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आतंकवाद का दुष्प्रचार करने पर होगी कानूनी कार्रवाई: मनोज सिन्हा

श्रीनगर,13 जुलाई (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में आतंकवाद का दुष्प्रचार को वैधता’ प्रदान करने की कोशिश करने वालों की रविवार को क़ड़ी आलोचना की और चेतावनी दी कि प्रशासन पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों की बातें दोहराने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा।
श्री सिन्हा जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में आतंकवाद के कारण जान गंवाने वाले 40 लोगों के परिजनों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद एक समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार देता है लेकिन यह किसी को भी राष्ट्र की अखंडता से समझौता करने के लिए इस अधिकार का उपयोग करने की अनुमति नहीं देता है।
अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने वालों पर सीधा निशाना साधते हुए श्री सिन्हा ने कहा, ‘’कुछ लोग खुलेआम टीआरएफ (द रेजिस्टेंस फ्रंट) और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी समूहों की भाषा बोल रहे हैं। यह अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं बल्कि देश के साथ विश्वासघात है। ऐसे कृत्यों को बख्शा नहीं जाएगा।’’किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कुछ चुनिंदा लोगों पर पाकिस्तान के आतंकवादी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा,"वे आतंकवाद को ऑक्सीजन और खाद दे रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अब बहुत हो गया। मुझे जम्मू-कश्मीर के लोगों द्वारा दिखाया गया साहस मुझे शक्ति देता है। बाईस अप्रैल के बाद पहली बार आम नागरिक पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। यही कश्मीर की असली आवाज़ है जो कश्मीर को आतंक मुक्त बनाना चाहती है।"उन्होंने कहा कि दुष्प्रचार कर अशांति फैलाने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। उपराज्यपाल ने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को न्याय, रोज़गार और पहचान दिलाने का भी संकल्प लिया।
श्री सिन्हा ने कहा,“मैं यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं कि इन परिवारों को न्याय, नौकरी, मान्यता और सहयोग मिले जिसके वे वर्षों की पीड़ा के बाद हकदार हैं। जम्मू-कश्मीर के हज़ारों निर्दोष नागरिकों को अंततः पहचान और सम्मान देना एक ऐतिहासिक कदम है। इन परिवारों के बारे में सच्चाई को जानबूझकर दबाया गया और कोई भी उनके आंसू पोंछने नहीं आया।सभी जानते थे कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी क्रूर हत्याओं में शामिल थे लेकिन किसी ने भी हजारों बुजुर्ग माता-पिता, पत्नियों, भाइयों या बहनों को न्याय नहीं दिलाया।”
श्री सिन्हा ने कहा कि प्रशासन अब उन सभी परिवारों के दरवाज़े तक पहुंचेगा जो दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनके लिए रोज़गार, पुनर्वास और आजीविका की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पीड़ितों की शिकायतें दर्ज करने के लिए ज़िलों में हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं।उन्होंने कहा,“हमें 90 के दशक से भी सैकड़ों शिकायतें मिल रही हैं। कई मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं की गईं, ज़मीनों पर अतिक्रमण किया गया और संपत्तियां ध्वस्त कर दी गईं और मैं लोगों को आश्वस्त करता हूँ कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
श्री सिन्हा ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने हाल ही में अनंतनाग में कुछ आतंकवाद पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और यह उनके लिए बेहद भावनात्मक मुलाकात थी, क्योंकि उन्हें सहायता और समर्थन दिया गया था। उपराज्यपाल ने कहा, ‘’इनमें से कई परिवार वित्तीय सहायता और सरकारी नौकरियों के हकदार थे, लेकिन उन्हें कभी ये नहीं मिलीं। उनसे मिलकर बहुत दुख हुआ। हमने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर तुरंत कार्रवाई की और यह निर्णय लिया गया कि जो भी पात्र हैं उन्हें सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।”
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने पीड़ितों को स्वरोज़गार सहायता प्रदान करने के लिए भी कदम उठाए हैं। जिन मामलों में संपत्तियां ज़ब्त की गईं और एफआईआर दर्ज की गईं, उनका उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया कि ऐसी संपत्तियां अब उनके असली मालिकों को वापस कर दी जाएगी।
श्री सिन्हा ने कहा कि गृह सचिव को इस कार्यक्रम का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है और अब हर ज़िले के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से आतंकवाद से प्रभावित परिवार सीधे संपर्क कर सकते हैं, अपनी अपील दायर कर सकते हैं और न्याय की गुहार लगा सकते हैं।
अभय,आशा
वार्ता
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उन्होंने कहा कि विशेष अभियान समूह की संयुक्त टीम सेना और सीआरपीएफ के साथ मिलकर काम कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अभियान जारी है।
शादाब अशोक
वार्ता.

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