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माकपा ने नोएडा में श्रमिकों के दमन का लगाया आरोप, कानूनी और राजनीतिक समर्थन का दिया भरोसा

नयी दिल्ली, 03 जून (वार्ता) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बुधवार को नोएडा में हाल के मजदूर आंदोलनों में शामिल श्रमिकों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और आरोप लगाया कि अपने ट्रेड यूनियन अधिकारों का प्रयोग करने के कारण उन्हें (मजदूरों) पुलिस दमन, झूठे आपराधिक मामलों और नौकरियों से बर्खास्तगी का सामना करना पड़ा है।
पार्टी महासचिव एमए बेबी के नेतृत्व में माकपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने उन मजदूरों से मुलाकात की, जिन्हें नोएडा श्रमिक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था और जो लगभग एक महीना जेल में बिताने के बाद हाल ही में जमानत पर रिहा हुए हैं। पार्टी के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के बाद कई श्रमिकों को उनके रोजगार से भी निकाल दिया गया है।
श्रमिकों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि पुलिस हिरासत के दौरान उन्हें शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा और उन्हें ऐसे मनगढ़ंत मामलों में फंसाया गया, जिनका उद्देश्य उनके आंदोलन को दबाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों को डराने और सामूहिक कार्रवाई को हतोत्साहित करने के लिए उनके खिलाफ कई आरोप लगाये गये थे।
प्रतिनिधिमंडल में माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य आर अरुण कुमार और तपन सेन, राज्यसभा सांसद वी शिवदासन, दिल्ली राज्य सचिवालय के सदस्य राजीव कुंवर और पी. वी. अनियन तथा स्थानीय नेता राम स्वारथ, गंगेश्वर और राम सागर शामिल थे।
दौरे में प्रतिनिधिमंडल ने एक कपड़ा निर्माण इकाई, फैब्सट्रैक्ट क्लोथिंग के श्रमिकों से भी मुलाकात की, जहां अप्रैल में श्रमिक अशांति के बाद लगभग 50 श्रमिक ट्रेड यूनियन आंदोलन में शामिल हुए थे। श्रमिकों ने माकपा नेताओं के सामने अपनी शिकायतें प्रस्तुत कीं और यूनियन की गतिविधियों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों का विस्तृत विवरण दिया।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनी वाइब्रैकॉस्टिक इंडिया के श्रमिकों के प्रतिनिधियों ने भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। दोनों कंपनियों के श्रमिकों और साथ ही मदरसन से जुड़े कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन आम तौर पर श्रमिकों को यूनियन बनाने और संगठित होने के उनके अधिकार का प्रयोग करने से रोकने का प्रयास करता है। उन्होंने दावा किया कि श्रमिक आंदोलनों में नेतृत्व की भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों को अक्सर अनुशासनात्मक कार्रवाई या बर्खास्तगी का सामना करना पड़ता है।
बैठकों के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए एमए बेबी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर श्रमिकों के आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिसिया कार्रवाई का उपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, "राज्य सरकार ने पुलिस हिंसा को बढ़ावा दिया है और अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे श्रमिकों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किये हैं।"
श्री बेबी ने जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की माकपा प्रतिनिधिमंडल को अनुमति न देने के लिए भी अधिकारियों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि कुछ हिरासत में लिये गये श्रमिक पर्याप्त कानूनी सहायता प्राप्त करने या जमानत के लिए आवेदन करने में भी असमर्थ थे, और उन्होंने इस स्थिति को उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
उन्होंने कहा,"पिछले कुछ दिनों से हम अपने सांसद डॉ. वी. शिवदासन के माध्यम से जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की अनुमति प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। जेल अधिकारियों ने हमें सूचित किया कि उच्च अधिकारियों ने हमारे अनुरोध को खारिज कर दिया है। यह पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है और इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ है।"
माकपा नेता ने कहा कि पार्टी प्रभावित श्रमिकों को कानूनी और राजनीतिक समर्थन देना जारी रखेगी। उन्होंने कहा, "माकपा श्रमिकों के साथ खड़ी रहेगी, कानूनी सहायता में उनकी मदद करेगी और उनके संघर्षों में उनका समर्थन करेगी।"
पार्टी ने कहा कि नोएडा में श्रमिकों को जिन गिरफ्तारियों, बर्खास्तगी और कथित दमन का सामना करना पड़ा है, वे देश में श्रमिक अधिकारों के सामने मौजूद व्यापक चुनौतियों को दर्शाते हैं। इन झटकों के बावजूद, उसने दावा किया कि ट्रेड यूनियन गतिविधि और श्रमिक आंदोलनों पर अंकुश लगाने के प्रयासों का सबसे प्रभावी जवाब श्रमिकों की एकता और सामूहिक संगठन ही हैं।
आलम उप्रेती
वार्ता
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