Tuesday, Jan 13 2026 | Time 14:21 Hrs(IST)
भारत


राजस्थान के धर्मांतरण कानून को चुनौती देने वाली याचिका को उच्चतम न्यायालय ने दूसरे राज्यों की ऐसी ही याचिकाओं के साथ जोडने का आदेश दिया

नयी दिल्ली, 09 दिसंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) की 'राजस्थान गैरकानूनी धार्मिक धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2025' के कई प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देेेने वाली याचिका को न्यायालय के समक्ष पहले से लंबित इसी तरह की याचिकाओं के साथ जोड़ने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के न्यायालय को यह बताने के बाद मंगलवार को यह आदेश पारित किया कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के बनाये धर्मांतरण विरोधी कानूनों के खिलाफ भी ऐसी भी समान प्रकृति वाली याचिकाएं लंबित हैं। इसके अलावा पीठ ने यह भी पाया कि कुछ अन्य रिट याचिकाएं जैसे एम. हुजैफा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य, दशरथ कुमार हिनुनिया बनाम राजस्थान राज्य, पीयूसीएल बनाम राजस्थान राज्य और जयपुर कैथोलिक वेलफेयर सोसाइटी बनाम राजस्थान राज्य, पहले से ही न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष लंबित हैं।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने निर्देश दिया कि सीबीसीआई की याचिका को दूसरी याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए।
याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि राजस्थान अधिनियम की कई धाराएं, विशेष रूप से धारा 5(6), 10(3), 12 और 13, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं और अधिकारियों के अत्यधिक हस्तक्षेप को आमंत्रित करती हैं। इसमें कहा गया है कि कानून की धारा धारा 5(6) एक राजपत्रित अधिकारी को जांच के बाद, संपत्ति की कुर्की/जब्ती करने के लिए तब सक्षम बनाती है जहां कथित गैरकानूनी धर्मांतरण हुआ हो। धारा 12 जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से कथित अवैध धर्मांतरण से जुड़े परिसर को जब्त करने का आदेश देता है। धारा 13 उन निर्माणों को ध्वस्त करने का प्रावधान करता है जहां कथित तौर पर अवैध धर्मांतरण हुए हैं। धारा 10(3) राज्य को उल्लंघन पाए जाने वाले संस्थानों के पंजीकरण या लाइसेंस रद्द करने, खाते सील करने, संपत्ति जब्त करने और एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का अधिकार देता है।
याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि ये प्रावधान न्यायिक सुनवाई के बिना ही कुर्की और तोड़फोड़ की अनुमति देकर संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 22 और 300 ए का उल्लंघन करते हैं। ये कानून अधिकारियों को अनिवार्य रूप से न्यायिक शक्तियों के इस्तेमाल का हक देता है। इससे विधि का शासन और शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत कमजोर होता है।
नवीनतम टैगिंग आदेश के साथ, राजस्थान अधिनियम को दी गयी सभी चुनौतियां अब उसी पीठ के समक्ष रखी जाएंगी जो अन्य राज्यों के संबंधित मामलों की सुनवाई कर रही है।
शोभित जितेन्द्र
वार्ता
More News

शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे का जवाब दें मोदी : कांग्रेस

13 Jan 2026 | 2:00 PM

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (वार्ता) कांग्रेस ने कहा है कि चीन लगातार भारत की सीमाओं को अपना बताकर वहां ढांचागत बुनियादी सुविधा विकसित करने को सही बता रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इसका करारा जवाब देना चाहिए।.

see more..

दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे के "ऑपरेशन गैंग बस्ट" में सैकड़ों अपराधियों को पकड़ा

13 Jan 2026 | 1:16 PM

नयी दिल्ली 13 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस ने गैंगस्टरों और संगठित अपराधियों को निशाना बनाते हुए 48 घंटे की कार्रवाई में कई अपराध नेटवर्क से जुड़े सैकड़ों अपराधियों को गिरफ्तार किया है।.

see more..

दिल्ली में कड़ाके की ठंड जारी, एक्यूआई 'बहुत खराब'

13 Jan 2026 | 12:45 PM

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को तापमान में गिरावट आने से कड़ाके की ठंड का प्रकोप जारी रहा एवं वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर बहुत खराब दर्ज किया गया। .

see more..

आतिशी ने गुरुओं के खिलाफ की बेअदबी : मिश्रा

13 Jan 2026 | 12:13 PM

नयी दिल्ली 13 जनवरी (वार्ता) दिल्ली के कला एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सिख गुरुओं के लिए जो शब्द बोले गये वह बेअदबी, गुनाह और पाप हैं तथा उनका कोई औचित्य नहीं था।.

see more..