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ब्रज में चढने लगा है होली का नशा

ब्रज में चढने लगा है होली का नशा

मथुरा, 26 फरवरी (वार्ता) महाशिवरात्रि का पर्व सम्पन्न होेने के बाद देश-विदेश में मशहूर ब्रज की होली की तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिरों में रसिया गायन और गुलाल की होली शुरु हो गयी है। ब्रज की विभिन्न होलियों की तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं। अपर जिलाधिकारी अवस्थी ने आज यहां बताया कि नगर मजिस्ट्रेट एवं समस्त उप जिला मजिस्ट्रेट अपने अपने क्षेत्र के अधीनस्थ अधिकारियों से मिलकर होलिका दहन स्थलों का निरीक्षण करेंगे । होलिका दहन के समय आसामाजिक तत्वों से कडाई से निपटने के निर्देश दिये गए है। पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को ब्रज की होली की ओर आकर्षित करने के लिए आकाशवाणी मथुरा वृन्दावन केन्द्र नये कार्यक्रमों का प्रसारण कर रहा है। आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी देवेन्द्र सारस्वत ने बताया कि बरसाना की लठामार होली का सजीव प्रसारण छह मार्च को शाम साढ़े पांच बजे से लठामार होली के समापन तक होगा। दाऊजी के हुरंगा के साथ ही ब्रज की कुछ अन्य होलियों का प्रसारण भी केन्द्र द्वारा इस बार किया जाएगा। वैसे तो ब्रज में होली की शुरूवात वसंत पंचमी से शुरू हो जाती है जब कि ब्रज के कई मंदिरों में होली का डांढ़ा गाड़ दिया जाता है और राजभोग के समय मंदिर के गर्भगृह या जगमोहन से भक्तों पर गुलाल डाला जाता है पर होली में तेजी महाशिवरात्रि से आती है जिसमें स्वयं भोलेनाथ पार्वती के साथ होली खेलते हैंः- 


          होरी खेल रहे शिव शंकर भोला पार्वती के संग। द्वारकाधीश मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी राकेश तिवारी के अनुसार मंदिर में वसंत के दस दिन बाद से होली का डाढा गाड़ते हैं तथा माघ पूर्णिमा से फाग और रसिया शुरू हो जाते हैं । अष्टमी से रंग की होली शुरू हो जाती है। वैसे ब्रज में रंग की होली की शुरूवात विनायक चतुर्थी से रमणरेती में काष्र्णि आश्रम में होती है। इस बार विनायक चतुर्थी दो मार्च को है। उदासीन काष्र्णि आश्रम रमणरेती के अध्यक्ष स्वामी स्वरूपानन्द महराज ने बताया कि इसी दिन श्यामसुन्दर ने अपने ग्वालबालों के साथ रमणरेती में रेत से होली खेली थी। समय के साथ साथ होली का स्वरूप जिस प्रकार से गुलाल औेर अबीरयुक्त होता गया उसी प्रकार का परिवर्तन यहां होता गया। यहां पर रासलीला में यदि श्यामाश्याम की फूलों की होली होती है तो राधारानी का प्रिय मयूर नृत्य भी होता है और ब्रज का प्रमुख चरकुला नृत्य भी होता है। यहां की होली की एक और विशेषता यह है कि जिस पर्यावरण हितैषी होली की बात आज की जाती है वह यहां पर आदि काल से ही होती चली आ रही है। पिचकारी से टेसू के रंग की होली निराली होती है। कहा जाता है कि टेसू का रंग जिस किसी के शरीर पर पड़ जाता है उसे चेचक नही होती है। इस होली में जहां हजारों लोग भाग लेते हैं वहीं महामंडलेश्वर गुरूशरणानन्द महाराज इस दिन अपने शिष्यों के साथ होली खेलकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। बाद में सभी लोग यमुना में स्नान करते हैं तथा सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह कार्यक्रम इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है कि इसमें एक दूसरे के गिले शिकवे दूर कर प्रेम और सौहार्द्र का पारिवारिक वातावरण बनता है।


         महामंडलेश्वर गीता आश्रम वृन्दावन के अधिष्ठाता डा० अपशेषानन्द ने बताया कि ब्रज की अन्य होलियों में पांच मार्च को श्री राधारानी मंन्दिर बरसाना में लड्डू होली, छह मार्च को बरसाना तथा सात मार्च को नन्दगांव की प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन किया जायेगा। वाहनों की पार्किंग व्यवस्था कस्बे से बाहर की जायेगी। बरसाना और नन्दगांव की लठामार होली कार्यक्रम में शरारती/आसामाजिक तत्वों तथा छेडखानी करनेवालों को रोकने के लिए सिविल ड्रेस में पुलिस की तैनाती की जायेगी। आठ मार्च को रंगभरनी एकादशी पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर अपरान्ह तीन बजे से छह बजे की होली होगी जिसमें ब्रज की प्रमुख होलियों के दर्शन होते हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के जनसपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह के अनुसार मंदिर में रसिया गायन , घड़ा नृत्य एवं गोपी नृत्य राजभोग दर्शन के समय नित्य चल रहा है तथा जन्मस्थान की मनोहारी होली की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। ’’आज बिरज में होरी रे रसिया’’ पर गोपी नृत्य देखते ही बनता है। महामंडलेश्वर स्वामी अवशेषानन्द ने बताया कि रंगभरनी एकादशी से ही वृन्दावन की होली शुरू होती है जिसमें राधाबल्लभलाल के स्वरूप एक बग्घी पर सवार होकर ब्रजवासियों से अबीर गुलाल और रंग की इतनी होली खेलते हैं कि वृन्दावन की गलियां अबीर गुलाल से लाल हो जाती हैं। 


