Wednesday, Jul 17 2019 | Time 18:38 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • मुख्यमंत्री ने दिये भ्रष्टाचार और शिकायतों के निपटान में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई के आदेश
  • फ्रांस में ग्लाइडर गिरा, दो लोगों की मौत
  • ऑर्डिनेंस फैक्ट्री देहरादून की आधुनिक नाईट विज़न डिवाइस
  • जालंधर में एम्स खुलने से पंजाब, हिमाचल को होगा विशेष लाभ
  • कांग्रेस ने रमेश कुमार से व्हिप पर मांगा स्पष्टीकरण
  • विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान माँगें बिना चर्चा के लोकसभा में पारित
  • धान की पराली से निपटने के लिए अल्ट्रा आधुनिक उपकरणों का करें उपयोग: सिंह
  • हरियाणा में आठ आईएएस और 25 एचसीएस अधिकारियों के तबादले
  • दस घंटों के ऑपरेशन के बाद मैकेनिक के दोनों कटे पैर जोड़े
  • नेमार फाइव स्पर्धा में हंगरी, स्लोवाकिया बने विजेता
  • नेमार फाइव स्पर्धा में हंगरी, स्लोवाकिया बने विजेता
  • पहले दिन किआ सेल्टॉस की रिकार्ड बुकिंग
  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने एनआईडी संशोधन विधेयक 2014 को दी मंजूरी
  • एनआईए को विदेश में भी जांच का अधिकार, कानून का दुरूपयोग नहीं: अमित शाह
  • 2019-20 के लिए विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों की अनुदान माँगे (गिलोटीन) तथा उनसे संबंधित विनियोग विधेयक लोकसभा में पारित
मनोरंजन


जब मुकेश के कहने पर अनिल विश्वास ने गाना छोड़ दिया

जब मुकेश के कहने पर अनिल विश्वास ने गाना छोड़ दिया

..जन्मदिवस 07 जुलाई के अवसर पर ...

मुंबई 06 जुलाई (वार्ता)भारतीय सिनेमा जगत में अनिल विश्वास को एक ऐसे संगीतकार के तौर पर याद किया जाता है जिसने मुकेश, तलत महमूद समेत कई पार्श्वगायको को कामयाबी के शिखर पर पहुंचाया।

मुकेश के रिश्तेदार मोतीलाल के कहने पर अनिल विश्वास ने उन्हें अपनी एक फिल्म में गाने का अवसर दिया था लेकिन उन्हें मुकेश की आवाज पसंद नहीं आयी बाद में उन्होंने मुकेश को वह गाना अपनी आवाज में गाकर सुनाया। इसके बाद मुकेश ने अनिल विश्वास ने कहा ..दादा बताइये कि आपके जैसा गाना भला कौन गा सकता है। यदि आप ही गाते रहेंगे तो भला हम जैसे लोगों को कैसे अवसर मिलेगा। मुकेश की इस बात ने अनिल विश्वास को सोचने के लिये मजबूर कर दिया और उन्हें रात भर नींद नही आयी। अगले दिन उन्होंने अपनी फिल्म ..पहली नजर ..में मुकेश को बतौर पार्श्वगायक चुन लिया और निश्चय किया कि वह फिर कभी व्यावसायिक तौर पर पार्श्वगायन नहीं करेंगे ।

अनिल विश्वास का जन्म सात जुलाई 1914 को पूर्वी बंगाल के वारिसाल (अब बंगलादेश) में हुआ था। बचपन से ही अनिल विश्वास का रूझान गीत- संगीत की ओर था। महज 14 वर्ष की उम्र से ही उन्होंने संगीत समारोह में हिस्सा लेना

शुरू कर दिया था जहां वह तबला बजाया करते थे। वर्ष 1930 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। देश को

स्वतंत्र कराने के लिय छिड़ी मुहिम में अनिल विश्वास भी कूद पड़े। इसके लिये उन्होंने अपनी कविताओं का सहारा लिया। कविताओं के माध्यम से अनिल विश्वास देशवासियों मे जागृति पैदा किया करते थे। इसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

   वर्ष 1930 में अनिल विश्वास कलकत्ता (अब कोलकाता) के रंगमहल थियेटर से जुड़ गये जहां वह बतौर अभिनेता.पार्श्वगायक और सहायक संगीत निर्देशक काम करते थे। वर्ष 1932 से 1934 अनिल विश्वास थियेटर से जुडे रहे। उन्होंने कई नाटको में अभिनय और पार्श्वगायन किया। रंगमहल थियेटर के साथ ही अनिल विश्वास हिंदुस्तान रिकार्डिंग कंपनी से भी जुड़े। वर्ष 1935 में अपने सपनों को नया रूप देने के लिये वह मुंबई आ गये। वर्ष 1935 में प्रदर्शित फिल्म ..धरम की देवी.. से बतौर संगीत निर्देशक अनिल विश्वास ने अपने सिने करियर की शुरूआत की। साथ ही फिल्म में उन्होंने अभिनय भी किया।

वर्ष 1937 में महबूब खान निर्मित फिल्म ..जागीरदार ..अनिल विश्वास के सिने करियर की अहम फिल्म साबित हुयी जिसकी सफलता के बाद बतौर संगीत निर्देशक वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये। वर्ष 1942 में अनिल विश्वास बांबे टॉकीज से जुड़ गये और 2500 रूपये मासिक वेतन पर काम करने लगे। वर्ष 1943 में अनिल विश्वास को बांबे टॉकीज निर्मित फिल्म..किस्मत.. के लिये संगीत देने का मौका मिला। यूं तो फिल्म किस्मत मे

