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राज्यपाल के प्रयासों से विश्वविद्यालयों में आया बदलाव

राज्यपाल के प्रयासों से विश्वविद्यालयों में आया बदलाव

जयपुर, 03 सितम्बर (वार्ता) राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति कल्याण सिंह के प्रयासों से स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा, हर समय लहराता राष्ट्रीय ध्वज, कुलगीत और अनुसंधान पीठों की स्थापना से जहां विश्वविद्यालयों में राष्ट्र प्रेम और देश भक्ति का नया माहौल बना है वहीं विश्वविद्यालयों में कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता आने के साथ इनके इतिहास, उद्वेश्यों, विशेषताओं और राज्य की शौर्य गाथा पर आधारित कुलगीतों का गौरव गान होने लगा है।

श्री सिंह की मंशा एवं पैनी नजर से राज्य के विश्वविद्यालयों में यह बदलाव आया हैं। अब अन्य राज्यों में भी राजस्थान की उच्च शिक्षा में किये गये नवाचारों को अपनाया जाने लगा है। श्री सिंह की परिकल्पना और निरन्तर माइक्रो समीक्षा से विश्वविद्यालयों की कार्य संंस्कृति में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। परिसरों में पारदर्शिता से फैसले लिए जा रहे हैं।

श्री सिंह ने चार सितम्बर 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली थी। विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री सिंह के प्रयासों से इन चार वर्षों में उच्च शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन होकर क्रांतिकारी बदलाव आ गया हैं। इन परिवर्तनों के सकारात्मक परिणाम राज्य की उच्च शिक्षा में अब दिखाई देने लगे हैं। महापुरूषों, स्थानीय लोक देवताओं पर शोध पीठों के गठन से अनुसंधान में गुणवत्ता लाने के विशेष प्रयास विश्वविद्यालयों में अब फलीभूत हो रहे है।

इससे परिसरों में स्वच्छता, नियमित कक्षाएं, समयबद्ध परीक्षा, परिणाम एवं दीक्षांत समारोहों के साथ ही कार्यो में पारदर्शिता से राज्य की उच्च शिक्षा की तस्वीर बदल गई। अब वंचितों और असहायों की आवाज सुनी जाने लगी है। किसी भी विद्यार्थी का भविष्य अंधेरे में न रहे बल्कि उसके जीवन को नई रोशनी मिले, इसके लिए गम्भीरता से प्रयास किये जा रहे हैं।

पहले विश्वविद्यालयों में वर्षों से दीक्षान्त समारोह नहीं हुए और डिग्रियां नहीं बनी थी। राज्यपाल ने विद्यार्थियों की इस समस्या को गम्भीरता से लिया। उन्होंने तीन पीढियों को एक साथ डिग्री प्रदान कर ऎतिहासिक कार्य किया। अब विश्वविद्यालयों में प्रत्येक वर्ष दीक्षांत समारोह होने लगे हैं।

श्री सिंह ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर में बायोटेक्नोलोजी विभाग में प्रोफेसर के पद पर हुई भर्ती में अनियमितता की शिकायत पर भर्ती की जांच लोकायुक्त को सौंपी जो देश में इस तरह का यह पहला मामला है। विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक माहौल बनाने और विभिन्न शैक्षणिक एवं इतर शैक्षणिक व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए श्री सिंह ने आठ सूत्रीय कार्ययोजना बनार्ई। इस कार्ययोजना में प्रवेश, पढ़ाई, परिसर, परीक्षा, परीक्षण, परिणाम, पुनर्मूल्यांकन तथा पदक जैसी विश्वविद्यालयों की समस्त गतिविधियों को शामिल किया गया। प्रत्येक गतिविधि की समीक्षा एवं समाधान का पैना मार्गदर्शन इस योजना में किया गया।

जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से सम्बद्व एक निजी कॉलेज में हो रही परीक्षा में नकल का मामला कुलाधिपति के संज्ञान में आने के बाद बाड़मेर जिले के बायतु स्थिति महादेव कॉलेज में हो रही नकल के मामले की विश्वविद्यालय के कुलपति से शीघ्र तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग कर एक ही दिन में कॉलेज के विरूद्व सख्त कार्यवाही करवा कर राज्य में चलने वाली नकल पर नकेल लगा दी।

इतना ही नहीं श्री सिंह दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिये गये गांव और ढाणियों में जाकर ग्रामीणों से बात भी करते हैं, उनकी समस्याए सुनते हैं और समस्याओं का निराकरण भी करते हैं। श्री सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने हाथों से खेती-बाड़ी की है। गांव की समस्या और किसानों की पीड़ा से वह अच्छी तरह वाफिक है, इसलिए विश्वविद्यालय द्वारा गांव को गोद लेकर वहां विकास एवं गांव को स्मार्ट बनाया जा रहा हैं।

श्री सिंह का कहना है कि राजस्थान के लोग बड़े ही भोले, सज्जन एवं सौम्य हैं। उनके स्वभाव में छल-कपट नहीं है। समूचा राजस्थान भारतीय संस्कृति का प्रतीक प्रतीत होता है। यहां कण-कण में भारतीय संस्कृति की अनुगूंज सुनाई देती है। प्राचीन रस्मोरिवाज, परम्पराएं, पहनावे आदि सर्वत्र दिखाई देते हैं। राजस्थानी लोकगीत तो आत्मा को छू लेते हैं। राजस्थान देश का अद्भुत प्रदेश है जहां लोगाें ने भारतीय संस्कृति संजो रखी है। यहां का हर नगर, हर गावं अलग-अलग विशेषताओं से भरा है।

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