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ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम और एमओयू को बताया अप्रभावी, आगे की वार्ता को कहा 'समय की बर्बादी'

ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम और एमओयू को बताया अप्रभावी, आगे की वार्ता को कहा 'समय की बर्बादी'

अंकारा, 08 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम और समझौता ज्ञापन (एमओयू) अब प्रभावी नहीं रहा है। उन्होंने हालिया सैन्य तनाव के बाद ईरान के साथ आगे किसी भी बातचीत में रुचि न होने की बात कहते हुए उसे "समय की बर्बादी" करार दिया है।




नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ संवाददाताओं से बातचीत में श्री ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा, "मैं अब उनके साथ कोई व्यवहार नहीं करना चाहता। जहां तक मेरा सवाल है, यह सब खत्म हो चुका है। उनसे बातचीत करना समय की बर्बादी है। वे झूठे हैं।"


 


श्री ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने हाल में दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों और ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध कड़े किये जाने के जवाब में बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है।


 


इससे पहले अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे कम से कम तीन वाणिज्यिक जहाजों पर कथित ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान में कई ठिकानों पर "शक्तिशाली" सैन्य कार्रवाई की। सेंटकॉम ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य रणनीतिक जलमार्ग में नागरिक चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की कीमत ईरान से वसूलना था। विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति इसी जलमार्ग से होती है।


 


सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा, "ईरान की आक्रामक कार्रवाई अनुचित, खतरनाक और युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन है।"


 


श्री ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें अब कूटनीतिक वार्ता में कोई सार नहीं दिखता।


 


उन्होंने अमेरिकी वार्ताकारों का हवाला देते हुए कहा, "वे बात कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। सच कहूं तो मैं भी अपना समय उनके साथ बर्बाद नहीं करना चाहता। यदि हमारे वार्ताकार चाहें तो बातचीत जारी रख सकते हैं, लेकिन मुझे उससे कोई उम्मीद नहीं है।"


 


श्री ट्रंप ने कहा कि ईरान को बड़ा खतरा बनने से पहले रोकना आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ताजा तनाव के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर "संधि तोड़ने" का आरोप लगाया।


 


ईरान ने कहा कि अमेरिकी सैन्य हमलों, ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों की पुनर्बहाली और क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाइयों ने समझौते के प्रमुख प्रावधानों को निष्प्रभावी बना दिया है और मौजूदा स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की है।


 


श्री ट्रंप ने नाटो सहयोगी देशों की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने "आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजक" ईरान के खिलाफ अमेरिका का पर्याप्त साथ नहीं दिया। उन्होंने एक बार फिर शिकायत की कि गठबंधन के रक्षा खर्च का असमान बोझ अमेरिका उठा रहा है। इस बीच, कतर ने ईरान पर कतर के एलएनजी पोत अल-रेकय्यात पर हमला करने, समुद्री यातायात बाधित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।


 


ईरान ने तेल टैंकरों को चेतावनी दी है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का ही उपयोग करें, अन्यथा उन्हें "कड़े सैन्य जवाब" का सामना करना पड़ेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रो-रसायन उत्पादों की बिक्री की अनुमति देने वाली प्रतिबंध छूट भी वापस ले ली है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस छूट के तहत अधिकृत सभी लेन-देन 17 जुलाई तक समाप्त कर दिये जायें। यह छूट पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन का हिस्सा थी।


 


शादाब जितेन्द्र

वार्ता

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