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भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए आरएसएस के नेतृत्व वाला 'पंच परिवर्तन' आवश्यक हैः शिवाजी महाराज

पुणे, 12 जून (वार्ता) संत तुकाराम महाराज के वंशज शिवाजी महाराज मोरे ने कहा है कि भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने के लिए समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है, और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "पंच परिवर्तन"का दृष्टिकोण अपनाया है।
महाराज मोरे शुक्रवार को पुणे महानगर के छत्रपति संभाजी संभाग द्वारा पुणे के के.बी. जोशी ऑडिटोरियम में आयोजित धर्माचार्य परिषद में बोल रहे थे। उन्होंने ने सामाजिक परिवर्तन के लिए पांच मुख्य सिद्धांतों पर आधारित एक रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें पारिवारिक जागरूकता और मजबूती (कुटुंब प्रबोधन), सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक जिम्मेदारियां और आत्म-जागरूकता (स्वबोध) शामिल है।
उन्होंने कहा कि जहां दुनिया भर के देश भारतीय परिवार प्रणाली के महत्व को तेजी से पहचान रहे हैं, वहीं दुर्भाग्य से भारत में ही यह कमजोर हो रही है। उन्होंने इस संस्था को बनाए रखने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच अधिक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।
सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में संतों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि एक समावेशी समाज के निर्माण के लिए जातिगत भेदभाव को दूर करना आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण पर बात करते हुए, उन्होंने प्रकृति के प्रति सम्मान की भारत की पुरानी परंपरा के बावजूद पेड़ों की घटती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नागरिकों को न केवल अपने अधिकारों पर बल्कि अपने कर्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिए और युवा पीढ़ी से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आत्म-जागरूकता पर आधारित जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।
इस मौके पर आरएसएस के प्रांत कार्यकारी सदस्य हेमंत राव हरहारे ने कहा कि संगठन 1925 से छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों से प्रेरित होकर चरित्र-निर्माण और राष्ट्र-निर्माण के कामों में लगा हुआ है। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर पूरे महाराष्ट्र में हज़ारों कीर्तनकार और आध्यात्मिक उपदेशक हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के संदेशों को अपने प्रवचनों में शामिल करें, तो इससे समाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा। इस सम्मेलन में वारकरी संप्रदाय के प्रतिनिधि, इस्कॉन के सदस्य, श्री श्री रवि शंकर के अनुयायी, विभिन्न मठों और मंदिरों के ट्रस्टी और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की पूजा और वंदे मातरम के गायन से हुई। संभागीय धर्माचार्य प्रमुख दीपक अष्टपुत्रे ने धर्माचार्य पहल के महत्व पर प्रकाश डाला और इसके उद्देश्यों के बारे में बताया। कार्यक्रम का समापन पसायदान के पाठ के साथ हुआ।
संतोष
वार्ता
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