Friday, Aug 7 2020 | Time 15:22 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की तीन दिवसीय हड़ताल शुरु
  • करुणानिधि को हर्षवर्धन ने दी श्रद्धांजलि
  • खाद्यान्न, पोषण सुरक्षा के लिए कृषि को अधिक कुशल, लाभदायक, उत्पादक बनाने की जरूरत- वेंकैया
  • साेना 56 हजार के करीब, चाँदी 76 हजार के पार
  • स्वदेशी शिल्प को संरक्षित करने के प्रयास सराहनीय: मोदी
  • प्रेरक है टैगोर का लेखन, कवितायें और विचार:हर्षवर्धन
  • नागार्जुन सागर आयकट किसानों को पानी देने के निर्देश
  • कर्नाटक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ युसूफ का निधन
  • नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान ने किया संघर्ष विराम का उल्लंघन, तीन नागरिक घायल
  • सामाजिक अंतर को पाटने का सेतु बनें लोकसेवक:नायडू
  • दिल्ली में ई-वाहन नीति की घोषणा, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर मिलेगी छूट
  • श्रीलंका में महिन्द्रा राजपक्षे नीत एसएलपीपी की आम चुनाव में जबरदस्त जीत
  • देश में कोरोना रिकवरी दर 68 प्रतिशत के करीब
  • दरभंगा में किशोर की गला रेतकर हत्या
  • भारत आने वाले यात्री शनिवार से ‘एयर सुविधा’ पोर्टल पर कर सकेंगे स्वघोषणा
India


अयोध्या मामले में जमीयत ने दायर की पुनर्विचार याचिका

अयोध्या मामले में जमीयत ने दायर की पुनर्विचार याचिका

नयी दिल्ली, 02 दिसंबर (वार्ता) अयोध्या का राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद जमीन विवाद सोमवार को उस वक्त एक बार फिर उच्चतम न्यायालय की दहलीज पर पहुंच गया, जब जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने पुनर्विचार याचिका दायर की।
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के उत्तर प्रदेश के प्रमुख अशहद रशीदी ने अयोध्या मामले में गत नौ नवंबर को शीर्ष अदालत का ऐतिहासिक फैसला आने के करीब तीन हफ्ते बाद पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। दो सौ सत्रह पन्नों की इस याचिका में याचिकाकर्ता ने संविधान पीठ के फैसले पर सवाल उठाए हैं। याचिका में मुस्लिम संगठनों का पक्ष दोबारा सुने जाने की मांग की गई है।
अपनी याचिका में जमीयत ने न्यायालय से आग्रह किया है कि वह गत नौ नवंबर को अपने फैसले की समीक्षा करे। साथ ही उसने हिन्दुओं के पक्ष में आए उक्त फैसले पर रोक लगाने की भी मांग अदालत से की है।
पुनर्विचार याचिका में जमीयत ने कहा है कि शीर्ष अदालत ने माना है कि हिन्दुओं द्वारा इस स्थल पर 1934, 1949 और 1992 में गैर-कानूनी काम किए गए। न्यायालय ने इन कृत्यों की निंदा भी की है, इसके बावजूद यह जमीन हिन्दू पक्ष को दे दी गई? इसलिए इस फैसले पर रोक लगायी जानी चाहिए।
गौरतलब है कि न्यायालय ने मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिमों को अयोध्या में कहीं और पांच एकड़ ज़मीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसे जमीयत ने शरीयत के ख़िलाफ़ बताया है। जमीयत का कहना है कि मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद के लिए कहीं और जमीन नहीं मांगी थी, लेकिन फैसले में संतुलन बनाने के इरादे से ऐसा आदेश सुनाया गया।
जमीयत ने अपनी समीक्षा याचिका में दावा किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुस्लिम पक्ष मानता है कि काफ़ी दिनों से चले आ रहे इस विवाद का जल्द से जल्द अंत हो। जमीयत ने कहा है कि इतिहास में हुई ग़लतियों को न्यायालय सुधार नहीं सकता। मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाए जाने के अभी तक कोई सबूत भी नहीं मिले हैं।
जमीयत ने न्यायालय से आग्रह किया है कि प्राचीन काल में आए पर्यटकों और घुमंतुओं द्वारा रचित वृत्तांतों पर भरोसा करना सही नहीं है और उन्हें काफ़ी बारीकी से पढ़ा जाना चाहिए। जमीयत ने फ़ैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया है। इस पुनर्विचार याचिका में संविधान पीठ के फ़ैसले में ’14 गलतियां’ गिनाई गई हैं और दावा किया गया है कि फैसले की समीक्षा का आधार भी यही है।
सुरेश आशा
वार्ता

More News
सामाजिक अंतर को पाटने का सेतु बनें लोकसेवक:नायडू

सामाजिक अंतर को पाटने का सेतु बनें लोकसेवक:नायडू

07 Aug 2020 | 3:02 PM

नयी दिल्ली ,07 अगस्त (वार्ता) उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने लोकसेवकों से धनी -निर्धन, महिला - पुरुष और शहरी - ग्रामीण अंतर को पाटने का सेतु बनने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि उन्हें नये भारत के निर्माण कार्य में सक्रियता से जुटना चाहिए।

see more..
देश में कोरोना रिकवरी दर 68 प्रतिशत के करीब

देश में कोरोना रिकवरी दर 68 प्रतिशत के करीब

07 Aug 2020 | 2:41 PM

नयी दिल्ली ,07 अगस्त (वार्ता) देश भर में पिछले 24 घंटे में 49,769 कोरोना संक्रमितों के रोगमुक्त होने से कोरोना रिकवरी दर बढ़कर 67.98 प्रतिशत हो गयी है।

see more..
image