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अमेरिका-ईरान युद्ध: लड़ाई बढ़ने के साथ ही ईरान ने मिसाइलों और ड्रोनों से जॉर्डन और बहरीन को निशाना बनाया

वाशिंगटन, 02 सितंबर (वार्ता) अमेरिका की ओर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े ठिकानों पर हमले किये जाने के बाद, ईरान ने बुधवार को पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किये।
इससे दोनों देशों के बीच सात महीने से जारी यह टकराव और बढ़ गया है। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उन्होंने 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका। इसके साथ ही बहरीन ने ईरानी ड्रोनों को रोकने की सूचना दी। ये हमले तब हुए जब अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई में ईरान पर हमला किया। अमेरिका का आरोप था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रहा था और उसने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमला किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमान ने कहा कि हालिया हमलों में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी जगहों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी, तो उस पर 'बहुत ज़ोरदार हमला' किया जाएगा। इस तनाव के बढ़ने से टकराव का दायरा अमेरिका और ईरान के सीधे आमना-सामना से आगे बढ़ गया है, और पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर हमले बढ़ रहे हैं।
ईरान के आईआरजीसी ने कहा कि उसकी सेना ने कुवैत, जॉर्डन, बहरीन और एरबिल में अमेरिकी ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए। उसने दावा किया कि कुवैत के अली अल-सलेम हवाई अड्डा पर अमेरिकी कमांडर के कमान परिसर और रहने की जगहों पर हमला किया गया, जिससे ड्रोन हैंगर और तैनाती रैंप में आग लग गयी और कई ड्रोन नष्ट हो गये। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।
आईआरजीसी ने कहा कि ये हमले दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के जवाब में किए गए थे, जिसमें होर्मोज़गन प्रांत के सिरिक में एक रिहायशी घर पर हवाई हमला भी शामिल था, जहाँ एक शादी हो रही थी।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका पर हमले में 50 से अधिक लोगों को मारने या घायल करने का आरोप लगाया।
श्री बघाई ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "आज रात एक घर पर बेरहमी से हमला किया गया, जब परिवार शादी का जश्न मना रहे थे।" उन्होंने कहा कि 50 से ज़्यादा पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए या घायल हुए। बाद में ईरानी अधिकारियों ने बताया कि लगभग 70 आम नागरिक प्रभावित हुए और एक बच्चे समेत पाँच लोगों की मौत हो गई। इस आरोप पर अमेरिकी अधिकारियों की ओर से तुरंत कोई टिप्पणी नहीं आई।
श्री बघाई ने इस घटना को अत्याचारों की एक कड़ी का हिस्सा बताया और कहा कि ईरान इसका जवाब देगा। उन्होंने कहा, "बम से भी ज़्यादा खतरनाक बमबारी होगी। "
आईआरजीसी ने अलग से बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गये। ये टैंकर तेहरान के अनुसार एक अनधिकृत रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे। आईआरजीसी ने बताया कि जहाजों में विस्फोट हुआ और उनमें आग लग गयी। उनके चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया गया है। उन्होंने जहाजों की पहचान नहीं बतायी, उनके समूहों का खुलासा नहीं किया और न ही किसी संभावित हताहत के बारे में जानकारी दी।
आईआरजीसी ने कहा कि ईरानी बलों ने पहले ही जहाजों को बारूदी सुरंगों वाले इलाके से गुजरने के खतरों के बारे में चेतावनी दी थी और उन शिपिंग कंपनियों के खिलाफ अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की धमकी दी थी जो ईरान द्वारा अनुमोदित नहीं किए गये रास्तों का इस्तेमाल करती हैं।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तेल की वैश्विक आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, इस संघर्ष का एक मुख्य केंद्र बन गया है।
इस बीच, श्री ट्रंप ने ईरानियों से अपनी सरकार को चुनौती देने की अपनी अपील को दोहराते हुए लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने की फिर कोशिश की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "ईरान के लोग कब उठ खड़े होंगे और लड़ेंगे?" उन्होंने कहा कि ईरान का शासन तंत्र बस अपरिहार्य नतीजे की ओर बढ़ रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ढह रही है।
श्री ट्रंप ने युद्ध शुरू होने के बाद ईरानियों से अपनी सरकार पर कब्ज़ा करने को कहा था, लेकिन बाद में कहा था कि अमेरिका सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि उन्हें सत्ता परिवर्तन की कभी परवाह नहीं रही। हमलों का यह ताजा दौर, अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के लराक द्वीप पर हमला करने के कुछ दिनों बाद आया है।
अमेरिका ने कहा कि इस हमले का मकसद ईरान को बारूदी सुरंगें बिछाने से रोकना था। इसके बाद ईरान ने जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सेना पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। तब से ईरानी नेताओं ने अमेरिका और उन देशों के खिलाफ और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है जो अमेरिका को अपनी ज़मीन या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की इजाज़त देते हैं। संसद के उपाध्यक्ष अली निकज़ाद ने कहा कि अमेरिकी हमलों का समर्थन करने वाले देशों को उनकी भागीदारी के हिसाब से सज़ा दी जाएगी। श्री निकज़ाद ने कहा, "जिस किसी ने भी अमेरिका के अपराधों में सहयोग और योगदान दिया है और जिसने अपनी ज़मीन, इलाका या सुविधाएं उसे इस्तेमाल के लिए दी हैं, उसे उसकी भागीदारी के स्तर के अनुसार सज़ा दी जाएगी।"
संतोष जितेन्द्र
वार्ता
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