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बातचीत का मकसद राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, आत्मसमर्पण नहीं: पेजेश्कियन

तेहरान, 10 मई (वार्ता) ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने का मूल मकसद देश के अधिकारों को सुरक्षित करना और राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा करना है। इसका अर्थ किसी के आगे आत्मसमर्पण करते हुए पीछे हटना नहीं है।
उल्लेखनीय है कि ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार श्री पेजेश्कियन ने कहा कि ईरानी राष्ट्र 'दुश्मन के सामने कभी नहीं झुकेगा।'
उन्होंने एक कार्यबल की बैठक में कहा, "अगर बातचीत या मोल-भाव की कोई बात होती है, तो इसका मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है बल्कि इसका लक्ष्य ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को सुरक्षित करना और राष्ट्रीय हितों की जोरदार ढंग से रक्षा करना है।" गौरतलब है कि यह कार्यबल उस नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के प्रयासों पर केंद्रित है, जो उनके अनुसार 'तीसरे थोपे गए युद्ध' के कारण हुआ था।
श्री पेजेश्कियन ने अमेरिका से जुड़े हालिया घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 8 अप्रैल को ईरान के साथ संघर्ष-विराम की घोषणा की थी। यह घोषणा 40 दिनों तक चले उस घटनाक्रम के बाद हुई थी, जिसे उन्होंने देश के खिलाफ 'बिना किसी उकसावे के की गई आक्रामकता' बताया था।
उन्होंने कहा कि संघर्ष-विराम के बावजूद वाशिंगटन ने बाद में ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर प्रतिबंध जारी रखने का आदेश दिया, जिसे तेहरान समझौते का उल्लंघन मानता है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच परोक्ष बातचीत जारी है।
ईरानी राष्ट्रपति ने सामाजिक एकता और राष्ट्रीय परिस्थितियों के प्रति जनता की समझ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को देश की मौजूदा सीमाओं और चुनौतियों का यथार्थवादी आकलन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह स्वाभाविक है कि इस रास्ते में कठिनाइयां और मुश्किलें आएंगी लेकिन लोगों के समर्थन और राष्ट्रीय एकता पर भरोसे के साथ समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।"
श्री पेजेश्कियन ने हालिया संघर्षों के प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि कठिनाइयों को सहना और अडिग रहना कभी-कभी 'शहादत से भी अधिक मुश्किल' हो सकता है। राष्ट्रपति ने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में डटे रहना, मजबूती से खड़े रहना और कठिनाइयों व समस्याओं को सहना कभी-कभी शहादत से भी अधिक मुश्किल होता है और जो लोग धैर्य, प्रतिरोध और सहनशीलता के साथ मैदान में डटे रहते हैं, वे वास्तव में 'बड़ा जिहाद' कर रहे होते हैं।"
पंकज जितेन्द्र
वार्ता
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