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वर्तमान में पीपीपी का संचालन पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टाे के शौहर आसिफ अली जरदारी एवं पुत्र बिलावल भुट्टो कर रहे हैं , जबकि पीएमएल-एन की बागडोर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ के हाथों है। श्री नवाज शरीज को पिछले साल भ्रष्टाचार के आरोप में प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ कर दिया गया था और वह इन दिनों 10 साल के लिए जेल में बंद हैं।
पीपीपी और पीएमएल-एन ने छोटे राजनीतिक दलों के समूहों के साथ एक महाविपक्ष गठबंधन का गठन किये जाने की घोषणा की है। गठबंधन ने प्रधानमंत्री और संसद अध्यक्ष के पद के लिए वैकल्पिक उम्मीदवारों के मनोनयन की योजना बनायी है।
विश्लेषकों का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि विपक्षी दल सरकार का गठन कर पाने में सक्षम हैं , क्योंकि उन्हें उन वोटरों के हाथ से निकलने का डर है , जिनके बीच श्री खान लोकप्रिय हैं।
एक राजनीतिक समीक्षक अली सरवर नकवी ने कहा कि विपक्षी दल गलियों में मजबूती साबित करने में अयोग्य रहे हैं , जबकि श्री खान के आगमन को लेकर काफी उत्सुकता का माहौल रहा ।
दूसरी तरफ बहुत से लोगों का मानना है कि विपक्षी गठबंधन आने वाले कुछ वर्ष तक संसद में अपनी मौजूदगी को मजबूती दे सकती है और अपनी ताकत दिखा सकती है । वह भी ऐसे समय पर , जब श्री खान की सरकार पहली बार देश का बजट तैयारी करेगी आैर वह अलोकप्रिय खर्चों में संभावित कटौती अथवा करों में वृद्धि करे।
राजनीतिक समीक्षक गाजी सलाहुद्दीन ने समाचारपत्र ‘ द न्यूज ’ से कहा कि जिस समय नयी सरकार के समक्ष मुश्किलें खड़ी होंगी , विपक्ष मजबूत होगा। विशेषकर तब , जब श्री खान स्वयं अलोकप्रिय हो जायें।
टंडन आशा
वार्ता
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