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उत्तर बंगाल में निर्दलीयों को साधने में जुटी भाजपा, चुनावी समीकरण पर कड़ी नजर

सिलीगुड़ी, 10 अप्रैल (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने उत्तर बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले निर्दलीय उम्मीदवारों को साधने के लिए अभियान तेज कर दिया है। पार्टी को आशंका है कि ये उम्मीदवार उसके मुख्य वोट बैंक में सेंध लगाकर चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
पार्टी की रणनीति साफ है-स्थानीय प्रभाव वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को मनाकर चुनाव मैदान से हटाना और वोटों को आधिकारिक भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में एकजुट करना। खासतौर पर हिंदू वोट बैंक के विभाजन को रोकना इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य है। हालांकि, इस प्रयास को मिले-जुले परिणाम मिले हैं।
उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा और मालदा के गाजोल विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को सफलता मिली है। चोपड़ा में राजबंशी नेता सोमनाथ सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन वापस लेकर भाजपा प्रत्याशी शंकर अधिकारी को समर्थन दे दिया। वहीं गाजोल में श्री प्रफुल्ल चंद्र सरकार ने भी अपना नामांकन वापस लेकर भाजपा का दामन थाम लिया।
इस दौरान भाजपा सांसद खगेन मुर्मू और जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह की मौजूदगी रही। श्री प्रफुल्ल सरकार ने कहा कि क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को हराने में केवल भाजपा ही सक्षम है। तृणमूल कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को ज्यादा महत्व नहीं दिया। पार्टी के जिला प्रवक्ता शुभमय बसु ने दावा किया कि श्री प्रफुल्ल सरकार पहले से ही भाजपा से जुड़े थे और यह कदम पहले से तय था।
दूसरी ओर, दार्जिलिंग जिले के कुर्सियांग में भाजपा के प्रयास सफल नहीं हो सके। यहां एक वायरल ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर एक भाजपा नेता द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार को "अच्छा पद" देने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उम्मीदवार ने ठुकरा दिया। उम्मीदवार ने साफ कहा कि वह भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों के खिलाफ हैं।
कुर्सियांग में 'श्रमजीवी पहल' के बैनर तले श्री सुमेंद्र तामांग को मैदान में उतारा गया है, जो चाय बागान श्रमिकों, युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठा रहे हैं। यह मंच रोजगार, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और शासन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुर्सियांग, दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जैसे क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी वोटों के बंटवारे को प्रभावित कर सकती है, जिससे चुनाव परिणाम पर सीधा असर पड़ सकता है।
चुनावी मुकाबला जैसे-जैसे तेज हो रहा है, भाजपा के लिए निर्दलीयों को साधना और आंतरिक असंतोष को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
प्रदीप जितेन्द्र
वार्ता
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