Sunday, May 31 2020 | Time 11:41 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • धौलपुर जिले के बाडी कस्बे में मिले चार कोरोना पॉजीटिव
  • देश में कोरोना के एक दिन में सर्वाधिक 8000 से अधिक नये मामले
  • अजमेर से पश्चिम बंगाल एवं बिहार के श्रमिकों को लेकर ट्रेन रवाना
  • कोरोना का संकट अब भी उतना ही गंभीर, लापरवाही नहीं चल सकती, सब उतनी ही सावधानी बरतेें : मोदी
  • पर्यावरण दिवस पर पेड़ लगायें, पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करें : मोदी
  • जल संचयन हमारी जिम्मेदारी, वर्षा का पानी बूंद बूंद बचाना है : मोदी
  • टिड्डी दल का हमला बड़ा संकट, किसानों को बचा लेंगे : मोदी
  • दिल्ली में बारिश से तापमान में गिरावट
  • अम्फान से पूर्वी भारत में भारी नुकसान, संकट की घड़ी में देश उनके साथ खड़ा है : मोदी
  • अजमेर में एक कांस्टेबल ने आत्महत्य का किया प्रयास
  • आयुष्मान भारत योजना के एक करोड़ लाभार्थियों में 80 प्रतिशत गांवों के हैं, 50 प्रतिशत महिलाएंं : मोदी
  • आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों के 14 हजार करोड़ रुपये बचाये : मोदी
  • लोग आयुष मंत्रालय की ‘माई लाइफ माई योग’ प्रतियोगिता में अवश्य भाग लें : मोदी
  • विश्व के नेताओं की दिलचस्पी योग एवं आयुर्वेद में है : मोदी
  • देश में कोरोना के 67 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली के
लोकरुचि


सौ साल की हथिनी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने के प्रयास

सौ साल की हथिनी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने के प्रयास

पन्ना, 12 अगस्त (वार्ता) मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व की धरोहर बन चुकी दुनिया की सबसे उम्रदराज मानी जाने वाली लगभग एक साै साल की हथिनी 'वत्सला' का नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने के प्रयास शुरू हो गये हैं। हथिनी वत्सला के जन्म का पूरा रिकॉर्ड केरल प्रान्त के नीलांबुर फारेस्ट डिवीज़न से मंगाया जा रहा है।

प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) शहवाज अहमद ने कल यहां अपने तीन दिवसीय पन्ना दौरे के समापन के बाद यूनीवार्ता से चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। हथिनी के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

केरल के नीलांबुर फारेस्ट डिवीज़न में जन्मी व पली-बढ़ी यह हथिनी 1972 में वहां से मध्यप्रदेश के होशंगाबाद के बोरी अभयारण्य में लाई गई थी। इसके बाद वहां से यह हथिनी वर्ष 1992 में पन्ना टाइगर रिज़र्व पहुंची। तभी से यह यहां की शोभा बढ़ा रही है।

लगभग सौ वर्ष की उम्र पार कर चुकी हथिनी वत्सला का उपयोग पन्ना टाइगर रिज़र्व में पूरे डेढ़ दशक तक यहां आने वाले पर्यटकों को बाघों का दीदार कराने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन अत्याधिक उम्रदराज होने के कारण इसे आराम की जिंदगी गुजारने के लिए कुछ वर्ष पहले सेवानिवृत (रिटायर) कर दिया गया। रिटायरमेंट के बाद से हथिनी वत्सला की पूरी देखरेख की जा रही है। उम्र को देखते हुए वत्सला को जहां सुगमता से पचने वाला आहार दिया जाता है, वहीं नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है।

पन्ना टाइगर रिज़र्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ एस के गुप्ता ने बताया कि टाइगर रिज़र्व के ही एक हाथी ने वर्ष 2003 और 2008 में दो बार प्राणघातक हमला कर हथिनी को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। मदमस्त नर हाथी ने दांतों से प्रहार कर वत्सला का पेट चीर दिया था। बेहतर उपचार और सेवा से इस बुजुर्ग हथिनी को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया गया था। मौजूदा समय यह हथिनी देशी व विदेशी पर्यटकों लिए जहां आकर्षण का केंद्र है, वहीं पन्ना टाइगर रिज़र्व के लिए भी किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है।

