Friday, Apr 17 2026 | Time 05:12 Hrs(IST)
राज्य » बिहार / झारखण्ड


अल्पसंख्यकों के नाम पर राजनीति, पर सदन में विपक्ष की चुप्पी - अंजुम आरा

पटना, 25 फरवरी (वार्ता) जनता दल यूनाईटेड (जदयू) की प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अंजुम आरा ने बुधवार को विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि जब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट सदन के पटल पर प्रस्तुत किया गया, तब यह अपेक्षा थी कि जो दल स्वयं को अल्पसंख्यकों का सबसे बड़ा हितैषी बताते हैं, वे शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर बहस करेंगे,लेकिन आश्चर्यजनक रूप से न कोई प्रश्न उठाया गया, न कोई सुझाव दिया गया और न ही किसी प्रकार की सार्थक चर्चा की गई।
श्रीमती अंजुम आरा ने आज बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को 896 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2005 के 3.53 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट से तुलना की जाए तो आज यह राशि बढ़कर 1,041 करोड़ रुपये (2025-26) तक पहुंच चुकी है, जो 300 गुना से अधिक वृद्धि को दर्शाती है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि नीति-स्तर पर प्राथमिकता और प्रतिबद्धता का संकेत है।
जदयू प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने 534 प्रखंडों में ब्लॉक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है और 1,076 नए पद सृजित किए हैं, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी हो सके। उन्होंने कहा कि मदरसों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था, अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों का विस्तार, तलाकशुदा महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता तथा 9,000 से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी जैसी पहलें इस दिशा में ठोस कदम मानी जा सकती हैं। ये प्रयास दर्शाते हैं कि योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की मंशा भी स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, जब सदन में इन विषयों पर चर्चा का अवसर था, तब विपक्ष की चुप्पी यह प्रश्न खड़ा करती है कि क्या अल्पसंख्यक कल्याण केवल चुनावी भाषणों का मुद्दा बनकर रह गया है। यदि किसी वर्ग के हितों की बात सचमुच प्राथमिकता में हो, तो उसका सबसे सशक्त मंच सदन ही होता है, जहां नीति और बजट पर प्रभाव डाला जा सकता है। लोकतंत्र में जिम्मेदारी केवल आरोप लगाने से पूरी नहीं होती, बल्कि बहस, सुझाव और सहभागिता से निभाई जाती है।
श्रीमती अंजुम आरा ने कहा कि विकास की राजनीति और वोट बैंक की राजनीति के बीच का अंतर काम और व्यवहार से स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल नारों से संतुष्ट नहीं होतीय वह आंकड़ों, नीतियों और जमीनी परिणामों के आधार पर आकलन करती है। ऐसे में सदन की चुप्पी और मंच की बयानबाज़ी के बीच का विरोधाभास स्वयं एक बड़ा राजनीतिक संदेश बनकर उभरता है।
प्रेम
वार्ता
More News

राज्यपाल ने झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अमिताभ कुमार गुप्ता को राज्य का नया लोकायुक्त नियुक्त किया

16 Apr 2026 | 11:26 PM

रांची, 16 अप्रैल (वार्ता) झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अमिताभ कुमार गुप्ता को राज्य का नया लोकायुक्त नियुक्त किया है। .

see more..

असम की थकान मिट गई हो तो राज्य पर ध्यान दें मुख्यमंत्री : सुदेश महतो

16 Apr 2026 | 11:20 PM

रांची, 16 अप्रैल (वार्ता) झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू प्रमुख सुदेश महतो के समक्ष पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में कोयलांचल के जेएलकेएम के कई नेताओं ने पार्टी का दामन थामा।.

see more..

झारखंड भाजपा का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात, सीआरएफ फंड से 15 सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी

16 Apr 2026 | 11:19 PM

दिल्ली/ रांची, 16 अप्रैल (वार्ता) झारखंड भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू के नेतृत्व में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से नई दिल्ली में मुलाकात की। .

see more..

लातेहार में मेगा रक्तदान शिविर, 265 यूनिट से अधिक रक्त संग्रह मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने 50 बेड हॉस्टल की घोषणा की

16 Apr 2026 | 7:55 PM

लातेहार, 16 अप्रैल (वार्ता) झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा के तिलैयाटांड़ स्थित मदरसा खैरुल उलूम परिसर में गुरुवार को झारखंड अंजुमन के बैनर तले मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।.

see more..

सभी घरों पर बीएलओ की जानकारी वाले स्टीकर अवश्य लगाएं: के. रवि कुमार

16 Apr 2026 | 7:55 PM

रांची, 16 अप्रैल (वार्ता) झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा है कि विगत गहन पुनरीक्षण के मतदाता सूची से मैपिंग एवं वर्तमान मतदाता सूची के एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ एंड डुप्लीकेट की सूची जितनी सुदृढ़ बनेगी उतना ही मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के क्रम में आसानी आएगी। .

see more..