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लवप्रीत सिंह मौत मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज हो, हाईकोर्ट स्वतः संज्ञान ले: सुखपाल खैरा

नकोदर, 07 जून ( वार्ता) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने मेहतपुर के गांव बंगीवाल निवासी दलित युवक लवप्रीत सिंह उर्फ लाभा की कथित पुलिस फायरिंग में हुई मौत की कड़ी निंदा करते हुए मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेकर स्वतंत्र न्यायिक जांच सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।
श्री खैरा ने रविवार को कहा कि जहां पुलिस इस घटना को आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं मृतक के परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि लवप्रीत की पहले बेरहमी से पिटाई की गई और बाद में उसे गोली मार दी गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं दी गई।कांग्रेस विधायक ने कहा कि इन परस्पर विरोधी दावों को देखते हुए मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायिक जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी नागरिक की पुलिस फायरिंग में मौत होने पर केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में वांछित भी हो, तब भी पुलिस को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि न्यायेतर हत्याएं और अत्यधिक बल प्रयोग संवैधानिक व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से सामने आए वीडियो और ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि मामले की जांच न्यायपालिका की निगरानी में करवाई जानी चाहिए। विभिन्न सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने भी गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
श्री खैरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब धीरे-धीरे "पुलिस राज्य" में बदलता जा रहा है, जहां पुलिस की कथित ज्यादतियों को नजरअंदाज किया जाता है और दोषी अधिकारियों को संरक्षण मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जवाबदेही तय न किए जाने से कुछ पुलिस कर्मियों का मनोबल इस हद तक बढ़ गया है कि वे मानवाधिकारों और संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी कर रहे हैं।
ठाकुर जितेन्द्र
वार्ता
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