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लोकरूचि.श्राद्ध तिल दो अंतिम गोरखपुर

प्रयाग ज्योतिषपीठ एवम रत्न शोध परिषद के निदेशक पंडित रमेश चंद्र शुक्ल ने शास्त्रों का हवाला देते हुए मंगलवार को यूनीवार्ता से बातचीत में बताया कि पितृपक्ष में किये जाने वाले तर्पण में तिल व कुशा का विशेष महत्व है। वायु पुराण के अनुसार तिल और कुशा के साथ श्रद्धा से जो कुछ पितरों को अर्पित किया जाता है वह अमृत रूप मे उन्हे प्राप्त होता है। पितर किसी भी योनि में हों उन्हें वह सब उसी रूप में प्राप्त होता है।
परिषद के निदेशक श्री शुक्ल ने बताया कि अर्यमा देव को पितरों का देव कहा जाता है और पितृ पक्ष में उनकी पूजा की जाती है। ऐसे में उनकी पूजा के दौरान अर्यमा देव को काला तिल अर्पित किया जाता है । ऐसा करने से अर्यमा देव के साथ.साथ पितृ भी प्रसन्न होने के साथ ही परिजनों को सुख.समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने लोक को चले जाते है !
उन्होने बताया कि पितृपक्ष के दौरान पितरों की सद्गति के लिए पिण्डदान और तर्पण के लिए काले तिल और कुश पितृपक्ष में श्राद्ध के हर कर्म में काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। अगर कोई व्यक्ति और कुछ दान न कर पाये तो कम से कम काले तिल जरूर दान करना चाहिए। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की मुश्किलें कम होने लगती हैं। माना जाता है कि काले तिल का दान करने से पूर्वज हमारी रक्षा करते हैं। श्री शुक्ल ने बताया कि माता के लिए नवमी और पिता के लिए अमावस्या को पिंडदान और तर्पण करना चाहिए ।
श्री शुक्ल ने बताया शास्त्रों में तीन प्रकार के ऋण बताए गये हैं। देव ऋण, ऋशि ऋण और पितृ ऋण हैं। शास्त्रों के अनुसार हमारे पूर्वज पितृपक्ष में धरती पर निवास करते हैंं। पितृ ऋण उतारने के लिए ही पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है। पित्रपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के निधन की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। जो परिजन अपने पूर्वजों का पिण्डदान नहीं करते उन्हे पितृ ऋण और पिततृदोष के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है।
पिंडदान के पूर्व मुंडन करने के विधान को महत्वपूर्ण बताया गया है। धर्म शास्त्रों में कहा गया है ..कोई भी धार्मिक कृत्य करने से पहले मुंडन कराया जाता है।
परिषद के निदेशक ने बताया कि वैसे तो तिल चाहे सफेद हों या काले दोनों ही स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं मगर धार्मिक कार्यों मे काले तिल का ही उपयोग किया जाता है। काले तिल को आप खा भी सकते हैं। काले तिल बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। काले तिल में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स और भरपूर एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। काले तिल खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है। हार्ट के लिए भी काला तिल लाभदायक होता है। प्राकृतिक रूप से उपलब्ध और शास्त्रोक्त हवन.तर्पण सामग्रियां पुरखों और वंशजों को पुण्य लाभ देती ही हैं, बदलते मौसम में हमारे स्वास्थ्य का ध्यान भी रखती हैं।
उदय प्रदीप
वार्ता
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