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रायबरेली एम्स में हुई पहली सफल ओपन हार्ट सर्जरी

रायबरेली 06 अप्रैल (वार्ता) उत्तर प्रदेश में रायबरेली के मुंशीगंज स्थिति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पहली ओपेन हार्ट सर्जरी कर मरीज को हृदय की नसों के अवरोध को मुक्त कर रक्त संचार सुचारू किया गया।
एम्स के प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि यहां पहली ओपन हार्ट बाईपास सर्जरी ह्रदय वक्ष एवं रक्त वाहिका शल्य चिकित्सा विभाग (सीटीवीएस) ने हाल में की है।
बताया गया कि ह्रदय रोगी 73 वर्षीय एक मरीज़ को मामूली कार्यों में भी छाती में दर्द होने लगा था। दवा से आराम नहीं मिल रहा था। एम्स रायबरेली में मरीज़ ने कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ आशीष जैन को दिखाया। जांच हुई तो दिल की सभी नसें ब्लॉक पाई गई। मरीज़ को बाईपास सर्जरी के लिए दिल की सर्जरी के विभाग (सीटीवीएस) में भेजा गया।
सीटीवीएस विभाग में डॉ संकल्प ने जटिल सर्जरी कर के दिल की तीनों बंद नसों को एक बार में ही बाईपास कर के खोल दिया ।
गौरतलब है कि सर्जरी बीटिंग हार्ट मतलब धड़कते व चलते हुए दिल पे की गई थी जो की बहुत जटिल होता है । इसको ऑफ पंप बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (ओपीसीएबी) कहते है। बाईपास सर्जरी में मरीज़ के अपने हाथ पैर या छाती की नसों को निकाल कर दिल की नसों से सील देतें है। इससे दिल को खून के नए स्त्रोत मिल जातें हैं। इस सर्जरी में डॉ संकल्प के साथ डॉ सुरेंदर जांगिड़ (कार्डियक एनेस्थेटिस्ट), डॉ विष्णु सिद्धार्थ, नर्सिंग अफसर आंचल कटोच और अंजू यादव ने अहम भूमिका निभाई। सर्जरी के बाद मरीज़ को फेंफड़े के इन्फेक्शन की वजह से ब्लड प्रेशर कम हो गया (वैसोप्लीजिआ सिंड्रोम) जोकि अधिकतर जानलेवा होता हैं । आईसीयू में कई दिन डॉ संकल्प ने मरीज़ का गहन उपचार किया। मरीज़ अब पूर्णतः स्वस्थ्य हैं । चलने फिरने में छाती में अब दर्द नहीं है।
डॉ संकल्प ने बताया कि दिल की नसों में सिकुड़न की बाईपास सर्जरी दशकों से जांचा परखा और उम्दा इलाज हैं । इसमें सारी बंद नसों को एक ही बार में बाईपास कर के खोल देतें हैं, जिससे मरीज़ को पूर्ण रूप से राहत मिल जाती है। बाईपास की नसें लम्बे समय तक चलतीं हैं, बार-बार मरीज़ को छाती में दर्द की दिक्कत और भविष्य में दिल को दौरे पड़ने की सम्भावना कम हो जाती हैं। जिन मरीज़ों की दिल की बांयें तरफ की मुख्य नस या फिर तीनो नसें सिकुड़ी या बंद होती हैं, उन में बाईपास सर्जरी सभी प्रकार के उपचारों में से सर्वोत्तम पाया गया है। मरीज़ अक्सर ओपन सर्जरी यानी चीरे के नाम से घबरातें हैं , और बाईपास सर्जरी के दीर्घकालिक फायदों से वंचित रह जातें हैं।
इस के अलावा विभाग में दिल के सभी प्रकार के वाल्व और छेद के ऑपरेशन नियमित रूप से करे जा रहें हैं । ये आयुष्मान निधि में निशुल्क हो जातें हैं। अन्यथा की स्थिति में सर्जरी के प्रकार अनुसार एक- दो लाख रूपए में दिल की सर्जरी सी0टी0वी0एस0 विभाग में हो रही हैं।
सं सोनिया
वार्ता
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