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चंबल के पानी से चलती है यमुना की सांसे

चंबल के पानी से चलती है यमुना की सांसे

इटावा , 27 मई (वार्ता) उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की सीमा को जोड़ने वाले दुर्गम बीहडो के बीच से कल कल बहती चंबल नदी का जल देश की सबसे प्रदूषित समझी जाने वाली यमुना नदी को जीवनदान देता है ।


     राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के इटावा तक सबसे बुरे हालात से गुजर रही यमुना नदी को चंबल नदी का जल एक नई राह दिखाता है । असल मे चंबल नदी इटावा जिले के भरेह मे यमुना नदी मे समाहित हो जाती है जहॉ से यमुना नदी के दशा सुधर जाती है ।

     पर्यावरणीय संस्था सोसायटी फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर के सचिव संजीव चौहान एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताते है कि यमुना नदी का सबसे प्रदूषित हिस्सा दिल्ली से उत्तर-प्रदेश के इटावा तक है । अध्ययन रिपोर्ट मे कहा गया है कि पोंटा (हिमाचल प्रदेश) से प्रतापपुर (यूपी) के बीच 12 जगहों से पानी लिया गया। इनमें पोनटा (हिमाचल प्रदेश), कलानौर (हरियाणा), मावी (यूपी), पल्ला (दिल्ली), मोहना (यूपी), मथुरा (यूपी), आगरा (यूपी), इटावा (यूपी) जैसी जगह शामिल हैं।

      यह नमूने लगातार दो साल 2014 और 2015 में लिए गए और वैज्ञानिकों ने उसकी रिपोर्ट तैयार की । इसी रिपोर्ट के आधार पर अब यह दावा किया गया है कि दिल्ली से इटावा के बीच यमुना सबसे अधिक प्रदूषित है । इन सैंपलों को कई मापदंडों पर परखा गया। जिसमें तापमान, पीएच, डिजाल्वड आक्सीजन, बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड, टोटल डिजाल्वड सालिड आदि शामिल हैं । इस जांच के रिजल्ट के बाद इन बिंदुओं पर पानी को इंडियन वाटर क्वालिटी स्टैंटर्ड पर रखा गया।

श्री चौहान ने बताया कि पानी की गुणवत्ता के आधार पर यमुना नदी को चार ग्रुप में बांटा गया है । जिसमें पहला ग्रुप पोनटा, कलानौर, मावी और पल्ला है। इस जगह का पानी पीने के लिए भी उपयुक्त है और खेती और जलीय जीवन के लिए भी । दूसरे ग्रुप में दिल्ली, मोहाना और मथुरा शामिल है। इस हिस्से में कुछ ड्रेन से आर्गेनिक लोड काफी अधिक नदी में मिल रहा है इसलिए इस हिस्से का पानी न तो पीने के और न ही नहाने के लायक है लेकिन यह मछलियों के लिए कुछ हद तक ठीक है।

       अध्ययन के तीसरे ग्रुप में आगरा से इटावा तक के हिस्से को शामिल किया गया है। इस हिस्से का पानी भी पीने लायक नहीं है लेकिन इसे ट्रीट कर पीने के लायक बनाया जा सकता है। इस हिस्से में यमुना के प्रदूषण की वजह घरों और खेती से निकलने वाला प्रदूषण है। जबकि चौथे हिस्से में औरेया, हमीरपुर और प्रतापपुर शामिल हैं। इस हिस्से में नदी अपने सबसे अच्छे रूप में है। यहां नदी के पानी को विभिन्न कामों के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

      उन्होने बताया कि अध्ययन मे कहा गया है कि यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली यमुना देश के सात हिस्सों से गुजरती है । यह नदी करीब लाखों लोगों को उनकी जरूरत के लिए पानी देती है। इसके बावजूद इसमें घरों, इंडस्ट्री और खेती से निकलने वाले प्रदूषण डाले जा रहे हैं। जिसकी वजह से इस नदी में प्रदूषण काफी अधिक बढ़ गया है। इस प्रदूषण की वजह से यमुना नदी का पूरा इकोसिस्टम बदल रहा है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव यमुना नदी की बदहाली पर कहते है कि देश की राजधानी दिल्ली के पास यमुना नदी साफ है लेकिन उसके आगे मैली है जिसका कारण सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्टों को नदी में छोड़ा जाना है। उनका कहना है कि इटावा में यदि चंबल का पानी यमुना में न मिले तो यमुना बदहाल नजर आएगी ।

     यमुना नदी के जल को कभी राजतिलक करने के काम में प्रयोग किया जाता था लेकिन आज उसी यमुना नदी के जल को कोई छूना भी पसंद नहीं कर रहा है । वजह साफ है कि यमुना नदी इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि वह एक नदी न होकर कचरे का नाला बनकर रह गयी है, धार्मिक नदी का दर्जा पाये यमुना नदी के इस हाल के लिये जिम्मेदार का पता लगाना जरूरी है।

      हिंदु धर्म परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आंनदेश्वर गिरी लाल बाबा मानते हैं कि यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भी गंगा नदी की तरह देश भर में एक जन-जागरण अभियान शुरू करने की बेहद जरूरत है ।

सं प्रदीप

वार्ता

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