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विवाह में देरी से बढ़ रही है बांझपन की समस्या : चिकित्सक

विवाह में देरी से बढ़ रही है बांझपन की समस्या : चिकित्सक

लखनऊ, 27 मार्च, (वार्ता) विवाह में देरी के साथ ही अनियमित दिनचर्या और फास्ट फूड का बढ़ता प्रचलन देश में नापुसंकता अौर बांझपन की समस्या को विकराल कर रहा है।     


     चिकित्सकों के मुताबिक हाल के वर्षो में बांझपन देश में चिंता का एक बडा कारण बनकर उभरा है जो पिछले एक दशक में करीब 14 फीसदी से बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो चुका है। बढती उम्र में विवाह और दंपत्ति द्वारा गर्भधारण में देरी करने के फैसले इस समस्या के अहम कारणों में एक है। इसके अलावा अनियमित दिनचर्या और खानपान भी नापुंसकता और बांझपन की बढी वजह बनकर उभरी हैं।

     स्त्रीरोग विशेषज्ञ डा आंचल गर्ग ने यूनीवार्ता को बताया कि किसी गर्भनिरोधक का उपयोग किये बिना यदि एक साल तक गर्भधारण नहीं हो पाता है तो यह इनफर्टिलिटी यानी बांझपन का संकेत हो सकता है। इसके लिये पुरूष और महिला में से कोई भी जिम्मेवार हो सकता है।

     उन्होने कहा, “ इच्छानुरूप समय पर बच्चे को जन्म देने की असमर्थता काफी तनावपूर्ण एवं व्यक्तिगत अनुभव है। ऐसे दंपति को इस समस्या के मूल कार को समझने और ठीक करने के लिए फर्टिलिटी उपचार का सहारा लेना चाहिए। ”

उन्होने कहा कि शुक्राणु की गणना एवं गतिशीलता पुरूषों की इनफर्टिलिटी के सबसे सामान्य कारणों में से है जबकि महिलाओं में, एनोव्युलेशन इनफर्टिलिटी एक ऐसी स्थिति है जिसमें मासिक चक्र के दौरान अंडाशयों से ऊसाइट नहीं निकलता है, जिससे अण्डोत्सर्जन बाधित हो जाता है। ”

चिकित्सक ने कहा कि एनोव्युलेशन के उपचार के लिए अनेक पद्धतियां उपलब्ध हैं। जीवनशैली संबंधी कुछ बदलाव जैसे शरीर का 10 प्रतिशत वजन कम करने से महिलाओं को मदद मिल सकती है। इसके गोलियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मामूली प्रभाव वाली खुराक का उपयोग छह महीने से अधिक तक नहीं किया जाना चाहिए। कुछ महिलाओं में अण्डाणु पैदा करने वाली कोशिकाओं की संख्या अत्यल्प हो सकता है या हो सकता है कि उनमें ऐसी कोशिका मौजूदा ही न हो, ऐसी स्थिति में, उपचार के लिए दाता अण्डाणुओं का उपयोग किया जा सकता है।

      उन्होने कहा कि उपचार शुरू करने से पहले गर्भाशय एवं गर्भनाल की उपयुक्तता देखने के लिये इनका आकलन किया जाना चाहिए। अण्डोत्सर्जन विकार लगभग एक-तिहाई इनफर्टिलिटी के मामले अण्डोत्सर्जन संबंधी विकारों के

चलते होते हैं। यदि किसी महिला को अण्डोत्सर्जन संबंधी विकार है, तो हो सकता है कि अण्डोत्सर्जन कभी-कभार हो या फिर न के बराबर हो। पाॅलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) अण्डोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले सबसे

सामान्य विकारों में से एक है। अण्डोत्सर्जन विकारों के अन्य कारणों में अण्डाशय अपर्याप्तता और हाइपोथैल्मिक एमेनोरिया शामिल हैं।

       चिकित्सक ने कहा कि जीवनशैली संबंधी पसंद इनफर्टिलिटी के मूल कारण हमेशा  विशिष्ट चिकित्सकीय स्थितियां ही नहीं होती हैं। अल्कोहल का अत्यधिक सेवन, धूम्रपान, नशीले पदार्थ का सेवन और एनाबोलिक स्टेराॅयड्स का उपयोग ऐसे कुछ कारण हैं जिनके चलते मर्दों के शुक्राणु की गुणवत्ता एवं क्षमता घटती है। सामान्य से कम वजन वाली या सामान्य से अधिक वजन वाली महिलाओं में इनफर्टिलिटी का अधिक खतरा होता है और सामान्य वजन वाली महिलाओं की तुलना में सफल आईवीएफ चक्र की कम गुंजाइश होती है।

डा आंचल ने बताया कि हाल के वर्षो में, आईवीएफ की सफलता दरों में भारी सुधार हुआ है, जिसका श्रेय असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलाॅजी (एआरटी) में हुई महत्वपूर्ण प्रगतियों को जाता है। यद्यपि आईवीएफ की सफलता की कहानियां अनेक हैं, फिर भी इस प्रक्रिया से जु़ड़े कई मिथक भी हैं। मिथकः आयु केवल महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है, पुरुषों को नहीं।

     पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन दर उम्र के साथ गिरावट आती है। महिलाओं के लिए, प्रजनन क्षमता उनके मध्य 20 के दशक की शुरुआत में आ जाती है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह गिरावट 35 साल की उम्र के बाद बढ जाती है। पुरुषों के लिए, उम्र से संबंधित प्रजनन क्षमता अधिक सूक्ष्म होती है, लेकिन होती है। पुरुष प्रजनन क्षमता आमतौर पर 40-45 वर्ष की आयु के आसपास घटने लगती है, जबकि शुक्राणु की गुणवत्ता कम हो जाती है। मिथकः आईवीएफ 100ः सफलता की गारंटी देता है; एक आईवीएफ विफलता के बाद कोई उम्मीद नहीं है

      आईवीएफ उपचार की सफलता दर महिला की आयु पर निर्भर करती है। सामान्य डिम्बग्रंथि रिजर्व के साथ 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के लिए, सफलता दर लगभग 60-70 प्रतिशत पाई गई है; उम्र में वृद्धि के साथ, सफलता की संभावना में गिरावट आती है।

      चिकित्सक ने बताया कि एक आईवीएफ चक्र की विफलता गर्भावस्था के शून्य अवसर का संकेत नहीं देती है। ब्लास्टोसिस्ट कल्चर जैसी एडवांस्ड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल बार-बार आईवीएफ फेल होने के खतरे को कम करने में मदद करता है।

प्रदीप

वार्ता

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