उनके संगीतबद्ध सभी गीत लोकप्रिय हुये लेकिन ..आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है दूर हटो ए दुनियां वालों हिंदुस्तान हमारा है.. ने आजादी के दीवानो में एक नया जोश भर दिया।

अनिल विश्वास ने अपने गीतों को गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और उनके गीतों ने अंग्रेजो के विरूद्ध भारतीयों के संघर्ष को एक नयी दिशा दी। यह गीत इस कदर लोकप्रिय हुआ कि

फिल्म की समाप्ति पर दर्शकों की फरमाइश पर सिनेमा हॉल में इसे दुबारा सुनाया जाने लगा। इसके साथ ही फिल्म ..किस्मत.. ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकार्ड तोड दिये। इस फिल्म ने कलकत्ता (अब कोलकाता) के एक सिनेमा हॉल मे लगातार लगभग चार वर्ष तक चलने का रिकार्ड बनाया।

    वर्ष 1946 में अनिल विश्वास ने बांबे टॉकीज को अलविदा कह दिया और वह स्वतंत्र संगीतकार के तौर पर काम करने लगे। स्वतंत्र संगीतकार के तौर पर अनिल विश्वास को सबसे पहले वर्ष 1947 में प्रदर्शित फिल्म ..भूख ..में संगीत देने का मौका मिला। रंगमहल थियेटर के बैनर तले बनी इस फिल्म में पार्श्वगायिका गीतादत्त की आवाज में संगीतबद्ध अनिल विश्वास का गीत ..आंखों में अश्क लब पे रहे हाय ..काफी लोकप्रिय हुआ।

वर्ष 1947 में ही अनिल विश्वास की एक और सुपरहिट फिल्म प्रदर्शित हुयी थी ..नैय्या .. जोहरा बाई की आवाज में अनिल विश्वास के संगीतबद्ध गीत ..सावन भादो नयन हमारे.आई मिलन की बहार रे ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वर्ष 1948 में प्रदर्शित फिल्म..अनोखा प्यार .अनिल विश्वास के सिने करियर के साथ..साथ व्यक्तिगत जीवन में अहम फिल्म साबित हुयी। फिल्म का संगीत तो हिट हुआ ही साथ ही फिल्म के निर्माण के दौरान उनका झुकाव भी पार्श्वगायिका मीना कपूर की ओर हो गया। बाद में अनिल विश्वास और मीना कपूर ने शादी कर ली।

साठ के दशक में अनिल विश्वास ने फिल्म इंडस्ट्री से लगभग किनारा कर लिया और मुंबई से दिल्ली आ गये। इस बीच उन्होंने सौतेला भाई.छोटी- छोटी बातें जैसी फिल्मों को संगीतबद्ध किया। फिल्म छोटी- छोटी बातें हालांकि बॉक्स ऑफिस पर कामयाब नहीं रही लेकिन इसका संगीत श्रोताओं को पसंद आया। इसके साथ ही फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित की गयी। वर्ष 1963 में अनिल विश्वास दिल्ली प्रसार भारती में बतौर निदेशक काम करने लगे और वर्ष 1975 तक काम करते रहे। वर्ष 1986 में संगीत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपने संगीतबद्ध गीतों से लगभग तीन दशक तक श्रोताओं का दिल जीतने वाले इस महान संगीतकार ने 31 मई 2003 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

वार्ता

More News
बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार थे राजेश खन्ना

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार थे राजेश खन्ना

17 Jul 2019 | 12:04 PM

मुंबई 17 जुलाई (वार्ता) हिंदी फिल्म जगत में अपने अभिनय से लोगों को दीवाना बनाने वाले अभिनेता तो कई हुये और दर्शकों ने उन्हें स्टार कलाकार माना पर सत्तर के दशक में राजेश खन्ना पहले ऐसे अभिनेता के तौर पर अवतरित हुये जिन्हें दर्शको ने सुपर स्टार की उपाधि दी।

see more..
ओ साकी साकी गाना आज भी लोकप्रिय :संजय दत्त

ओ साकी साकी गाना आज भी लोकप्रिय :संजय दत्त

17 Jul 2019 | 11:57 AM

मुंबई 17 जुलाई (वार्ता) बॉलीवुड के माचो हीरो संजय दत्त का कहना है कि वह इस बात को लेकर बेहद खुश है कि ओ साकी साकी गाना आज भी लोकप्रिय है और उसका रीमेक बनाया गया है।

see more..
कैरक्टर रोल्स के लिए तैयार हूं: संजय दत्त

कैरक्टर रोल्स के लिए तैयार हूं: संजय दत्त

17 Jul 2019 | 11:47 AM

मुंबई 17 जुलाई (वार्ता) बॉलीवुड के माचो हीरो संजय दत्त का कहना है कि अब उनकी उम्र किसी हीरोइन के साथ पेड़ों के आस-पास नाचने-गाने की नहीं रही और वह अब कैरक्टर रोल्स के लिए तैयार हैं।

see more..
करीना से काफी प्रभावित हैं दिलजीत दोसांझ

करीना से काफी प्रभावित हैं दिलजीत दोसांझ

17 Jul 2019 | 11:40 AM

मुंबई 17 जुलाई (वार्ता) पंजाबी फिल्मों के सुपरस्टार गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ का कहना है कि वह करीना कपूर से काफी प्रभावित हैं।

see more..
मेहनत और संघर्ष से मेगास्टार बने रवि किशन

मेहनत और संघर्ष से मेगास्टार बने रवि किशन

17 Jul 2019 | 10:38 AM

मुंबई 17 जुलाई (वार्ता) भोजपुरी सिनेमा के मेगास्टार रवि किशन आज 50 वर्ष के हो गये। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में मेहनत और संघर्ष से अपनी खास पहचान बनायी है।

see more..
image