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सीवेज के शोधित जल से चल रही पनकी थर्मल पावर प्लांट की कूलिंग व्यवस्था, जल संरक्षण का बना मॉडल

कानपुर , 18 जुलाई (वार्ता) उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण और अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की दिशा में कानपुर की एक महत्वपूर्ण परियोजना प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। बिनगवां स्थित 40 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) से तैयार उच्च गुणवत्ता के शोधित जल का उपयोग अब पनकी थर्मल पावर प्लांट के कूलिंग टावरों में किया जा रहा है। इससे सिंचाई योग्य ताजे पानी की बचत होने के साथ जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिला है।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार कोबिनगवां स्थित टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि करीब 249.92 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस परियोजना के माध्यम से प्रतिदिन 40 एमएलडी उच्च गुणवत्ता का शोधित जल पनकी थर्मल पावर प्लांट को उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बिनगवां स्थित 210 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में सेकेंडरी ट्रीटमेंट के बाद शोधित सीवेज को टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है। यहां अत्याधुनिक रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) और अल्ट्रा फिल्ट्रेशन (यूएफ) मेम्ब्रेन आधारित तकनीक से जल का उन्नत स्तर पर शोधन किया जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता लगभग पेयजल स्तर तक पहुंच जाती है।
इसके बाद प्रतिदिन तैयार होने वाला 40 एमएलडी शोधित जल 18 किलोमीटर लंबी और 600 मिमी व्यास की पाइपलाइन के माध्यम से पनकी थर्मल पावर प्लांट पहुंचाया जाता है, जहां इसका उपयोग कूलिंग टावरों और बॉयलरों में किया जाता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि थर्मल पावर प्लांट में उच्च गुणवत्ता के जल का उपयोग आवश्यक होता है। सामान्य पानी के प्रयोग से उपकरणों में स्केलिंग (परत जमना) और जंग लगने की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे संयंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च आता है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पहले शोधित सीवेज का बड़ा हिस्सा अनुपयोगी होकर नदियों में चला जाता था, जबकि अब उसी जल का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जा रहा है। इससे पावर प्लांट के लिए सिंचाई योग्य ताजे पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती और वह पानी किसानों की सिंचाई के लिए उपलब्ध रहता है। साथ ही नदियों में जाने वाले अपशिष्ट जल की मात्रा भी कम हुई है, जिससे जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को बढ़ावा मिला है।
जिलाधिकारी ने बताया कि टैरिफ पॉलिसी-2016 के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर स्टेशनों में शोधित सीवेज के उपयोग का प्रावधान किया गया है। इसी नीति के अंतर्गत बिनगवां में यह टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। परियोजना का निर्माण एनटीपीसी द्वारा कराया गया है, जबकि इसका संचालन एवं अनुरक्षण उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) कर रहा है।
उन्होंने बताया कि आरओ एवं यूएफ मेम्ब्रेन आधारित तकनीक पर स्थापित यह उत्तर प्रदेश का पहला टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट है। यह परियोजना अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग, औद्योगिक जल प्रबंधन और जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इस प्रकार की परियोजनाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे जल संसाधनों के सतत एवं वैज्ञानिक उपयोग को नई दिशा मिलेगी।
प्रदीप
वार्ता
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