 10:40 AMमुंबई, 06 मार्च (वार्ता) बॉलीवुड के जानेमाने चरित्र अभिनेता और निर्देशक सौरभ शुक्ला का कहना है कि नाटक 'जब खुली किताब' पर फिल्म बनाने का विचार उनके मन में पहले से था। कभी-कभी किसी कहानी की मंज़िल कैमरा शुरू होने से पहले ही तय हो जाती है। “जब खुली किताब” की यात्रा भी ऐसी ही है। इसकी शुरुआत थिएटर के मंच से हुई थी और अब यह फिल्म के रूप में दर्शकों के सामने आ रही है।.
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