         अगले दिन यानी फुलेहरा दूज से वृन्दावन के राधाबल्लभ मंदिर में ठाकुर फेंटा बांधते है, उनके कपोलों पर गुलाल लगता है तथा अबीर और गुलाल की होली होती है। इसी दिन मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में टेसू के रंग की होली एवं वृन्दावन में श्री बांकेबिहारी मन्दिर की होली होती है। बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुर से होली खेलने होड़ सी लग जाती है । गेाकुल के समाजसेवी नारायण तिवारी के अनुसार गोकुल के नन्दभवन की होली नौ मार्च को पूर्वान्ह 11 बजे से मुरलीधर घाट पर इस बार होगी। यहां पर लट्ठ की जगह छड़ीमार होली खेली जाती है जिसमें गोपियां गोपों की छड़ी से पिटाई करती हैं। दस और 11 मार्च को ब्रज के मंदिरों में होली खेली जाती है तथा जगह जगह होली मिलन के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। उन्होंने बताया कि 12 मार्च को चतुर्वेदी समाज द्वारा होली का डोला द्वारिकाधीश मन्दिर से प्रारंभ होकर होलीगेट, भरतपुरगेट, चैक बाजार होते हुए द्वारिकाधीश मन्दिर तक जायेगा। इस डोले में श्रद्धालु ठाकुर के साथ गुलाल और रंग की इतनी होली खेलते हैं कि वातावरण इन्द्रधनुषी बन जाता है। 12 मार्च को ही ब्रज में होली का त्योहार मनाया जाएगा जब कि मथुरा शहर के विभिन्न भागों में होलिका की प्रतिमा स्थापित कर होलिका दहन किया जाता है। छाता तहसील के जटवारी गांव के प्रधान रामहेत ने बताया कि होली के दिन जटवारी एवं फालैन गावों में 12 मार्च की रात अलग अलग समय में देा अलग अलग पंडे होली की आग से निकलेंगे। 


          ब्रज में होली के बाद जिन मंदिरों में होली होती है उसे हुरंगा कहा जाता है। दाऊ जी मंदिर का हुरंगा ब्रज की होली का अनूठा संगम है। इस होली में श्यामाश्याम की होली के जीवंत दर्शन होते हैं।मंदिर के प्रशासनिक मैनेजर हरिओम कौशिक के अनुसार जहां धूलन्दी के दिन यानि 13 मार्च को मंदिर में महारास होगा वहीं 14 मार्च को हुरंगा होगा। श्री कौशिक ने बताया कि इस हुरंगे के लिए 25 कुंतल गुलाल, पांच कुंतल टेसू के फूल, डेढ़ कुंतल केसरिया रंग, एक कुंतल फिटकरी, दो कुंतल भुरभुर एवं दो कुंतल गेंदा और गुलाब के फूलों को प्रयोग में लाया जाएगा। होली प्रेमियों के लिए होली देखने की विशेष व्यवस्था की जाएगी। छाता तहसील के जाव गांव में 14 मार्च को ही हुरंगा होगा तथा अगले दिन बठैन का हुरंगा होगा। बठैन गांव के समाजसेवी रूपचन्द्र ने बताया कि अराजक तत्वों, शराब पीकर उत्पात करनेवालों पर 5100 रूपए का अर्थदंड लगाने का निश्चय किया गया है। महाबन तहसील में चौरासी खंभा महाबन के सेवायत आचार्य कन्हैयालाल मिश्रा के अनुसार मंदिर में छड़ी मार हुरंगा होली के बाद छठ को यानी इस बार 18 मार्च को होगा। गोवर्धन तहसील के मुखराई गांव के पूर्व प्रधान मानपाल सिंह ने बताया कि उनके गांव में ब्रज का मशहूर चरकुला नृत्य 14 मार्च को शाम को होगा।उन्होंने बताया कि उनके गांव के चरकुला ने विदेशों में भी कई बार धूम मचाई है। इसी तहसील के समाजसेवी सुभाष के अनुसार जहां अहमलकलां में 14 मार्च की शाम को ब्रज का मशहूर चरकुला नृत्य होगा वहीं सोंख में चरकुला नृत्य 21 मार्च को शाम को होगा और इसके बाद ही ब्रज की होली का समापन हो जाता है।


         

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