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स्वस्थ मॉं और बच्चों से ही होगा समर्थ और सशक्त राष्ट्र का निर्माण: योगी

स्वस्थ मॉं और बच्चों से ही होगा समर्थ और सशक्त राष्ट्र का निर्माण: योगी

लखनऊ, 04 सितम्बर(वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश को कुपोषण से मुक्त कराने को आहृवान करने हुए कहा कि स्वस्थ मॉं और बच्चों से ही समर्थ एवं सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

श्री योगी ने शुक्रवार को यहां लोक भवन में ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ के सम्बन्ध में आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मॉं और बच्चों से ही समर्थ एवं सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा अनेक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश में बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या के समाधान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विशेष फोकस है। इसके मद्देनजर ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ संचालित किया जा रहा है। यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र को समृद्ध बनाना है।

इस अवसर पर श्री योगी राज्य के सभी जिलों से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुडे़ हुए थे।

श्री योगी ने बहराइच, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी एवं बाराबंकी के पोषण कार्यक्रम के लाभार्थियों एवं उनके अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित किया।

उन्होंने अभिभावकों से संवाद के दौरान उनके बच्चों की उम्र, पैदाइश के समय वजन, वर्तमान में वजन, स्वास्थ्य, प्रदान किये जा रहे पोषाहार, टीकाकरण आदि के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि पोषण के स्तर को बेहतर करने के लिए कुपोषित परिवारों, जिनके पास गाय रखने का स्थान उपलब्ध तथा गौ-पालन के इच्छुक हों, उन्हें निराश्रित गौवंश आश्रय स्थलों से गाय उपलब्ध करायी जाए। गाय के भरण-पोषण के लिए प्रति गाय प्रतिमाह 900 रुपये भी प्रदान किये जाएं। यह व्यवस्था पहले से संचालित ‘ मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत की जाए। श्री योगी ने कहा कि ऐसे परिवारों को अच्छे से अच्छा पोषण उपलब्ध कराने के लिए किचन गार्डन विकसित करने के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाए। कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों का चिन्हांकन करके उन्हें समय से पोषण सम्बन्धी सभी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं। बच्चों के साथ कुपोषित मां को भी चिन्हित कर योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। कुपोषित परिवारों के बेरोजगार लोगों को राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समुचित निगरानी को जरुरी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के समय में इसे डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाया जाए। जिला स्तर पर कार्यक्रम की साप्ताहिक समीक्षा की जाए। मण्डलायुक्त के स्तर पर पाक्षिक समीक्षा की जाए। इस समीक्षा की रिपोर्ट विभाग तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की जाए। विभागीय स्तर तथा मुख्य सचिव के स्तर पर माहवार समीक्षा सम्पन्न हो।

श्री योगी ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम के संचालन के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय बनाकर कार्य किया जाए। पूर्वांचल के गोरखपुर व आस-पास के जिलों में 40 वर्षाें से होने वाले इन्सेफेलाइटिस के प्रकोप पर वर्तमान सरकार द्वारा पिछले तीन वर्षो में अन्तर्विभागीय समन्वय तथा टीमवर्क से प्राप्त किये गये नियंत्रण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए भी इसी प्रकार अन्तर्विभागीय समन्वय व टीमवर्क से काम किये जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं व कार्यक्रमों को प्रभावित लोगों तक बेहतर ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय पोषण माह की सफलता के लिए इसे जन-आन्दोलन बनाना पड़ेगा। कुपोषण से होने वाले नुकसान एवं केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जन-जागरूकता पैदा करनी पड़ेगी। इस कार्यक्रम में सभी सम्बन्धित विभागों यथा स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, कृषि, उद्यान आदि को सहयोग करना होगा।

श्री योगी ने कहा कि पोषण कार्यक्रम के साथ ही टीकाकरण कार्यक्रम को भी समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए। इन कार्यक्रमों का लाभ बालकों एवं बालिकाओं को बिना भेदभाव के उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में भी जागरूकता पैदा की जानी चाहिए।

अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास श्रीमती एस0 राधा चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय शोक की घोषणा के कारण इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह सात सितम्बर से प्रारम्भ किया जा रहा है। इसे जनसहभागिता के आधार पर आयोजित किया जाएगा। इसमें जनजागरूकता के साथ माताओं और परिवारों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह के दो प्रमुख लक्ष्य- अतिकुपोषित बच्चों का चिन्हीकरण एवं प्रबन्धन तथा पोषण वाटिकाओं की स्थापना एवं विकास हैं। उन्होंने कहा कि पोषण माह के दौरान लगभग आठ लाख बच्चों का चिन्हीकरण किया जाएगा। इस माह में की गयी पहल को आगामी मार्च तक क्रियाशील रखा जाएगा।

भंडारी

वार्ता

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