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ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हमले की संभावना को किया खारिज, कहा- ईरान को पूरी तरह हार चुका है

वाशिंगटन, 02 सितंबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से साफ इनकार कर दिया है। दोनों देशों के बीच छोटी-सी शांति के बाद दोबारा भड़की जंग के दौरान श्री ट्रंप ने इस तरह के सवाल को 'बेवकूफाना' करार दिया।
ओवल ऑफिस में पत्रकारों ने जब श्री ट्रंप से पूछा कि क्या उन्होंने परमाणु हमले की संभावना खत्म कर दी है, तो उन्होंने कहा, "मैं आमतौर पर ऐसा नहीं कहता, लेकिन सवाल का जवाब 'हां' है। इसकी कोई वजह ही नहीं है... यह कितना बेवकूफाना सवाल है।" अपने पुराने दावे को दोहराते हुए उन्होंने कहा, "ईरान सैन्य रूप से पूरी तरह हार चुका है और अब मुझे उन पर परमाणु हथियार इस्तेमाल करना चाहिए? यह बेहद बेवकूफाना सवाल है।"
इससे पहले श्री ट्रंप ईरान की पूरी सभ्यता को तबाह करने की धमकी दे चुके हैं, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कभी ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात नहीं कही है।
श्री ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हालिया भीषण गोलाबारी के बाद अमेरिका एक बार फिर ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य हमलों का अभियान शुरू करने पर विचार कर रहा है।
'एक्सियोस' को तीन अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरानी मिसाइल और रडार ठिकानों पर हमले की योजना बना रहा है, ताकि ईरान को इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर मिसाइल दागने से रोका जा सके।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की इस योजना का मकसद जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों का खतरा कम करना है।
सेंटकॉम इस रणनीतिक समुद्री मार्ग के पास ईरान के अपनी रडार और मिसाइल क्षमताओं को फिर से खड़ा करने से चिंतित है। हाल ही में ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज की सुरक्षा में तैनात अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान पर मिसाइल दागी थी। मिसाइल हालांकि विमान के बहुत करीब नहीं पहुंची, लेकिन इस घटना ने अमेरिका की आशंकाओं को काफी बढ़ा दिया है।
अमेरिकी सेना ने हमलों का यह खाका हालिया झड़पों से पहले ही तैयार कर लिया था और अब तनाव बढ़ने के बाद श्री ट्रंप इस सैन्य अभियान को अपनी मंजूरी दे सकते हैं।
श्री ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अमेरिका ईरान के हमलों का करारा जवाब देगा। उन्होंने कहा, "हम उन पर जोरदार प्रहार करने जा रहे हैं।"
यह विवाद तब बढ़ा जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया। इस बीच ईरान के सैन्य नेतृत्व ने पड़ोसी देशों को सख्त हिदायत दी है कि वे अमेरिका को अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए न करने दें।
ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी (यूकेएमटीओ) के अनुसार, जलडमरूमध्य से बाहर निकल रहे एक तेल टैंकर ने ओमान के पूर्वोत्तर तट के पास तीन 'अज्ञात मिसाइलों/गोले' टकराने की सूचना दी है। इस घटना में हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है।
ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि होर्मुज के दक्षिणी गलियारे से गुजर रहे एक सऊदी तेल टैंकर को रोक लिया गया, हालांकि सऊदी अधिकारियों ने इस बात की तुरंत पुष्टि नहीं की है।
दोनों देशों के बीच यह भीषण युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब इजरायल-अमेरिका ने ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से एक संयुक्त 'डेकैपिटेशन स्ट्राइक' (शीर्ष नेतृत्व पर घातक हमला) की थी। इसका मकसद ईरान की सैन्य क्षमताओं और परमाणु कार्यक्रम को ध्वस्त करना था।
हमले में सफलता के बावजूद, ईरान की दूसरी पंक्ति के कमान-नेतृत्व ने तुरंत मोर्चा संभाला और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रोक दी। युद्ध से पहले दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता था।
श्री ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी नौसेना का इस समुद्री मार्ग पर 'पूरा नियंत्रण' है। अमेरिका ने बीते सप्ताह ही जलडमरूमध्य से सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ करने का दावा किया था।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि समुद्री मार्ग पर अब भी उसी का वर्चस्व है। आईआरजीसी ने दावा किया कि एक 'अनधिकृत' तेल टैंकर तेहरान के बंद किये गये 'अवैध मार्ग' से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जो दो समुद्री सुरंगों से टकराकर आग की लपटों में घिर गया।
युद्ध रोकने की राजनयिक कोशिशें भी फिलहाल ठप पड़ी हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि अगर अमेरिका युद्ध खत्म करने के उद्देश्य से बने जून के समझौता पत्र (एमओयू) पर वापस लौटता है, तो ईरान तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा।
किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में श्री पेजेश्कियान ने कहा, "मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि यदि अमेरिका उक्त समझौता ज्ञापन के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौटता है, तो ईरान भी तुरंत जवाबी कदम उठायेगा।"
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी वार्ता प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की वकालत की है। श्री अराघची ने कहा, "समाधान बिल्कुल साफ और सीधा है- अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं पर वापस लौटना होगा। अगर ऐसा होता है तो सब कुछ दोबारा सही ढर्रे पर लाया जा सकता है।"
आलम, मधुकांत
वार्ता
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