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सरकार पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़ों पर कायम , कहा - आंकड़ों की तुलना सही आधार पर हो

नयी दिल्ली, 2 सितंबर (वार्ता) सरकार ने वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में आर्थिक वृद्धि के अनुमानित आंकड़ों पर छिड़ी बहस के बीच बुधवार को इनसे संबंधित कुछ और जानकारियां देते हुए इन आंकड़ों का बचाव किया तथा कहा है कि आंकड़ों की तुलना एक ही तरह के और नवीनतम तुलना योग्य आंकड़ों से ही की जा सकती है।
सरकार ने ऐसी आलोचनाओें को खारिज किया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमान को बेहतर दिखाने के लिए पिछले साल के आंकड़ों को घटा दिया गया।
सोमवार को जारी आंकड़ों में पहली तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के 7.8 प्रतिशत और वर्तमान कीमतों पर 10.30 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। कुछ आलोचकों ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं और वित्त मंत्रालय में काम कर चुके एक पूर्व अधिकारी ने तर्क दिया है कि पिछले साल के चालू कीमतों पर आधारित जीडीपी के आंकड़ों को संशोधित नहीं करती तो पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत बनती। कुछ आलोचकों ने राष्ट्रीय लेखांकन पद्धति में वास्तविक जीडीपी आंकने के लिए दोहरी अपस्फीति (मुद्रास्फीति के समायोजन) का फार्मूला लागू किये जाने के तौर तीरकों पर भी सवाल उठाए हैं।
इस तरह की आलोचनाओं के बीच सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सूचनाएं जारी करते हुए कहा है कि पिछले साल पहली तिमाही के चालू कीमतों के आंकड़ों में संशोधन का तर्क समझाते हुए कहा है कि 2025-26 की पहली तिमाही के जीडीपी के अनुमान 29 अगस्त 2025 को जारी किये गये थे जो वर्ष 2011-12 की कीमतों पर आधारित थे । उस समय वर्तमान कीमत पर तिमाही जीडीपी का अनुमान 86.05 लाख करोड़ रुपये आंका गया था।
इस वर्ष में 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर शुरू की गयी जीडीपी की नयी श्रृंखला पूरी समय-श्रृंखला को व्यापक रूप से संशोधित किया गया और उसके आधार पर 2025-26 की पहली तिमाही के लिए वर्तमान कीमतों पर जीडीपी को संशोधित कर 80.32 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था। उसके बाद जब 5 जून 2026 को 2025-26 के जीडीपी के अनंतिम अनुमानों को जारी किया गया तो नये आंकड़ों 2025-26 का यह अनुमान पुन: संशोधित कर 80.44 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया।
उसके बाद औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और उत्पाद मूल्य सूचकांक (पीपीआई) की नई श्रृंखलाओं के जारी होने और उनको जीडीपी की गणना में करने से वह आंकड़ा 80.00 लाख करोड़ रुपये हो गया। मंत्रालय ने कहा है कि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के चालू कीमतों पर आधारित जीडीपी के आंकड़ों का 86.05 लाख करोड़ रुपये से 80.00 लाख करोड़ रुपये पर आना " आधार वर्ष में बदलाव, बेहतर आंकड़ा स्रोतों के समावेश, बेहतर पद्धतियों का उपयोग और उपलब्ध संकेतकों को अद्यतन किये जाने का परिणाम है।..यह कहना गलत है कि पिछले वर्ष के जीडीपी को जानबूझकर कम किया गया ताकि चालू वर्ष की वृद्धि दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जा सके।"
सरकार ने कहा है, " इसलिए 2026-27 के पहली तिमाही के चालू कीमतों पर 88.27 लाख करोड़ रुपये के जीडीपी के अनुमान की प्रासंगिक तुलना 2025-26 की पहली तिमाही के 80.32 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से की जानी चाहिए, न कि पुरानी श्रृंखला के 86.05 लाख करोड़ रुपये के जीडीपी के अनुमान से।"
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर 31 अगस्त 2026 को जारी जीडीपी के अनुमान उत्पादनकर्ता मूल्य सूचकांक (पीपीआई) की नई श्रृंखला, बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक (बैंकिंग सेवाएं कीमत सूचकांक – बीकेएसपीआई) तथा विभिन्न प्रशासनिक स्रोतों से प्राप्त अद्यतन आंकड़ों का उपयोग करके संशोधित किया गया है।
मंत्रालय ने डबल डिफेशन (वास्तविक जीडीपी पर पहुंचने के लिए अंतिम उत्पाद और उसमें प्रयुक्त कच्चे और माध्यमिक माल की कीमतों में दोहरी अपस्फीति के फार्मूले के उपयोग ) के बारे में चार्ट देकर स्पष्ट किया है कि जब उत्पादन सामग्री की कीमतें उत्पाद की कीमतों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती हैं, तो वर्तमान कीमतों पर सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) की वृद्धि दर वास्तविक जीवीएकी तुलना में धीमी हो सकती है। इससे इनपुट की कीमतों और अंतिम उत्पाद की कीमतों में होने के बावजूद डीफ्लेटर नकारात्मक हो सकता है।
मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण उन आलोचनाओं के संदर्भ में दिया है जिमनें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र के जीवीए के लिए निहित मूल्य अपस्फीतिकारक ( डीफ्लेटर) का अनुपात -1.5 प्रतिशत (नकारात्मक 1.5 प्रतिशत) कैसे हो सकता है जबकि जबकि विनिर्मित उत्पाद और उत्पादन में लगने वाले कच्चे माल और मध्यवर्ती सामानों - दोनों की कीमतें बढ़ी हैं।
सरकार ने कहा है, 'यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रत्येक वस्तु या वस्तु-समूह का अपस्फीतिकरण उस वस्तु के लिए उपयुक्त संबंधित मूल्य सूचकांक के माध्यम से किया जाता है। निहित जीडीपी अपस्फीतिकारक अनुपात केवल एक व्युत्पन्न (परिणामी) संख्या है, जो वस्तु और वस्तु-समूह स्तर पर उपयोग किए जाने वाले 300 से अधिक अलग-अलग स्फीतिक समायोजन अनुपातों प्रभाव को दर्शाती है।
चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में वर्तमान और स्थिर दोनों कीमतों पर जीडीपी में बहुत अधिक सांख्यिकीय विसंगतियों के बारे में कहा गया है कि यह स्वाभाविक है। इस तरह की विसंगति उत्पादन और व्यय दृष्टिकोण से तैयार किए गए जीडीपी अनुमानों के बीच अंतर से उत्पन्न होने वाला एक सांख्यिकीय संतुलन मद (आंकड़ा होता) है। इसलिए केवल विसंगति में बदलाव को अपने आप यह प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए कि रिपोर्ट किया गया जीडीपी कम या अधिक आंका गया है।
मनोहर, मधुकांत
वार्ता
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