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अमेरिकी अदालतों ने जेल में बंद भारतीय मूल के व्यक्ति की निर्वासन प्रक्रिया पर रोक लगाई

नयी दिल्ली, 05 नवंबर (वार्ता) अमेरिका की दो अलग-अलग अदालतों ने एक भारतीय मूल के व्यक्ति के निर्वासन पर रोक लगा दी है, जिसने एक ऐसी हत्या के लिए 40 साल से ज़्यादा जेल में बिताए जो उसने की ही नहीं थी।
64 वर्षीय सुब्रमण्यम "सुबू" वेदम को 1983 में अपने पूर्व रूममेट की हत्या का दोषी ठहराया गया था। लेकिन मामले में नए सबूत सामने आने के बाद उन्हें अक्टूबर में बरी कर दिया गया था। जेल से रिहा होने के तुरंत बाद उन्हें अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) ने हिरासत में ले लिया, जो उन्हें भारत प्रत्यर्पित करना चाहते हैं।
श्री वेदम के परिवार का कहना है कि उनका जन्म भारत में हुआ था लेकिन वे नौ महीने की उम्र में अमेरिका आ गए थे। वे अमेरिका के कानूनी स्थायी निवासी हैं और उनकी नागरिकता का आवेदन उनकी गिरफ्तारी से पहले ही स्वीकार कर लिया गया था। उन्हें वर्तमान में लुइसियाना के अलेक्जेंड्रिया में एक अल्पकालिक हिरासत केंद्र में रखा गया है, जहां निर्वासन के लिए एक अलग व्यवस्था की गयी है।
पिछले गुरुवार को एक आव्रजन न्यायाधीश ने उनके निर्वासन पर तब तक के लिए रोक लगा दी जब तक कि आव्रजन अपील बोर्ड यह निर्णय नहीं ले लेता कि एक अलग ड्रग मामले में उनकी दोषसिद्धि की समीक्षा की जाए या नहीं। उसी दिन उनके वकीलों की अपील पर पेंसिल्वेनिया स्थित एक अमेरिकी जिला न्यायालय ने उनके निर्वासन पर रोक लगा दी।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, श्री वेदम को ड्रग के आरोपों में हिरासत में लिया गया था, जब पुलिस उनके पूर्व रूममेट की मौत की जांच कर रही थी। अंततः उन पर हत्या का आरोप लगाया गया और बाद में उन्हें इस अपराध के लिए दोषी ठहराया गया।
ड्रग मामले को सुलझाने के लिए, श्री वेदम ने एलएसडी बेचने के चार मामलों और चोरी के एक मामले में कोई प्रतिवाद नहीं किया। 1984 में एक याचिका समझौते के तहत, उन्हें ड्रग मामले में ढाई से पांच साल की अलग-अलग सजा सुनाई गई थी। यह सजा उनकी आजीवन कारावास की सजा के साथ-साथ पूरी होनी थी।
जब पिछले महीने आईसीई ने श्री वेदम को गिरफ्तार किया, तो उन्होंने उन्हें हिरासत में लेने का कारण 1988 के निर्वासन आदेश और ड्रग मामले में उनकी दोषसिद्धि बताया। उन्होंने कहा कि हालाँकि उन्हें हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया था, लेकिन ड्रग के मामले में उनकी दोषसिद्धि अभी भी बरकरार है। इमिग्रेशन एजेंसी ने कहा कि उसने क़ानूनी तौर पर जारी आदेश के तहत कार्रवाई की।
वेदम के परिवार ने कहा है कि इमिग्रेशन कोर्ट द्वारा उनके मामले की जांच करते समय उनके दशकों के अच्छे व्यवहार, तीन डिग्रियां हासिल करने और जेल में रहते हुए उनकी सामुदायिक सेवा पर विचार किया जाना चाहिए।
प्रदीप, मधुकांत
वार्ता
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