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मनोरंजन-देवानंद पहचान दो मुंबई

मिलिट्री सेन्सर ऑफिस में देवानंद को 165 रूपये मासिक वेतन मिलना था, जिसमें से 45 रूपये वह अपने परिवार के खर्च के लिये भेज देते थे। लगभग एक वर्ष तक मिलिट्री सेन्सर में नौकरी करने के बाद वह अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास चले गये जो उस समय .भारतीय जन नाट्य संघ: इप्टाः से जुड़े हुये थे।उन्होंने देवानंद को भी अपने साथ इप्टा मे शामिल कर लिया ।इस बीच देवानंद ने नाटकों में छोटे मोटे रोल किये।
वर्ष 1945 में प्रदर्शित फिल्म हम एक है से बतौर अभिनेता देवानंद ने अपने सिने कैरियर की शुरूआत की।वर्ष 1948 मे प्रदर्शित फिल्म जिद्दी देवानंद के फिल्मी कैरियर की पहली हिट फिल्म साबित हुयी। इस फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र मे कदम रख दिया और नवकेतन बैनर की स्थापना की ।
नवकेतन के बैनर तले उन्होने वर्ष 1950 मे अपनी पहली फिल्म अफसर का निर्माण किया जिसके निर्देशन की जिम्मेदारी उन्होंने बडे भाई चेतन आनंद को सौंपी1इसके बाद देवानंद अपने बैनर तले वर्ष 1951 में बाजी बनायी।गुरूदत्त के निर्देशन में बनी फिल्म बाजी की सफलता के बाद देवानंद फिल्म इंडस्ट्री मे एक अच्छे अभिनेता के रूप मे शुमार हो गये ।
फिल्म अफसर के निर्माण के दौरान देवानंद का झुकाव फिल्म अभिनेत्री सुरैया की ओर हो गया था ।एक गाने की शूटिंग के दौरान देवानंद और सुरैया की नाव पानी में पलट गयी। देवानंद ने सुरैया को डूबने से बचाया। इसके बाद सुरैया देवानंद से बेइंतहा मोहब्बत करने लगीं लेकिन सुरैया की नानी की इजाजत न मिलने पर यह जोड़ी परवान नही चढ़ सकी ।वर्ष 1954 मे देवानंद ने उस जमाने की मशहूर अभिनेत्री कल्पना कार्तिक से शादी कर ली।
प्रेम
जारी वार्ता
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