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मॉरिशस में 11वां विश्व हिन्दी सम्मेलन शुरू

मॉरिशस  में 11वां विश्व हिन्दी सम्मेलन शुरू

गोस्वामी तुलसीदास नगर (मॉरिशस) 18 अगस्त (वार्ता) हिन्दी के संवर्द्धन, संरक्षण और उसके विकास के संकल्प के साथ तीन दिवसीय 11वां विश्व हिन्दी सम्मेलन आज शुरू हो गया।

मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जगन्नाथ ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “पूरी दुनिया में 50 करोड़ से अधिक हिन्दी बोलने वालों की संख्या को देखते हुए हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि हिन्दी के लिए वह दिन दूर नहीं जब संयुक्त राष्ट्र संघ में उसे आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिलेगी। वैसे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि हिन्दी का भी अंतरराष्ट्रीय महत्व बढ़ रहा है।”

श्री जगन्नाथ ने कहा कि इसी वर्ष की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक सम्मेलन का उद्घाषण भाषण हिन्दी में दिया था। उनका संदेश हिन्दी के लिए गर्व की बात है और भाषा की मान्यता को भी प्रमाण करता है। उन्होंने कहा कि श्री मोदी के हिन्दी में दिये गये भाषण ने पूरी दुनिया को संदेश दिया कि हम अपने जड़ों से जुड़े रहते हुए भी पूरी दुनिया को गले लगा सकते हैं।

  मॉरिशस के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बहुसंस्कृति में विश्वास रखता है। भारतीय भाषाएं विशेष रूप से हिन्दी भारत और मॉरिशस की संस्कृति एवं मूल्यों से जुड़ा हुआ है। हिन्दी कई संस्कृति और कई भाषाओं से मिलती-जुलती है। हिन्दी एक सांस्कृतिक धरोहर है और यह एक समृद्ध इतिहास वाली भाषा ही नहीं बल्कि इसका भविष्य भी उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि यदि हमें हिन्दी के भविष्य को लेकर तनिक भी संदेह है तो दुनिया में चारो ओर देखना चाहिए। इस सभागार में दुनिया के अलग-अलग हिस्से से आये हिन्दी के विद्वानों का उत्साह, उमंग और आस्था इसके उज्ज्वल भविष्य का प्रमाण है।

श्री जगन्नाथ ने कहा कि हिन्दी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना स्थान बनाया है। आज दुनिया के 40 देशों के 600 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें बेहद खुशी हुई जब भारतीय फिल्मकार कुणाल कोहली ने दो दिन पहले रामायण पर फिल्म बनाने और उसका पूरा फिल्मांकन मॉरिशस में करने की घोषणा की। यह दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का एक और प्रमाण है। इसे कहते हैं ‘खून का रिश्ता।’ दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध कायम रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मॉरिशस में पहला हिन्दी समाचार पत्र हिन्दुस्तानी वर्ष 1907 में प्रकाशित हुआ, जो यहां लाये गये मजदूरों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ एक आवाज बना। मॉरिशस में हिन्दी को हमेशा से उचित स्थान दिलाने का प्रयास होता रहा है। वर्ष 1994 से यहां हिन्दी माध्यमिक और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मॉरिशस सरकार ने हिन्दी संगठन की स्थापना की है, जो भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के साथ मिलकर हिन्दी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


इस मौके पर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि यह सम्मेलन हिन्दी के संवर्द्धन, संरक्षण और उसे बचाने पर केन्द्रित है। आज जरूरत हिन्दी पढ़ने, बोलने और भाषा की शुद्धता को बरकरार रखने की है। पहले यह सम्मेलन साहित्य और साहित्यकारों पर केन्द्रित होता था लेकिन उन्होंने महसूस किया कि यदि भाषा बचायी नहीं गई तो साहित्य को कौन पढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस कार्य में भारत की जिम्मेवारी ज्यादा है और वह उसे निभा भी रहा है।

श्रीमती स्वराज ने कहा कि भाषा के साथ संस्कृति का गौरव भी जरूरी है इसलिए इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘हिन्दी विश्व और भारतीय संस्कृति’ रखा गया है। उन्हें खुशी है कि गिरमिटिया देशों में संस्कृति का गौरव कायम है। उन्होंने कहा कि 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए वह कुछ दिनों पहले जब मॉरीशस आयीं थी तब यहां के प्रधानमंत्री प्रवीण जगन्नाथ ने उन्हें रात्रि भोज पर आमंत्रित किया था। उस भोज में खिचड़ी भी परोसी गयी थी और उस समय श्री जगन्नाथ ने कहा कि उनके यहां हर संक्रांति को खिचड़ी बनती है। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, ‘उनकी मां खिचड़ी बनाना जानती हैं तुम भी खिचड़ी बनाना सीख लो।’ उन्होंने कहा कि श्री जगन्नाथ हिन्दी बोलना नही जानते हैं इसलिए उनमें भाषा को न जान पाने की निराशा और संस्कृति को बचाये रखने की छटपटाहट उन्हें दिखाई देती है।

विदेश मंत्री ने कहा कि समारोह की शुरुआत में केन्द्रीय हिंदी संस्थान आगरा के जिन पांच विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना की वे भारत और मॉरीशस की नहीं बल्कि अन्य देशों की थी, यह हिन्दी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में जब पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित हुआ था और उस समय से ही दो अनुशंसाएं हर बार होती थी कि विश्व हिन्दी सचिवालय की स्थापना हो और संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिले। विश्व हिन्दी सचिवालय की स्थापना हो चुकी है और अब यह सुचारू रूप से काम भी कर रहा है ।

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