देहरादून 18 अगस्त (वार्ता) उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश, अतिवृष्टि और भूस्खलन की घटनाओं के बावजूद लोग अनावश्यक रूप से नदी और नालों को पार करने में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। ऐसे ही दो अलग अलग मामलों में देवदूत कहे जाने वाली राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों ने एक निजी विश्वविद्यालय के छह छात्रों और एक वाहन में बैठे दो अन्य व्यक्तियों को नदी के तेज बहाव में बहते हुए कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बचाया है।
एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पण यदुवंशी ने मंगलवार को बताया कि सोमवार को देहरादून के यूपीईएस विश्वविद्यालय के छह छात्र ट्रैकिंग के लिए स्वारना नदी, मिसरास पट्टी, थान गांव, देहरादून क्षेत्र में गए थे। वापस आते समय अचानक हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे छात्र जंगल में ही फंस गए। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही एसडीआरएफ डाकपत्थर की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
उन्होंने बताया कि दुर्गम क्षेत्र और बढ़े हुए जलस्तर के कारण टीम ने लगभग छह किलोमीटर पैदल ट्रैकिंग कर सभी छह छात्रों को सकुशल रेस्क्यू किया और उन्हें जिला पुलिस के सुपुर्द किया। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किए गए सभी छात्र एक ही कॉलेज के हैं और उनकी स्थिति सामान्य है।
कमांडेंट यदुवंशी ने बताया कि दूसरी घटना देहरादून के ही ऋषिकेश स्थित पशुलोक बैराज पुलिस चौकी से कल रात नौ बजकर 20 मिनट पर बीन नदी में एक मैक्स वाहन पलटने और कुछ व्यक्ति फंसे होने की सूचना मिली। उन्होंने बताया कि सूचना पर पोस्ट ढालवाला से अपर उप निरीक्षक महावीर चौहान के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई। जिसने वहां पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद एक व्यक्ति को वाहन से सकुशल बाहर निकाल लिया। इस दौरान दूसरा व्यक्ति वाहन के अंदर फंसा हुआ था। उन्होंने बताया कि बीन नदी का जलस्तर अत्यधिक बढ़ा होने के कारण वाहन बहाव में कुछ दूरी तक नीचे चला गया, जिससे रेस्क्यू कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया। उन्होंने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निरीक्षक कविंद्र सजवान के नेतृत्व में द्वितीय टीम भी तत्काल घटनास्थल पहुंची। दोनों टीमों ने समन्वय के साथ अभियान चलाते हुए वाहन में फंसे दूसरे व्यक्ति को भी सकुशल बाहर निकाल लिया गया। दोनों व्यक्तियों को उपचार को अस्पताल भेज दिया गया है।
श्री यदुवंशी ने सभी पर्यटकों और छात्रों से अपील की है कि बारिश के मौसम में नदी-नालों के पास न जाएं और मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही ट्रैकिंग पर निकलें।
सुमिताभ उप्रेती
वार्ता