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पिछले लगभग एक वर्ष से अधिक समय से सीमित ओवरों की टीम से बाहर चल रहे अश्विन और जडेजा दोनों के लिये यह टेस्ट सीरीज़ करो या मरो का मुकाबला है। यदि दोनों इस सीरीज़ में शानदार प्रदर्शन करते हैं और भारत को सीरीज़ जीत दिलाने में योगदान देते हैं तो उनके लिये 2019 में इंग्लैंड में ही होने वाले एकदिवसीय विश्वकप के लिये भारतीय टीम में वापसी का रास्ता खुल सकता है।
अश्विन 58 टेस्टों में 316 विकेट ले चुके हैं और वह सबसे तेज़ 300 विकेट पूरे करने वाले गेंदबाज है। उन्होंने 26 बार एक पारी में पांच विकेट और सात बार एक टेस्ट में 10 विकेट लिये हैं। बल्ले से भी अश्विन निचले क्रम में उपयोगी रहे हैं और अब तक 2163 रन बना चुके हैं।
भारत के सबसे कामयाब लेफ्ट आर्म स्पिनर जडेजा ने भी 36 टेस्टों में 171 विकेट लिये हैं और उनके खाते में 1196 रन भी हैं। जडेजा ने एक पारी में पांच विकेट नौ बार और एक टेस्ट में 10 विकेट एक बार लिये हैं। अश्विन ने अफगानिस्तान के खिलाफ जून में खेले गये एकमात्र टेस्ट में कुल पांच विकेट और जडेजा ने छह विकेट हासिल किये हैं। फिलहाल दोनों गेंदबाज़ भारतीय स्पिन आक्रमण की धुरी हैं लेकिन जिस तरह कुलदीप को लेकर चर्चा चल रही है उससे इन दोनों गेंदबाजों को भी खुद को साबित करने की नौबत आ गयी है।
भारत ने इंग्लैंड में अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ 1971 में जीती थी और इस इतिहास को कपिल देव ने 1986 में तथा राहुल द्रविड़ ने 2007 में दोहराया था। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शुमार विराट के पास 11 साल बाद यह इतिहास दोहराने का मौका है।
अजीत वाडेकर की कप्तानी में जब भारत ने 1971 में टेस्ट सीरीज़ जीती थी तब भागवत चंद्रशेखर, एस वेंकटराघवन और बिशन सिंह बेदी की स्पिन तिकड़ी ने सीरीज़ में कुल 37 विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई थी। चंद्रशेखर ने 13, वेंकटराघवन ने 13 और बेदी ने 11 विकेट हासिल किये थे।
राज प्रीति
जारी वार्ता
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