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सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री चुनने पर एनएसएस ने कांग्रेस पर बोला हमला

कोट्टायम, 14 मई (वार्ता) नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस ) के महासचिव जी. सुकुमारन नायर ने कांग्रेस आलाकमान के श्री वी.डी. सतीशन को केरल का अगला मुख्यमंत्री बनाने के फैसले की आलोचना की है।
श्री नायर ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में स्थापित परंपराओं, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और पारदर्शी मानदंडों का अभाव है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री का चयन किया गया, वह स्वीकृत राजनीतिक प्रथाओं से स्पष्ट रूप से हटकर था। उन्होंने तर्क दिया कि मानदंडों और मिसालों द्वारा निर्देशित प्रणाली में वरिष्ठ नेतृत्व के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए था।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पैमाने के अनुसार श्री रमेश चेन्निथला स्थापित मानदंडों के आधार पर सबसे आगे थे। उन्होंने अपने आरोपों को और तेज करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया से यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के भीतर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के बढ़ते प्रभाव का संकेत मिलता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसा प्रभाव प्रमुख राजनीतिक निर्णयों को इस तरह से आकार दे रहा है, जो आंतरिक लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को विकृत करता है। इस घटनाक्रम को ‘लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए एक गंभीर झटका’ बताते हुए, उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ है, उसे एक नियमित नेतृत्व निर्णय के बजाय ‘लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन’ कहा जा सकता है।
श्री नायर ने उस आधार पर भी सवाल उठाया, जिसके आधार पर नेतृत्व ने यह निष्कर्ष निकाला कि श्री सतीशन को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। उन्होंने पूछा कि ऐसे समर्थन को किसने मापा और बहुमत की पसंद के ऐसे दावों को कैसे स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी अहमियत वाले नेतृत्व के निर्णय, धारणा या दबाव के बजाय मापने योग्य जनमत और पारदर्शी आंतरिक सहमति पर आधारित होने चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि यह फ़ैसला गठबंधन के घटकों के राजनीतिक दबाव को दिखाता है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा दबाव उचित नहीं है। उन्होंने कहा, "अगर नियमों और मानदंडों का पालन किया गया होता, तो नतीजा कुछ और होता।"
उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया ने उस चीज़ को नज़रअंदाज़ कर दिया, जिसे उन्होंने नेतृत्व के योग्यता-आधारित मूल्यांकन के रूप में बताया। एनएसएस के महासचिव ने चेतावनी दी कि मौजूदा राजनीतिक दिशा शासन में सामाजिक न्याय की संभावनाओं को कमज़ोर कर सकती है और राज्य के राजनीतिक माहौल में बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए दरवाज़ा खोल सकती है।
उन्होंने कहा कि संगठन को सार्वजनिक रूप से जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वह इसे राजनीतिक संतुलन और निष्पक्षता से एक गंभीर भटकाव के रूप में देखता है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) से की और कहा कि उनके विचार में एलडीएफ नेतृत्व के फ़ैसलों में स्पष्ट आंतरिक परंपराओं का पालन करता है और अपनी स्थापित राजनीतिक कार्यप्रणाली से नहीं भटकता है। उन्होंने आगे कहा कि इसके विपरीत, कांग्रेस के नेतृत्व वाला मोर्चा इस मामले में ऐसी व्यवस्थित प्रथाओं से दूर हटता हुआ प्रतीत होता है।
श्री नायर ने कहा कि मानदंडों, वरिष्ठता और राजनीतिक कद के आधार पर श्री चेन्निथला मुख्यमंत्री पद के लिए विचार-विमर्श में सबसे आगे थे। उन्होंने कहा कि अंतिम फ़ैसले में उस वरीयता क्रम को नहीं दर्शाया गया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग जैसे गठबंधन सहयोगी अपनी आकांक्षाएं व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन, उनके अनुसार उनके पास नेतृत्व चयन में स्थापित परंपराओं को दरकिनार करने का जनादेश नहीं है। उन्होंने कहा कि गठबंधन बनाने वाली और चुनाव जीतने वाली पार्टियाँ किसी एक समुदाय के विशेष जनादेश का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं और उन्होंने सांप्रदायिक या वर्गीय आधार पर चुनावी समर्थन की व्याख्या पर सवाल उठाया। उनकी ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब नेतृत्व की घोषणा के बाद केरल के भीतर राजनीतिक चर्चाएं गरमाई हुई हैं। यह विवाद इंडियन नेशनल कांग्रेस द्वारा औपचारिक घोषणा के बाद शुरू हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर कई दिनों के आंतरिक विचार-विमर्श के बाद श्री सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री-पदनामित घोषित किया गया। इस फ़ैसले की घोषणा नयी दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ( जिनमें दीपा दास मुंशी, अजय माकन, मुकुल वासनिक और जयराम रमेश शामिल थे) द्वारा उच्च-स्तरीय परामर्श के बाद की गयी। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि नेतृत्व की भूमिका को अंतिम रूप राष्ट्रीय राजधानी में हुई गहन चर्चाओं की एक श्रृंखला के बाद दिया गया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के आवास पर हुई बैठकें भी शामिल थीं। विचार-विमर्श के अंतिम दौर के हिस्से के तौर पर प्रियंका गांधी और पार्टी महासचिव के. सी. वेणुगोपाल के साथ भी परामर्श किया गया।
घोषणा सार्वजनिक होने से पहले चर्चाओं के अहम आखिरी चरण के दौरान श्री गांधी ने श्री चेन्निथला और श्री सतीशन, दोनों से ही फ़ोन पर व्यक्तिगत रूप से बात की थी। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के चुनावी नतीजों के बाद लंबे समय तक चली राजनीतिक अनिश्चितता के बाद हुई इस घोषणा ने अब पूरे केरल में एक व्यापक राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
संतोष.श्रवण
वार्ता
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