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राज्य


लेखन व्यास शैली से किया डिजिटल युग में प्रवेश-भगत

उदयपुर 03 सितम्बर (वार्ता) माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय नोयडा के निदेशक अरूण भगत ने कहा है कि लेखन कभी व्यास शैली में हुआ करता था जो आज डिजिटल युग में समास शैली में होने लगा है।
श्री भगत आज यहां मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग और राजस्थान साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में डिजिटल मीडिया और साहित्य विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया में पर्याप्त सामग्री का अभाव है। लेखक एवं पाठक के बीच आत्मियता का संबंध खत्म सा हो गया है। संपादन कौशल का स्तर गिरता जा रहा है।
डिजिटल दौर की पत्रकारिता के सामने आ रही 16 चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सच है डिजिटल मीडिया ने साहित्य का लोकतांत्रिकरण कर दिया है।
मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के अध्यक्ष देवेंद्र दीपक ने कहा कि डिजिटल साहित्य में संशोधन की साहित्य नहीं है। अपनी लिखी रचना का त्रुटिदोष दूर करना संभव नहीं है। इस डिजिटल प्रणाली ने हमारे सामने घोर असामाजिकता पेश की है। इससे शरीर रचना पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरूष ने सवाल उठाया कि क्या यह संभव है कि सूचनाओं के अंधड़ में हमें समृद्ध करने वाला यह नया डिजिटल माध्यम हमारी साहित्यिक रचनात्मकता को भी समृद्ध करेगा। यह जरूरी नहीं है कि डिजिटल विस्तार अनिवार्यत: साहित्यिक विकास को भी सुनिश्चित करे। सोशल मीडिया के असीमित प्रयोग से रचनात्मकता और सृजनशीलता पर विपरीत असर हुआ है।
रामसिंह जोरा
वार्ता
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