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राजग में सहज और उत्साहित है रालोद,कम-ज्यादा सीटों से संबंधों पर नहीं आएगी आंच

सहारनपुर, 11 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ पूरी तरह सहज और उत्साहित दिखाई दे रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखने वाला रालोद बूथ स्तर तक अपने संगठन को मजबूत करने में जुटा हुआ है और गठबंधन धर्म निभाने की बात कर रहा है।
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं रालोद के प्रमुख दलित चेहरों में शामिल अनिल कुमार का कहना है कि पार्टी पूरे प्रदेश में भाजपा उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा और ताकत के साथ काम करेगी। उनका दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों और गांवों के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य हुए हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकार एवं पूर्व सांसद के.सी. त्यागी का मानना है कि सीटों का बंटवारा जमीनी वास्तविकताओं और सर्वेक्षणों के आधार पर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी यह तय नहीं है कि रालोद कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर गठबंधन में किसी प्रकार का तनाव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रालोद के समाजवादी पार्टी के साथ दोबारा जाने की संभावना नहीं है।
भाजपा प्रवक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार अवनीश त्यागी का कहना है कि प्रदेश में राजग सुचारु रूप से कार्य कर रहा है। उनके अनुसार, जिस प्रकार देश की जनता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार करती है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश की जनता योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है।
अनिल कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न प्रदान करना किसानों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने इसे चौधरी चरण सिंह की नीतियों और विचारों को स्वीकार करने का संदेश बताया। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को किसानों का सच्चा हितैषी बताते हुए कहा कि राज्य सरकार गांवों और किसानों की खुशहाली के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उसे आठ सीटों पर सफलता मिली थी। हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गठबंधन का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा था। बाद में खतौली विधानसभा उपचुनाव में भी रालोद ने जीत दर्ज की थी।
वर्तमान में रालोद के पास कई विधायक हैं, जिनमें मेरठ की शिवालखास सीट से गुलाम मोहम्मद, बागपत की छपरौली सीट से डॉ. अजय कुमार, शामली से प्रसन्न कुमार, थानाभवन से अशरफ अली, मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट से कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से मिथलेश पाल, बुढ़ाना से राजपाल बालियान तथा हाथरस की सादाबाद सीट से प्रदीप कुमार सिंह शामिल हैं। पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी राज्यसभा सदस्य हैं, जबकि चंदन चौहान और डॉ. राजकुमार सांगवान लोकसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मथुरा से योगेश नौवाल पार्टी के एमएलसी हैं।
अनिल कुमार का दावा है कि रालोद की तैयारियां ऐसी हैं कि पार्टी अपने मौजूदा सभी विधायकों की सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उनका मानना है कि गठबंधन में सब कुछ सकारात्मक माहौल में चल रहा है और वर्तमान विधायकों को पुनः टिकट मिलने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा उन्हीं सीटों को रालोद के लिए छोड़ेगी, जहां पार्टी की जीत की संभावना अधिक होगी। चर्चाओं के अनुसार रालोद करीब 25 सीटों की दावेदारी कर सकता है, जबकि भाजपा 15 से 16 सीटें देने पर विचार कर सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय दोनों दलों के बीच बातचीत और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर होगा।
के.सी. त्यागी का कहना है कि जमीनी सच्चाई का आकलन सर्वेक्षणों से ही संभव है और उसी आधार पर सीटों का निर्धारण होना चाहिए। वहीं विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा एक बार फिर थानाभवन सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में उन्हें लगभग 96 हजार वोट मिले थे, लेकिन जाट-मुस्लिम समीकरण के चलते उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
पूर्व कुलपति, पूर्व आईपीएस अधिकारी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकार डॉ. अशोक कुमार राघव का मानना है कि चौधरी चरण सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक मिजाज को सबसे बेहतर ढंग से समझने वाले नेता थे। उनके अनुसार, बाद के कई बड़े नेताओं के पास वह गहरी समझ नहीं थी जो चौधरी चरण सिंह के पास थी।
रालोद के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पार्टी तेजी से अपना जनाधार बढ़ा रही है और उसकी लोकप्रियता अब केवल जाट बहुल क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गई है। पार्टी चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजीत सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपनी अलग पहचान मजबूत करने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही वह अपने पुराने जाट-मुस्लिम सामाजिक समीकरण को नए सिरे से संगठित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
उधर भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष पद से भूपेंद्र चौधरी को हटाकर मंत्रिपरिषद में स्थान दिया है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के समर्थन को बनाए रखने की जिम्मेदारी काफी हद तक केंद्रीय मंत्री एवं रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी पर आ सकती है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में रालोद और भाजपा के बीच सीटों का बंटवारा भले ही चर्चा का विषय बना रहे, लेकिन दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे यह स्पष्ट होता है कि गठबंधन की मजबूती को प्राथमिकता दी जाएगी और सीटों की संख्या संबंधों में खटास का कारण नहीं बनेगी।
सं प्रदीप
वार्ता
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सं प्रदीप
वार्ता.

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