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ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला, ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

वाशिंगटन, 03 जून (वार्ता) अमेरिका की सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन करने वाले एक तेल टैंकर को रोकने के कुछ ही घंटे बाद, मंगलवार रात को ईरान के रणनीतिक केशम द्वीप पर बने एक सैन्य नियंत्रण केंद्र पर हमला कर दिया।
इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से पलटवार किया। इस दौरान कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी हमला हुआ, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ है और कई लोग घायल हुए हैं। केशम द्वीप पर हमले से पहले अमेरिकी सेना ने बोत्सवाना के झंडे वाले ‘एम/टी लेक्सी’ नाम के एक सुपरटैंकर को अपने हेलफायर मिसाइल से पंगु बना दिया था। अमेरिका का दावा है कि इस टैंकर ने नाकेबंदी के नियमों को मानने से बार-बार इनकार कर दिया था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, यह खाली जहाज ईरान के खार्ग द्वीप की ओर जा रहा था और उसने 24 घंटे के भीतर कई बार सैन्य निर्देशों को मानने से इनकार किया था। इसके बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम पर हेलफायर मिसाइल दागकर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। सेंटकॉम ने कहा, “ एक अमेरिकी विमान ने आखिरकार जहाज के इंजन रूम पर हेलफायर मिसाइल दागकर उसे निष्क्रिय कर दिया, जिससे वह ईरान नहीं पहुंच सका। ”
अमेरिकी सेना के अनुसार, 13 अप्रैल को नाकेबंदी लागू होने के बाद से रोका गया यह छठा जहाज है, लेकिन अरब खाड़ी के भीतर किसी जहाज पर हमले का यह पहला मामला है।
ईरान ने भी इस पर बहुत तेजी से पलटवार किया। उसने कुवैत और बहरीन की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। सेंटकॉम ने बताया कि कुवैत की ओर दागी गयी, दो मिसाइलें या तो रास्ते में ही गिर गयीं या हवा में नष्ट हो गयीं, जबकि बहरीन को निशाना बनाकर दागी गयी तीन मिसाइलों को अमेरिका और बहरीन के एयर-डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही मार गिराया।
ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (आईआरजीसी) ने इस इलाके में कई हथियारबंद ड्रोन भी भेजे। सेंटकॉम का हालांकि दावा है कि आम जहाजों को नुकसान पहुंचाने से पहले ही तीन ड्रोनों को नष्ट कर दिया गया।
बाद में कुवैत ने पुष्टि की कि ईरान के ड्रोनों ने उसके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया है, जिससे हवाई अड्डे की इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है और कई लोग घायल हुए हैं। इस हमले के बाद बुधवार सुबह से वहां विमानों की आवाजाही रोक दी गयी है। प्रशासन ने हालांकि अभी तक घायल होने वाले लोगों की सही संख्या या उनकी हालत के बारे में जानकारी नहीं दी है।
न्यूज चैनल ‘अल जज़ीरा’ के अनुसार, कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअज़ीज़ अल-ओतैबी ने हमले की कड़ी निंदा की और इसे ‘ईरान की आपराधिक हरकत’ करार दिया।
दूसरी तरफ, ईरान की आईआरजीसी ने अपनी इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए अमेरिका को आगे तनाव न बढ़ाने की चेतावनी दी और एक बयान में कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की अमेरिकी सेना को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है, जब इस महीनों पुराने विवाद को सुलझाने की राजनयिक कोशिशें पूरी तरह नाकाम होती दिख रही हैं। कुछ दिन पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान ‘वाकई एक समझौता करना चाहता है, जो अमेरिका के हक में होगा।’ लेकिन सप्ताहांत में हुई बातचीत तब टूट गयी, जब अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई शर्तें सामने रख दीं।
ईरान ने इन प्रस्तावों को सिरे से खारिज करते हुए अमेरिका पर बातचीत के दौरान अपना स्टैंड बदलने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा, “ अमेरिका लगातार अपना रुख बदल रहा है और नयी एवं विरोधाभासी मांगें सामने रख रहा है।”
इस विवाद के शुरू होने के बाद पहली बार अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के सामने पेश हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बदले ईरान को प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी गयी है। उन्होंने कहा कि कोई भी राहत केवल शर्तों के आधार पर होगी, जो सीधे तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी होंगी।
श्री रुबियो ने यह दावा भी किया कि ‘अब युद्ध खत्म हो चुका है।’ उनका यह दावा हालांकि बुधवार के जमीनी घटनाक्रम से मेल नहीं खाता, क्योंकि खाड़ी में दोनों ओर से सैन्य हमले जारी हैं और क्षेत्र में तनाव कम होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।
भारत.श्रवण
वार्ता
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अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी सेना ने कई अमेरिकी ठिकानों पर किये हमले

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