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ओडिशा में बड़ी हड़ताल: डीजल की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ मछुआरों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार, आज रात खत्म हो रहा था प्रतिबंध

भुवनेश्वर, 13 जून (वार्ता) ओडिशा तट पर समुद्री मछली पकड़ने पर लगा वार्षिक प्रतिबंध कल यानी 14 जून को समाप्त होने जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के मछुआरों ने समुद्र में न उतरने का एक बड़ा फैसला लिया है।
'ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन'के बैनर तले समुद्री मछुआरों ने बढ़ते वित्तीय संकट और अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। सदस्यों ने प्रस्ताव पास किया है कि जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाले विभिन्न गंभीर मुद्दों का समाधान नहीं करतीं, तब तक कोई भी मछुआरा समुद्री मछली पकड़ने की गतिविधियां फिर से शुरू नहीं करेगा।
एसोसिएशन के अनुसार, डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी इस समय मछुआरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। जहां आम जनता को पेट्रोल पंपों पर डीजल करीब 99 से 101 रुपये प्रति लीटर की खुदरा दर पर मिल रहा है, वहीं मछुआरों को यही ईंधन थोक औद्योगिक दर पर 140 से 142 रुपये प्रति लीटर की महंगी कीमत पर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
मछुआरों का कहना है कि लगभग 40 रुपये प्रति लीटर का यह भारी अंतर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के काम को पूरी तरह घाटे का सौदा बना रहा है। चूंकि मशीनीकृत (मैकेनाइज्ड) मछली पकड़ने वाली नौकाएं एक ही यात्रा के दौरान हजारों लीटर डीजल की खपत करती हैं, इसलिए नाव मालिकों को लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। इसी आर्थिक मार के कारण कई नावें महीनों से बंदरगाह पर ही खड़ी रहने को मजबूर हैं।
एसोसिएशन ने सरकारों के सामने पड़ोसी राज्यों का उदाहरण रखते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे तटीय राज्यों में मछुआरों को डीजल पर भारी सब्सिडी और अन्य ईंधन संबंधी सहायता प्रदान की जाती है, जबकि ओडिशा के मछुआरे अभी तक ऐसे किसी भी लाभ से वंचित हैं।
समुद्री मत्स्य उद्योग की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि देश के सबसे बड़े समुद्री मछली पकड़ने वाले केंद्रों में से एक,पारादीप बंदरगाह में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक हो गई है। यह बंदरगाह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 मछुआरों और संबद्ध श्रमिकों की आजीविका का सहारा है। यहाँ 600 से अधिक यंत्रीकृत नावें और 150 से अधिक मोटर चालित नावें संचालित होती हैं, जो भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में एक बहुत बड़ा योगदान देती हैं। इस अनिश्चितकालीन बहिष्कार के चलते न केवल स्थानीय व्यापार बल्कि देश के सीफूड एक्सपोर्ट पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है।
शोभित, मधुकांत
वार्ता
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सुमिताभ.अभय
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