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टैक्सी चालक राज रघुनाथ ने कहा कि लोग भले ही शहरों में हिंदी या भोजपुरी कम बोलते नजर आयें लेकिन गांवों में अभी भी ज्यादातर लोग हिंदी या भोजपुरी बोलते हैं। इसमें यहां की महिलाएं सबसे आगे हैं। लोग मानते हैं कि अपनी संस्कृति को बचाये रखने के लिए अपनी भाषा को बचाना जरूरी है।
भारत और मॉरीशस की सरकार इसके लिए पूरी कोशिश कर रही है। अब तो माता-पिता का भी रुझान हिंदी या अन्य भारतीय भाषा की ओर बढ़ रहा है। सेशल्स एयरलाइंस में काम करने वाली स्मिता सुबल ने कहा कि उनके माता-पिता अच्छी भोजपुरी बोलते हैं और वह उनसे कभी-कभी भोजपुरी में बातें करती हैं। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि सभी को अपनी मातृभाषा बोलनी चाहिए। उनके दो बच्चे शुभम और साक्षी अभी बहुत छोटे हैं लेकिन दोनों भोजपुरी बोलना जानते हैं। उन्होंने कहा कि एयलाइंस की एक अन्य सहकर्मी मनीषा कुलपतया भी भोजपुरीभाषी हैं। काम के दौरान मौका मिलने पर दोनों भोजपुरी में बातें करती हैं।
श्रीमती सुबल ने कहा कि मॉरीशस में हिंदी, भोजपुरी और भारतीय संस्कृति का सूरज कभी अस्त नहीं होने वाला है। भारत और मॉरीशस सरकार के प्रयास से यहां शुरू की गयी पाणिनि प्रयोगशाला का लाभ भारतीय भाषा सीखने के इच्छुक लोगों को अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि मॉरीशस के सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था है और वहां विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है। इसके कारण अब यहां बड़ी संख्या में लोग हिंदी पढ़ रहे हैं। शिवा.श्रवण
वार्ता
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