जम्मू, 02 सितंबर (वार्ता) जम्मू-कश्मीर पुलिस और यातायात पुलिस ने पिछले दस दिनों में 'नंबर प्लेट मास्किंग' के खिलाफ़ अभियान चलाकर 150 से ज़्यादा गाड़ियां ज़ब्त की हैं।
गौरतलब है कि 'नंबर प्लेट मास्किंग' का मतलब है गाड़ी की नंबर प्लेट को छिपाना या बदलना ताकि कैमरे और जुर्माने से बचा जा सके। इसके लिए लोग प्लास्टिक या टेप से प्लेट को ढक देते हैं, हेलमेट या पैर से छिपाते हैं, नंबरों को काला कर देते हैं, जानबूझकर गंदगी या पेंट छिड़कते हैं या नंबर प्लेट पर पॉलीथीन या परांदा (बालों में लगाने वाली सजावटी चीज़) लगा देते हैं।
इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बतायाकि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों, खासकर नंबर प्लेट छिपाने वालों के खिलाफ़ एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। पिछले दस दिनों में, रजिस्ट्रेशन प्लेट छिपाने, बिना नंबर प्लेट के गाड़ी चलाने या मोटर वाहन अधिनियम के नियमों के मुताबिक नंबर प्लेट न लगाने पर 158 गाड़ियों पर जुर्माना लगाया गया और उन्हें ज़ब्त किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि 'नंबर प्लेट मास्किंग' के खिलाफ़ अभियान के अलावा, तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाने पर 165 गाड़ियां ज़ब्त की गयीं, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने पर 59 लोगों पर जुर्माना लगाया गया, जबकि सबसे ज़्यादा 3,057 गाड़ियों पर गलत पार्किंग के लिए जुर्माना लगाया गया या उन्हें ज़ब्त किया गया। शोर प्रदूषण के लिए 18 लोगों पर मामला दर्ज किया गया, छह पर बिना इजाज़त बदलाव करने और चार पर खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने के लिए कार्रवाई की गयी।
जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात ) अमित भसीन ने यूनीवार्ता को बताया, "'नंबर प्लेट मास्किंग' गैर-कानूनी है और एक नयी चुनौती के तौर पर सामने आ रही है।" उन्होंने कहा, "ज़्यादातर मामलों में हमने पाया है कि यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए ई-चालान से बचने और सिग्नल लाइट पर लगे सीसीटीवी कैमरों को चकमा देने के लिए ऐसा किया जाता है।" उन्होंने कहा, "'नंबर प्लेट मास्किंग' एमवीए के तहत सज़ा-योग्य अपराध है, जिसमें नियम तोड़ने वालों पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कुछ मामलों में ( जिनमें फ़र्ज़ी नंबर प्लेट या नंबर/अक्षर मिटाना शामिल है) गाड़ियों को ज़ब्त कर लिया जाता है और आपराधिक मामले दर्ज किये जाते हैं।"
उन्होंने कहा, "खास मामलों में, जैसे कि चुनावी ड्यूटी, रैलियों और सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही जैसी सरकारी ड्यूटी पर लगी गाड़ियों (निजी गाड़ियों सहित) के लिए, सुरक्षा के नज़रिए से 'नंबर प्लेट मास्किंग' की इजाज़त होती है।"
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "हर बार यह उल्लंघन यातायात निगरानी उपकरण की नज़र से बचने के लिए नहीं किया जाता, लेकिन नशीले पदार्थों के तस्करों, चोरों, झपटमारों, छेड़छाड़ करने वालों और दूसरे अपराधियों द्वारा नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।"
जम्मू क्षेत्र के कई थानों के प्रभारियों (एसएचओ) ने यूनीवार्ता से बातचीत में चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि 'नंबर प्लेट मास्किंग' करने वाले सभी लोगों का कोई न कोई मकसद होता है। उन्होंने कहा, "कुछ युवा यातायात पुलिस से बचने के लिए और कुछ आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन दोनों ही मामलों में यह एक ऐसा अपराध है जिस पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें उच्च अधिकारियों से ऐसे उल्लंघनों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने के विशेष निर्देश मिले हैं क्योंकि इसमें सुरक्षा का ख़तरा भी शामिल है। उनके संबंधित इलाक़ों में समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाये जा रहे हैं, और 'नंबर प्लेट मास्किंग' के साथ पायी गयी खड़ी दो-पहिया गाड़ियों पर जुर्माना भी लगाया गया और उन्हें ज़ब्त भी किया गया।
उन्होंने कहा, "अब, यातायात नियमों को बार-बार तोड़ने वाले लोग ई-चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ करते हुए भी पाये गये हैं, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गयी है।"
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "सड़कों पर धुंधली या छेड़छाड़ की गयी नंबर प्लेट वाली गाड़ी चलाना ऐसा है जैसे ऐसे पड़ोसियों के साथ रहना जिनकी कोई पहचान ही न हो। यह सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है।" उन्होंने कहा कि अपनी पहचान छिपाकर अपराधी, अपहरण करने वाले और देश-विरोधी और समाज-विरोधी तत्व गंभीर अपराधों को अंजाम दे सकते हैं, इसलिए जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में इस बात पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।
इस बीच पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नंबर प्लेट छिपानेके मामले सामने आ रहे हैं और उन पर उचित कार्रवाई भी की जा रही है। नियम तोड़ने वालों को सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ने के बजाय प्राथमिकी दर्ज करने के साथ ही गाड़ियां ज़ब्त की जा रही हैं। यह बहुत गंभीर मामला है। 'नंबर प्लेट छिपाने' से अपराधियों को आसानी से मौका मिल जाता है और इसे रोकना ज़रूरी है।" उन्होंने कहा, "ज़िला पुलिस प्रशासन ने यातायात पुलिस के साथ मिलकर एक ज़ोरदार अभियान शुरू किया है और लोगों को जागरूक करने का काम भी किया है, क्योंकि समय पर की गयी कार्रवाई से बड़ी त्रासदियों को रोका जा सकता है।"
संतोष अशोक
वार्ता