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कुशीनगर की बेटियां बनी हिम्मत और जज्बे की मिसाल

कुशीनगर की बेटियां बनी हिम्मत और जज्बे की मिसाल

कुशीनगर 26 जनवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश में कुशीनगर के कसया क्षेत्र में सैलून चलाकर परिवार का भरण पोषण करने वाली दो सगी बहनें हिम्मत और जज्बे की मिसाल बन चुकी है।

दरअसल, सैलून चलाकर परिवार का भरण पोषण करने वाले ध्रुव को फालिज होते ही मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा मगर उसकी दो पुत्रियों ने हिम्मत और जज्बे की अनूठी मिसाल पेश करते हुये पिता के छोटे से व्यवसाय को अपना कर परिवार को भुखमरी की कगार से बचा लिया। उनके इस काम की चहुंओर प्रशंसा हो रही है।

जिले के कसया नगर पालिका के बनवारी टोला निवासी ध्रुव नारायन शर्मा गुमटी में सैलून चलाते थे जिससे नौ सदस्यों के परिवार गुजर बसर करता था। करीब तीन साल पहले ध्रुव को फालिज मार गया और वह बिस्तर पर पड़ गये। घर में झांकती भूख से व्याकुल ज्योति ने बड़ी हिम्मत दिखाते हुये पिता का सैलून खुद चलाने का फैसला कर लिया। बाद में बहन नेहा भी साथ देने लगी।

लड़कियों को ग्राहकों की दाढ़ी-बाल बनाते देखते तो कुछ दंग रह जाते तो कुछ ताने देते। क्या-क्या न सुना। न केवल वे लाचार पिता का सहारा बन गईं बल्कि विपरीत परिस्थितियों में हौसले और संघर्ष का प्रतीक भी। जिसने जिंदगी की लाचारियों पर जीत दर्ज की। सगी बहनों ज्योति शर्मा (18) और नेहा शर्मा (16) का पूरे क्षेत्र में अभिनंदन हो रहा है। इनके जज्बे को सलाम करना अपने आप में गवाह होना चाहिए। सबने कहा, इन बेटियां कुशीनगर की शान हैं। एक वादा ऐसा कि पिता की आंखें छलक पड़ीं । बीमार पिता ध्रुव नारायण शर्मा ने बेटी ज्योति और नेहा पर नाज जताया।

ध्रुव नारायन शर्मा की सात बेटियों में रंजना, बबिता, कविता और ममता की शादी हो चुकी है। ज्योति जब छोटी थी, तभी दुकान पर पिता के काम में हाथ बंटाती थी। तीन साल पहले पिता के शरीर के बाएं हिस्से में फालिज पड़ा। वह काम करने लायक नहीं रहे, तब ज्योति ने इंटर करने के बाद पढ़ाई छोड़ घर का खर्च चलाने के लिए पिता का सैलून संभाल लिया। उसकी मदद को 11 वीं में पढने वाली बहन नेहा भी आ गई। लोगों की आलोचना से बेपरवाह दोनों बहनें अपने काम में जुटी रहीं।

समाजसेवी डॉक्टर जेपी शर्मा की मदद वे कसया में ब्यूटीशियन का कोर्स कर रही हैं। छोटी गुंजन (15) दसवीं में है।ज्योति का कहना है कि हम समाज को यह बताना चाहते हैं कि बेटी और बेटों में कोई फर्क नहीं होता। कोई ऐसा काम नहीं है, जो बेटियां नहीं कर सकी।

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