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वंजारा की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

मुंबई, 10 सितंबर (वार्ता) बॉम्बे उच्च न्यायालय ने संदिग्ध माफिया सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी और सहयोगी के मुठभेड़ मामले में गुजरात के पूर्व एटीएस प्रमुख डी जी वंजारा एवं चार अन्य को सोमवार को बरी कर दिया।
न्यायालय ने आज इस मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। बरी किये गये सभी पुलिस अधिकारी गुजरात और राजस्थान के हैं। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों को आरोप मुक्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली अर्जी में कोई दम नहीं है।
न्यायमूर्ति ए एम बदर ने गुजरात पुलिस के अधिकारी विपुल अग्रवाल को भी आरोपमुक्त कर दिया। अग्रवाल वर्ष 2005-06 में सोहराबुद्दीन शेख, पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के मुठभेड़ से संबंधित मामले में सह आरोपी थे।
इससे पहले निचली अदालत ने इस मामले में अग्रवाल की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने वंजारा को आरोपमुक्त किये जाने को आधार बनाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अदालत से उन्हें भी आरोपमुक्त किये जाने का अनुरोध किया।
न्यायमूर्ति बदर ने कहा कि पूर्व आईपीएस अधिकारियों वंजारा, राजकुमार पांडियन एवं एन. के. अमीन (सभी गुजरात पुलिस से) और राजस्थान पुलिस से दलपत सिंह राठौड़ की आरोपमुक्त करने को चुनौती देने वाली याचिका में कोई दम नहीं है।
सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन ने दीनेश, पांडियन और वंजारा को निचली अदालत द्वारा आरोपमुक्त किये जाने के फैसले को चुनौती दी थी। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद इस मामले को गुजरात से मुंबई भेजी गयी थी । विशेष अदालत ने अगस्त 2016 और सितंबर 2017 के बीच 38 आरोपियों में से 15 को आरोपमुक्त किया है। आरोपमुक्त किये गये व्यक्तियों में 14 पुलिस अधिकारी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं।
केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 33 लोगों के साथ इन अधिकारियों के खिलाफ भी वर्ष 2005 में सोहराबउद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी और दिसंबर 2006 में प्रजापति के फर्जी मुठभेड़ का मामला दर्ज किया था।
त्रिपाठी.संजय
वार्ता
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