इंदौर, 13 जून (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में यहां आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन एक सर्वसम्मत और ऐतिहासिक 'इंदौर घोषणा-पत्र' के साथ हो गया।
इस बैठक में खाद्य सुरक्षा,किसान कल्याण,जलवायु-सहनीय खेती,कृषि व्यापार और डिजिटल एग्रीकल्चर को नई दिशा देने वाले कई बड़े फैसले लिए गए हैं। इस तीन दिवसीय बैठक में सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल 100 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
श्री चौहान ने इस अवसर पर संवाददाताओं से कहा कि दुनिया की लगभग आधी आबादी,42 प्रतिशत वैश्विक कृषि भूमि और 42 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स देशों की सामूहिक आवाज वैश्विक मंच पर एक प्रभावी शक्ति बनकर उभरी है, जो अनिश्चितताओं के बीच पूरी दुनिया के लिए आशा और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश है।
इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान चार प्रमुख प्राथमिकताओं के तहत खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार संवर्द्धन, पुनर्योजी खेती और कृषि क्षेत्र में नवाचार पर गहन विमर्श किया गया। बैठक की सोच के केंद्र में दुनिया को भोजन देने वाले अन्नदाता किसान की आजीविका को सुरक्षित करना था।
इस विमर्श को धरातल पर उतारने के लिए ब्रिक्स देशों ने चार अभूतपूर्व संस्थागत पहलों के तहत नए वैश्विक नेटवर्क स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। इसमें पहली बड़ी पहल 'एग्रो-इकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस' के नेटवर्क की स्थापना है, जो प्राकृतिक और जैविक खेती पर संयुक्त रिसर्च को बढ़ावा देगा और भारत की तरफ से 'भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम' इसमें मुख्य भूमिका निभाएगा।
दूसरी पहल 'डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क' की है, जो एआई और डेटा आधारित समाधानों पर काम करेगा और भारत में आईआईटी दिल्ली इसका समन्वय करेगा।
तीसरी पहल 'ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स राइट्स इन सीड सिस्टम्स' है, जो देशी बीजों के संरक्षण और किसानों के पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करेगी। चौथी पहल 'ब्रिक्स एग्रीएन' नेटवर्क की है, जो जेनेटिक रिसोर्सेज और कृषि इनपुट्स की सूचना साझा करने का मंच बनेगा।
इसके अतिरिक्त, पहले से संचालित 'ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म' को सुदृढ़ कर एक सशक्त 'नॉलेज टू एक्शन हब' के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान केवल लैब तक सीमित न रहकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे और असली 'लैब टू लैंड' मॉडल साकार हो सके। बैठक में कृषि व्यापार को आसान बनाने, सीमा शुल्क बाधाओं को कम करने और 'ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज' जैसी दूरगामी पहल पर भी वन-टू-वन द्विपक्षीय बातचीत हुई।
जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो के एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित खतरों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और कटाई से लेकर बाजार तक होने वाली खाद्यान्न बर्बादी को रोकने पर व्यावहारिक तकनीकी रणनीतियां तैयार की गईं।
साथ ही, कृषि में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एग्री-स्टार्टअप्स और एग्री-प्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने पर विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। तकनीक को छोटे किसानों के लिए सुलभ बनाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर्स और समूह आधारित मॉडल के जरिए ड्रोन व आधुनिक औजार किराए पर देने की व्यवस्था पर भी सहमति बनी है।
वैश्विक संकट और युद्ध की वजह से कच्चे माल की कीमतों में आई भारी तेजी और महंगी खाद के वैश्विक दबाव के बीच,श्री चौहान ने भारतीय किसानों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया कि देश के किसानों पर इसका कोई वित्तीय बोझ नहीं आने दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस बढ़ी हुई लागत का पूरा अतिरिक्त भार खुद वहन कर रही है, जिसके चलते देश के किसानों को यूरिया की बोरी 266 रूपये और डीएपी की बोरी 1350 रूपये की पुरानी रियायती दरों पर ही मिलती रहेगी।
शोभित अशोक
वार्ता