Friday, Sep 4 2026 | Time 23:17 Hrs(IST)
राज्य » अन्य राज्य


कावेरी का पानी छोड़ने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटायेगा कर्नाटक

बेंगलुरु, 11 अगस्त (वार्ता) कर्नाटक सरकार ने तमिलनाडु को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक कावेरी नदी का पानी छोड़ने के निर्देश के खिलाफ मंगलवार को उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला किया । इस कदम से नदी जल बंटवारे के इस विवादित मुद्दे पर एक नयी कानूनी लड़ाई का रास्ता साफ हो गया है।
गौरतलब है कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का नया निर्देश दिया है। यह माप कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलिगुंडलु मापन केंद्र पर किया जाएगा।
कर्नाटक सरकार का यह फैसला जलाशयों के जलस्तर और राज्य की अपनी पीने के पानी एवं सिंचाई की जरूरतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। इस कानूनी चुनौती का मकसद पानी छोड़ने के निर्देश से राहत पाना और कावेरी जल में कर्नाटक के अपने हिस्से के दावे को मजबूती से रखना है। 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के इस निर्देश का कर्नाटक में कड़ा राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। विपक्षी और स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब राज्य खुद पानी की भारी कमी झेल रहा है, तब इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ना कहां तक जायज है। सरकार से उम्मीद है कि वह शीर्ष अदालत के सामने पानी की तय मात्रा को चुनौती देते हुए राज्य के जलाशयों में मौजूद जलस्तर, पानी की आवक, पीने के पानी की आपूर्ति और किसानों की जरूरतों से जुड़ा ब्योरा रखेगी।
ऐतिहासिक रूप से कावेरी विवाद कर्नाटक के सबसे संवेदनशील और ज्वलंत राजनीतिक मुद्दों में से एक रहा है, जो अक्सर दोनों पड़ोसी राज्यों को आमने-सामने खड़ा कर देता है। ऐसे में पानी छोड़ने से जुड़ा कोई भी निर्देश खासकर कर्नाटक के कावेरी बेसिन वाले जिलों में विरोध-प्रदर्शन भड़का सकता है।
उच्चतम न्यायालय में इस मामले को ले जाने के इस ताजा कदम से साफ संकेत मिलता है कि कर्नाटक सरकार बिना कानूनी लड़ाई के 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के पक्ष में नहीं है। इससे कर्नाटक की जल सुरक्षा को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कावेरी का मुद्दा एक बार फिर बड़े टकराव का रूप ले सकता है।
राज्य सरकार का यह रुख इसलिए भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उस पर कावेरी जल बंटवारा व्यवस्था के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ अपने लोगों और किसानों की जरूरतों को पूरा करने का दोहरा दबाव है।
आलम जितेन्द्र
वार्ता
More News

बंगाल बाढ़: मानिकचक में गंगा नदी अत्यधिक खतरे के स्तर के करीब, तटबंध टूटा

04 Sep 2026 | 9:55 PM

सिलीगुड़ी, 04 सितंबर (वार्ता) पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले में स्थित भूतनी द्वीप में शुक्रवार को बाढ़ की स्थिति और खराब हो गयी तथा लगातार बढ़ रहा गंगा नदी का जल कई जगहों पर तटबंध को तोड़कर फैल गया, जिससे बड़े इलाके जलमग्न हो गये और हज़ारों निवासियों पर खतरा मंडराने लगा।.

see more..

गोपेश्वर के पोखरी में भालू का आतंक, जंगल में घास लेने गईं दो महिलाओं की मौत

04 Sep 2026 | 9:48 PM

गोपेश्वर, 04 सितंबर (वार्ता) उत्तराखंड के गोपेश्वर के पोखरी विकासखंड के सिदेली गांव में शुक्रवार को भालू के हमले ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। जंगल में घास लेने गईं दो महिलाओं पर अचानक भालू ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों महिलाओं की उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।.

see more..

हरिद्वार में भारी बारिश का अलर्ट, शनिवार को बंद रहेंगे सभी स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्र

04 Sep 2026 | 8:38 PM

हरिद्वार, 04 सितंबर, (वार्ता) उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के लिए मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश और आकाशीय बिजली की चेतावनी जारी किए जाने के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने छात्र-छात्राओं एवं बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। .

see more..

मिजोरम में विशेष गहन पुनरीक्षण की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सात सितंबर को

04 Sep 2026 | 8:30 PM

आइजोल, 04 सितंबर (वार्ता) मिजोरम के जिला चुनाव अधिकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के तहत अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तैयारियां पूरी कर ली हैं और इस सूची के प्रकाशन के लिए सात सितंबर की तिथि तय की गयी है।.

see more..

कोंडा सुरेखा की बर्खास्तगी दुर्भाग्यपूर्ण: महेश गौड़

04 Sep 2026 | 8:25 PM

नयी दिल्ली/हैदराबाद, 04 सितंबर (वार्ता) तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने शुक्रवार को मंत्री कोंडा सुरेखा की बर्खास्तगी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। .

see more..