श्री अहमद ने बताया कि वत्सला का जन्म रिकॉर्ड नीलांबुर से मंगाने के निर्देश उन्होंने दिए हैं। यदि जरूरत पड़ी तो पन्ना टाइगर रिज़र्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ संजीव गुप्ता को रिकॉर्ड लाने के लिए नीलांबुर भेजा जाएगा। ताकि वत्सला की उम्र कितनी है, इसकी प्रामाणिक रूप से पुष्टि हो सके। वत्सला के शतायु होने का पन्ना में उत्सव मनाने के साथ ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की भी पहल की जाएगी, जिससे वत्सला को दुनिया की सबसे बुज़ुर्ग हथिनी का गौरव हासिल हो सके।

डॉ गुप्ता का कहना है कि दुनिया में अमूमन हाथी और हथिनियों की उम्र अधिकतम पच्चासी या नब्बे वर्ष ही रही है। फिलहाल एक सौ वर्ष पुरानी हथिनी को लेकर कहीं भी रिकार्ड नहीं है।

सं प्रशांत

वार्ता

More News
लॉकडाउन में गुम हुयी खुशियों पर बजने वाली किन्नरों की ताली

लॉकडाउन में गुम हुयी खुशियों पर बजने वाली किन्नरों की ताली

29 May 2020 | 9:41 PM

पटना 26 मई (वार्ता) मांगलिक कार्यों के दौरान लोगों के घरों में जा कर नाचने-गाने और आशीर्वाद देकर आजीविका कमाने वाले किन्नरों की तालियां लॉकडाउन में गुम हो गयी है।

see more..
लाकडाउन ने नट समुदाय को समझाया जड़ का महत्व

लाकडाउन ने नट समुदाय को समझाया जड़ का महत्व

29 May 2020 | 9:39 PM

मुरादाबाद 26 मई (वार्ता) वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण जारी लाकडाउन ने लोगों के जीने के अंदाज को बदल दिया है और इसमें नट समुदाय भी अछूता नहीं है।

see more..
कई कारोबारियों के बिजनेस पार्टनर है ‘ठाकुर’

कई कारोबारियों के बिजनेस पार्टनर है ‘ठाकुर’

29 May 2020 | 9:38 PM

मथुरा 25 मई (वार्ता) व्यापार को चमकाने के लिए ‘ठाकुर’ को ’बिजनेस पार्टनर’ बनाने की निराली परंपरा भक्तों द्वारा ब्रज के मंदिरों में लम्बे समय से अपनाई जा रही है।

see more..
महोबा में जागरूकता अभियान के साथ अनूठे अंदाज में मनाई गई आल्हा की जयंती

महोबा में जागरूकता अभियान के साथ अनूठे अंदाज में मनाई गई आल्हा की जयंती

29 May 2020 | 9:38 PM

महोबा, 25मई (वार्ता) उत्तर प्रदेश के महोबा में बारहवीं शताब्दी के महान योद्धा चंदेल सेनानायक, महाबली आल्हा की जयंती सोमवार को कोरोना जागरूकता अभियान के साथ अनूठे अंदाज में मनाई गई।

see more..
प्रकृति की खातिर हर साल 21 दिन का लॉकडाउन जरूरी: पर्यावरणविद

प्रकृति की खातिर हर साल 21 दिन का लॉकडाउन जरूरी: पर्यावरणविद

24 May 2020 | 4:01 PM

इटावा, 24 मई (वार्ता) कोरोना संक्रमण के चलते देशव्यापी लाकडाउन ने सरकार और आम आदमी की मुश्किलों में इजाफा किया है लेकिन आपदा की इस घड़ी ने प्रकृति के सौंदर्य को बरकरार रखने के लिये नियमित अंतराल में मानव दखलदांजी पर रोक लगाने को लेकर एक नयी बहस को जन्म दे दिया है।

see more..
image