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प्रभावी शासन और सटीक योजनाओं के लिए सही आंकड़े बेहद जरूरी : राधाकृष्णन

नई दिल्ली, 18 अगस्त (वार्ता) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रभावी शासन और लाभों को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए सटीक आंकड़ों की आवश्यकता पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने आंकड़ा-आधारित शासन व्यवस्था के निर्माण में भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए जमीनी हकीकत को समझने के लिए सांख्यिकीविदों के लिए फील्ड के अनुभव के महत्व पर भी जोर दिया।
वह भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों के दल को संबोधित कर रहे थे, जो उनसे मिलने आया था। उपराष्ट्रपति भवन में आये भारतीय सांख्यिकी सेवा के 2026 बैच के इन अधिकारियों के दल में 16 महिला अधिकारियों सहित कुल 34 अधिकारी शामिल थे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने डिजिटल लेन-देन को गति दी और समानांतर अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद की है।
इन युवा अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए उपराष्ट्रपति ने देश की प्रतिष्ठित सेवा में शामिल होने पर उन्हें बधाई दी और कहा कि महिलाओं का बढ़ता प्रतिनिधित्व भारत की महिला सशक्तीकरण से लेकर महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ती यात्रा को दर्शाता है।
सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा, "यदि आंकड़े सही नहीं हैं, तो कोई भी निर्णय सही नहीं हो सकता।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों के बिना प्रभावी योजना बनाना, संसाधनों का आवंटन करना और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं होगा।
यदि लक्षित लाभार्थियों की सही पहचान नहीं की गयी तो सीमित संसाधन भी बर्बाद हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, "आंकड़े सटीक रूप से एकत्र किए जाने चाहिए और सही समय पर उपलब्ध कराये जाने चाहिए।"
उन्होंने आगाह किया कि यदि बुनियादी आंकड़े ही गलत होंगे, तो राष्ट्रीय चुनौतियों के लिए उपयुक्त समाधान तलाशना कठिन हो जायेगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधिकारिक आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि शासन के ऐसे साधन हैं जो सरकार को यह समझने में सहायता करते हैं कि देश, उसके लोग और समाज के विभिन्न वर्ग किस स्थिति में हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्रीय अनुभव, आंकड़ों का सटीक संग्रह, उनका उचित रख-रखाव और समय पर प्रस्तुतीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा, "किसी योजना की सफलता या विफलता काफी हद तक आंकड़ों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कार्यक्रमों के अपेक्षित लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने में सांख्यिकीविदों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
श्री राधाकृष्णन ने सांख्यिकीय और प्रशासनिक आंकड़ा तंत्र को मजबूत किए जाने पर जोर दिया, जिसमें डिजिटल डेटाबेस, जीएसटी आंकड़े और उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक आंकड़े शामिल हैं।
डिजिटल लेन-देन में आये बदलाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने इनके विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और समानांतर अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद की है।
उन्होंने आर्थिक गणनाओं के लिए उपयुक्त आधार वर्षों के महत्व और देश की वास्तविक विकास दर के सटीक आकलन पर भी बात की। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल आर्थिक संकेतक ही मानव कल्याण की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं कर सकते, खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानदंड भी महत्वपूर्ण हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि "सांख्यिकी का मूल्य विश्वास से निर्धारित होता है", उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से पेशेवर और नैतिक सत्यनिष्ठा, राजनीतिक तटस्थता, गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक शिष्टाचार निभाने के बजाय अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक और ईमानदारी से निर्वहन करना ही वह वास्तविक सम्मान है, जो अधिकारी अपने वरिष्ठों के प्रति प्रदर्शित कर सकते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से निरंतर सीखने की आदत विकसित करने, क्षेत्रीय अनुभव से सीख लेने तथा वरिष्ठों, सहकर्मियों और अधीनस्थों से सीखने के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया।
श्री राधाकृष्णन ने युवा अधिकारियों से जिज्ञासु, कठोर परिश्रमी और नवाचार के प्रति खुले विचारों वाला बने रहने का आग्रह किया तथा साथ ही पेशेवर स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि 'विकास के लिए आंकड़े' और आंकड़ा-आधारित निर्णय विकसित भारत-2047 के लिए एक मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली के निर्माण में महत्वपूर्ण होंगे।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2026 बैच के अधिकारी भारतीय सांख्यिकी सेवा की उत्कृष्ट परंपराओं को कायम रखेंगे और ऐसी आंकड़ा-आधारित व्यवस्था के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे, जो लोगों को ठोस लाभ पहुंचाने में सक्षम हो।
इस अवसर पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग, डेटा गवर्नेंस के महानिदेशक श्री पी. आर. मेश्राम, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।
मनोहर, आलम
वार्ता
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