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राज्य » राजस्थान


तीन हजार से ज्यादा शागिर्द थे क्वीन हरीश के

जैसलमेर, 04 जून (वार्ता) पुरुष होकर भी नृत्यांगना के रूप में प्रसिद्वी पाने वाले लोक कलाकार हरीश के अकेले जापान में ही तीन हजार से ज्यादा शागिर्द थे।
रविवार को सड़क दुर्घटना में काल कलवित हुए विश्वविख्यात एवं राजस्थानी लोक संगीत नृत्य गुरु क्वीन हरीश के नाम से विख्यात ऐसा कलाकार था जिसके अकेले जापान में तीन हजार से ज्यादा शार्गिद थे और हर वर्ष इसमें लगातार वृद्धि हो रही थी। जापानी एवं अन्य कई देशों की युवक युवतियों में इस लोक गुरू से राजस्थानी लोक संगीत नृत्य सीखने की दीवानगी का यह आलम था कि हर वर्ष दर्जनों युवतियां राजस्थानी लोक संगीत एवं नृत्य सीखने जैसलमेर आती थीं। हरीश स्वयं साल में एक बार जापान के अलग अलग शहरों में जाकर राजस्थानी नृत्य सीखने के इच्छुक जापानी युवाओं को वहां कक्षाएं आयोजित करके नृत्य का प्रशिक्षण देता था।
हरीश द्वारा अब तक विभिन्न कक्षाओं के करीब तीन हजार से अधिक कलाकारों को राजस्थानी लोक संगीत एवं भारतीय लोकनृत्य में प्रशिक्षित किया गया था। वह राजस्थानी नृत्य जिसमें घुटना, चकरी, भवाई, तराजू, तेरह ताली, घूमर, चरी, कालबेलिया नृत्य में खासतौर पर पारंगत था। उसके इन नृत्यों का जादू करीब 60 देशों में फैल चुका है। उसे कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया जा चुका है। कुछ समय पूर्व रिलीज हुई प्रकाश झा की प्रसिद्व फिल्म गंगाजल पार्ट-2 में भी उन्होंने आईटम सॉन्ग किया था।
बहुप्रतिभा के धनी हरीश इंडिया गोट टैलेन्ट में भी सेमीफाईनल तक पहुंचा था। गत वर्ष उदयपुर में मुकेश अंबानी की बेटी की शादी में उन्होंने नृत्यकला का प्रदर्शन किया था। इसी दौरान प्रसिद्व अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी पुत्री आराध्या को भी नृत्य के टिप्स सिखाए थे। देश विदेश में उसने कई प्रसिद्व जानी मानी हस्तियों के समारोह एवं अन्य कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुतियां देकर अपनी कला का डंका बजाया था। उसकी प्रस्तुतियां समा बांध देती थी। वह योग प्राणायाम के जरिए देशी विदेशी सैलानियों को नृत्य भी सिखाता था।
पुरुष होते हुए भी हरीश नारी वेश में लोकनृत्य की ऐसी प्रस्तुतियां देता था कि देश विदेश के पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उसने अपना जीवन लोककला को समर्पित कर दिया था। क्वीन हरीश का लोकनृत्य देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक जैसलमेर जाते थे। उसके नृत्य को कुछ फिल्मों में भी शामिल किया गया था। देश-विदेश में उसने कई पुरस्कार भी जीते थे। राजस्थानी का यह लोक कलाकार वास्तव में नृत्य का क्वीन था। उनका असामयिक अवसान लोककला के क्षेत्र में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है जिसकी पूर्ति होना मुश्किल है।
भाटिया सुनील
वार्ता
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