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खेल


भावनाओं पर नियंत्रण मेरे कूल रहने का राज : धोनी

भावनाओं पर नियंत्रण मेरे कूल रहने का राज : धोनी

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (वार्ता) भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने बुधवार को कहा कि मैदान में भावनाओं पर नियंत्रण रखना ही उनके कूल रहने का राज है।

धोनी ने यहां कहा, “हर खिलाड़ी की तरह मैं भी उस वक्त निराश और गुस्सा हो जाता हूं जब हालात हमारे अनुकूल नहीं रहते हैं लेकिन तब मैं सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देता हूं और नकारत्मक शक्ति से दूर रहता हूं।”

उन्होंने कहा, “क्रिकेट के किसी भी प्रारुप में मैं स्थिति के हिसाब से अपने खेल पर ध्यान देता हूं। टेस्ट क्रिकेट में रणनीति बनाने के लिए आपके पास समय होता है लेकिन वनडे में समय सीमित होता है और यह आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे ही ट्वंटी-20 में हर पल स्थिति बदलती है और आपको कम समय में सोच कर अपनी रणनीति तय करनी होती है इसलिए तीनों प्रारुप अलग-अलग हैं।”

वर्ष 2007 के आईसीसी विश्वकप मुकाबले में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ बॉल आउट को याद करते हुए उन्होंने कहा कि टीम इसके लिए तैयार थी और जो स्टंप्स को ज्यादा हिट कर सकते थे उन्हें गेंदबाजी का मौका मिला। धोनी ने कहा, “हमारे पास इससे पहले तक बॉल आउट का कोई अनुभव नहीं था। हम सिर्फ अभ्यास सत्र में इसका अभ्यास करते थे। हमने निर्णय लिया था कि अगर ऐसी स्थिति बनी तो हम उन खिलाड़ियों से गेंदबाजी कराएंगे जो नेट सत्र के समय स्टंप्स पर ज्यादा गेंद हिट कराते हैं।”

धोनी ने 2007 टी-20 विश्वकप जीतने का श्रेय पूरी टीम को दिया। उन्होंने कहा, “मेरे ख्याल से सिर्फ कुछ खिलाड़ी आपको जीत नहीं दिला सकते और टीम में सभी खिलाड़ियों का योगदान जरुरी होता है और यही कारण है कि हम 2007 में जीत सके।”

शोभित, राज

वार्ता

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