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शाही बाजार की असफलता के बाद राजकुमार के तमाम रिश्तेदार यह कहने लगे कि तुम्हारा चेहरा ..फिल्म के लिये उपयुक्त नहीं है। वहीं कुछ लोग कहने लगे कि तुम खलनायक बन सकते हो। वर्ष 1952 से 1957 तक राजकुमार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिये संघर्ष करते रहे। रंगीली ..के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली राजकुमार उसे स्वीकार करते चले गये। इस बीच उन्होंने अनमोल सहारा .अवसर .घमंड . नीलमणि . और कृष्ण सुदामा जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स आफिस पर सफल नहीं हुयी।
महबूब खान की वर्ष 1957 मे प्रदर्शित फिल्म ..मदर इंडिया .. में राजकुमार गांव के एक किसान की छोटी सी भूमिका में दिखाई दिये। हालांकि यह फिल्म पूरी तरह अभिनेत्री नर्गिस पर केन्द्रित थी. फिर भी वह अपने अभिनय की छाप छोडने में कामयाब रहे। इस फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिये उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति भी मिली और फिल्म की सफलता के बाद वह अभिनेता के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गये। वर्ष 1959 मे प्रदर्शित फिल्म ..पैगाम.. में उनके सामने हिन्दी फिल्म जगत के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे लेकिन राज कुमार ने यहां भी अपनी सशक्त भूमिका के जरिये दर्शकों की वाहवाही लूटने में सफल रहे। इसके बाद दिल अपना और प्रीत पराई. घराना . गोदान . दिल एक मंदिर और दूज का चांद . जैसी फिल्मों मे मिली कामयाबी के जरिये वह दर्शको के बीच अपने अभिनय की धाक जमाते हुये ऐसी स्थिति में पहुंच गये जहां वह अपनी भूमिकाएं स्वयं चुन सकते थे।
वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म काजल की जबर्दस्त कामयाबी के बाद राजकुमार ने अभिनेता के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली। बी.आर .चोपड़ा की 1965 में प्रदर्शित फिल्म ..वक्त. में अपने लाजवाब अभिनय से वह एक बार फिर से दर्शक का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे। फिल्म में राजकुमार का बोला गया एक संवाद ..चिनाय सेठ. जिनके घर शीशे के बने होते है वो दूसरो पे पत्थर नहीं फेंका करते .. या चिनाय सेठ. ये छुरी बच्चों के खेलने की चीज नहीं. हाथ कट जाये तो खून निकल आता है .. दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए। वक्त की कामयाबी से राजकुमार शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने हमराज. नीलकमल. मेरे हुजूर. हीर रांझा और पाकीजा. में रूमानी भूमिकाए भी स्वीकार कीं. जो उनके फिल्मी चरित्र से मेल नहीं खाती थीं। इसके बावजूद राजकुमार दर्शकों का दिल जीतने मे सफल रहे।
प्रेम
जारी वार्ता
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