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सीतारमण ने सरकारी बैंकों को गांधी जयंती से 'युवा केंद्रित बैंकिंग' अभियान चलाने का आह्वान किया

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय वित्त एवं वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कारोबार में युवा वर्ग की आवश्यकताओं को देखते हुए महात्मा गाँधी जयंती पर 'युवा केंद्रित बैंकिंग' अभियान चलाने का आह्वान किया है।
वित्त मंत्री ने सरकारी बैंकों की वर्तमान स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि अपनी मजबूती का और अधिक महत्वाकांक्षी तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए और अवसरों काे समय रहते पहचान कर उनके लिए अपनी क्षमता बढ़ानी चाहिए। वह यहां सार्वजनिक बैंकों के दो दिन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत युवाओं की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और घरेलू अर्थव्यवस्था में उपभोग, बचत, निवेश, उद्यमिता और संपत्ति सृजन के तौर-तरीकों को युवा वर्ग तेजी से प्रभावित करेगा।
वित्त मंत्री ने कहा, " मैं चाहता हूँ कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) से एक महीने तक चलने वाले केंद्रित 'बैंकिंग फार यूथ' (युवाओं के लिए बैंकिंग) अभियान शुरू करने पर विचार करें जिसमें विशेष रूप से 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं से संपर्क बनाने पर ध्यान दिया जाए। इसका समन्वय वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन (आईबीए)के माध्यम से किया जा सकता है।"
उन्होंने कहा, ' इस अभियान के माध्यम से युवाओं को उनकी वित्तीय यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही सक्रिय रूप से जोड़ा जाना चाहिए, उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में लाया जाना चाहिए और उनके साथ शुरुआत से ही एक सार्थक एवं मजबूत संबंध स्थापित किया जाना चाहिए।"
उन्होंने सुझाव दिया कि बैंकों को युवाओं के बैंक शाखाओं में आने का इंतजार करने के बजाय स्वयं युवाओं तक पहुँचना चाहिए। कॉलेज, विश्वविद्यालय, कौशल-विकास संस्थान और अन्य कैंपस इस अभियान के महत्वपूर्ण संपर्क केंद्र बन सकते हैं। यहाँ खाता खोलने की पहल, वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम और बैंक अधिकारियों के साथ सीधे संवाद आयोजित किए जा सकते हैं।
उन्होंने बैंकों में 'युवा कियोस्क' या ' युवा बैंकिंग मित्र' केंद्र भी बनाने जैसी नयी पहलों पर भी विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि युवाओं को पोर्टल आदि से सरल और युवा-अनुकूल प्रश्नोत्तरी, सुरक्षित बैंकिंग व्यवहार,केवाईसी, शिक्षा एवं कौशल-विकास, वित्त, उद्यमिता तथा अन्य प्रासंगिक वित्तीय सेवाओं से संबंधित मार्गदर्शन दिया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि 16 से 18 वर्ष की आयु के बीच स्थापित किया गया बैंकिंग संबंध दशकों तक मजबूत हो सकता हैं..सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक युवा भारतीयों की पहली और सबसे विश्वसनीय पसंद होने चाहिए।
इस दो दिन के सम्मेलन का उद्घाटन भी श्रीमती सीतारमण ने किया था। कुल सात प्रमुख विषयों को लेकर आयोजित इस सम्मेलन में सोमवार को चार विषयों पर चर्चा हुई । जिनमें जमा राशि बढ़ाना, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र को समर्थन और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) शामिल थे। आज के सत्राें में कृषि एवं बागवानी मूल्य श्रृंखला अवसंरचना प्राथमिकता क्षेत्र ऋण , क्रेडिट कार्ड कारोबार की पुनर्कल्पना पर चर्चा के बाद सभी सात विषयगत समूहों से सामने आई कार्रवाई योग्य रणनीतियों और नवोन्मेषी समाधानों पर प्रस्तुतियां दी गयीं।
उन्होंने वित्तीय सेवा विभाग की टीम की सराहना करते हुए कहा कि सभी 7 विषयों पर बहुत व्यवस्थित तरीके से पृष्ठभूमि नोट तैयार किए हैं। श्रीमती सीतारमण ने समापन सत्र में कहा , " आज हमारे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) पहले की तुलना में काफी मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं। अब आवश्यकता इस मजबूती का अधिक महत्वाकांक्षी तरीके से उपयोग करने की है—अवसरों की समय रहते पहचान करना, मांग बढ़ने से पहले क्षमताओं का निर्माण करना और यह सुनिश्चित करना कि हमारे संस्थान भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण में अग्रणी भूमिका में बने रहें।"
श्रीमती सीतारमण ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र के लिए लक्षित कर्ज सुविधा विकसित करने की आवश्यकता को समझाने पर समर्पित किया। उन्होंने कहा, " मैं आपका ध्यान 15 अगस्त 2026 को, तीन दिन पहले, माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संबोधन की ओर आकर्षित करना चाहती हूँ। प्रधानमंत्री के विजन "सप्त धारा" की दूसरी धारा में उन्होंने कृषि पर विशेष जोर दिया था। इस 'सप्त धारा' की दूसरी धारा कृषि और खाद्य उत्पादन है। हमें खाद्य प्रसंस्करण की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा। हमारे किसानों की वैश्विक बाजारों तक पहुँच अब सुनिश्चित हो रही है... हमें खेत से निर्यात बाजार तक की यात्रा करनी है...।"
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को इस विजन को उचित रूप से डिजाइन और लक्षित कृषि वित्तपोषण में परिवर्तित करना चाहिए। विशेष रूप से, उन्हें दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को ऋण में पर्याप्त वृद्धि करनी चाहिए, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के साथ निकटता से जुड़ा होना चाहिए और कृषि ऋण व्यवस्था में जलवायु परिवर्तन के प्रति मजबूती तेजी से विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, '' हमारा ध्यान दृढ़ता से छोटे और सीमांत किसानों पर केंद्रित रहना चाहिए। बैंकों को अपनी पहुँच का विस्तार करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संस्थागत ऋण छोटे एवं सीमांत किसानों को उत्पादकता बढ़ाने, खेती में विविधता लाने, बेहतर तकनीक अपनाने और लाभकारी बाजारों से जुड़ने में सक्षम बनाए।"
वित्त मंत्री ने वित्तीय सेवा विभाग को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) और कृषि ऋण की निगरानी करने को कहा।
मनोहर जितेन्द्र
वार्ता
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